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सड़ा निकला ‘राहुल गांधी युवा ब्रिगेड’ का राशन

Sat, 06 Jul 2013 01:45 AM IST
गढ़वाल/ब्यूरो
गढ़वाल/ब्यूरो Updated Sat, 06 Jul 2013 01:45 AM IST
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uttarakhand disaster rahul gandhi youth brigade ration found rotten

उत्तराखंड में राहत के नाम पर दी जा रही सामग्री सड़ी भी निकल रही है।

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गढ़वाल के नाला गांव की प्रधान विशेश्वरी देवी शुक्रवार को ग्रामीणों के लिए राहत सामग्री लेने गुप्तकाशी के राजकीय इंटर कालेज में बने राहत कैंप में पहुंची।

वहां से उन्हें तीस-चालीस बोरी राहत सामग्री की दी गई। प्रधान सामग्री लेकर जब गांव पहुंची और उसे खोला गया तो उसमें से बदबू आ रही थी।

इसके चलते ग्रामीणों ने राशन लेने से मना कर दिया। इन बोरियों पर राहुल गांधी युवा ब्रिग्रेड लिखा हुआ है। यानी यह सामग्री सरकारी राहत कैंप में राहुल गांधी युवा ब्रिग्रेड के माध्यम से पहुंचाई गई है।
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रसद न पहुंचने से भुखमरी का खतरा
आपदाग्रस्त इलाकों की हकीकत के आगे हर गांव तक राशन पहुंचाने के सरकारी दावे बेदम हैं। कई गांव ऐसे हैं, जहां 16-17 जून के बाद से अब तक राशन या राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है। यहां तक कि स्थानीय बाजार में भी राशन नहीं है। ऐसे में वहां भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है।
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दूसरों की जान बचाने के लिए किया बेटे को कुरबान

राहत सामग्री बांटने में भेदभाव को लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। राहत सामग्री के नाम पर गैरजरूरी चीजें भेजने की शिकायत के बाद अब खराब हो चुकी सामग्री भेजने का मामला भी आया है। गोदामों में सामग्री डंप होने की समस्या बरकरार है।

हालत यह है कि आपदा पीड़ितों के लिए आए बोतलबंद पानी का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारी कर रहे हैं। बदतर स्थिति तो यह कि इतने दिनों बाद भी अधिकारियों को नहीं पता कि किन-किन क्षेत्रों में क्या नुकसान हुआ है।

हाथ-पांव फूल रहे हैं प्रशासन के
गंगोत्री हाईवे क्षतिग्रस्त होने से अलग-थलग पड़े गांवों तक राहत पहुंचाने में प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं। हर्षिल, धराली, गंगोत्री और अन्य गांवों में सरकारी राशन तो दूर बाजार में भी जरूरी सामान न मिलने से भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।

गंगोत्री हाईवे 21 दिनों से उत्तरकाशी के आगे बंद है। हर्षिल, बगोरी, गंगोत्री के लोगों ने तीर्थयात्रियों के फंसे रहने के दौरान भंडारे चलाए। अब लोग आटा, चावल, चाय, चीनी, नमक, दाल के लिए तरस रहे हैं। बताते हैं कि गोदाम में राशन खत्म होने से इस क्षेत्र के लिए राशन ही नहीं बचा।

भुक्की, तिहार, कुज्जन, हुर्री, भंगेली, सालू, स्याबा, पिलंग, जौड़ाव आदि दूरदराज के गांवों में सरकार की ओर से तय राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। आरोप है कि हेलीकाप्टर कुछ सुविधाजनक स्थानों पर ही रसद पहुंचा पा रहे हैं।

रसद के बजाय बोतलबंद पानी, वह भी गोदामों में

आपदा राहत के नाम पर चमोली जिले में बनाए गए अस्थायी गोदामों में रसद के बजाय पानी की बोतलें पहुंच रही हैं। जिले में राहत सामग्री के लिए आठ अस्थायी गोदाम बने हैं। जहां करीब 15 हजार लीटर पानी की बोतलें रखी हुई हैं।

जिंदगी नहीं संभली, लाश तो संभालिए साहब...

गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, गौचर, जोशीमठ के सरकारी दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारी इनसे प्यास बुझा रहे हैं। नारायणबगड़ के 18 गांवों के पैदल और एकमात्र सड़क के ध्वस्त होने से यहां के प्रभावितों को दाने-दाने के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। इन गांवों के मुख्य बाजार कुलसारी में राशन खत्म हो गया

आपदा से नुकसान का अफसरों को पता नहीं
चमोली जिले के प्रभारी मंत्री प्रीतम पंवार ने शुक्रवार को अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों से आपदाग्रस्त क्षेत्रों की जानकारी मांगी, तो अधिकारी मुंह ताकते रहे। पूछा गया कि कितने पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हुए हैं, तो अधिकारी जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए।

..और बंदरबांट भी
थराली (चमोली) में आपदा पीड़ितों के लिए आई राहत सामग्री की बंदरबांट की भी शिकायत आई है। इसे लेकर चेपड़ों गांव की महिलाओं ने तहसील में प्रदर्शन किया। महिलाओं ने कहा कि आपदा प्रभावितों के लिए आई सामग्री प्रभावित गांवों तक भेजने की बजाय सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग रिश्तेदारों के बीच बांट रहे हैं।

कई जगह बारिश, चेतावनी बरकरार

शुक्र है कि शुक्रवार को मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी को बादल दगा दे गए। पौड़ी और चमोली जिन दो स्थानों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया, वहां बारिश तो हुई पर बहुत ज्यादा नहीं। दून समेत अन्य इलाकों में भी तेज बौछारें पड़ीं। हालांकि बादल दिन भर छाए रहे।

शनिवार को भी प्रदेश भर में बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक इस दिन दक्षिणी उत्तराखंड (पिथौरागढ़, चंपावत समेत कुमाऊं क्षेत्र के कई इलाके) में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यहां 40 से लेकर 70 मिलीमीटर तक बरसात हो सकती है।

अन्य स्थानों पर मध्यम से लेकर गरज के साथ बारिश हो सकती है। कुल 10 मिलीमीटर से लेकर 30 मिलीमीटर तक बारिश संभावित है। शुक्रवार को दून में सर्वाधिक 25.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पंतनगर में 13.0, जबकि मुक्तेश्वर में 0.2 बारिश रिकॉर्ड हुई।


पिंडर में तेज बारिश
चमोली जिले के पिंडर क्षेत्र में दोपहर बाद तेज बारिश हुई। बदरीनाथ, जोशीमठ और गोपेश्वर में शाम को हल्की बारिश शुरू हुई। हालांकि इससे पहले बृहस्पतिवार देर रात से तड़के तक कई जगह तेज बारिश होती रही। जिले में अलर्ट जारी कर नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।

मालूम हो कि मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बाद जनपद में विस्थापन का इंतजार कर रहे 74 गांव के करीब 23 हजार ग्रामीण दहशत के साये में जी रहे हैं।

ये वे गांव हैं, जो पिछले कई सालों से पुनर्वास के लिए चिह्नित हैं। पौड़ी जिले में भी शुक्रवार को दिन में रुक-रुककर बारिश होती रही। इससे ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें बंद हो गईं।

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