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जन्म से पहले ही जान पर संकट

Tue, 09 Jul 2013 03:08 PM IST
पंकज गुप्ता
पंकज गुप्ता Updated Tue, 09 Jul 2013 03:08 PM IST
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uttarakhand disaster

आपदा ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई। कई जिंदगियां इस प्रलय की भेंट चढ़ गई तो कई अभी लापता हैं। लेकिन  कई जिंदगी ऐसी भी हैं जो अभी अस्तित्व में आयी भी नहीं हैं।

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जन्म लेने से पहले ही उनके जीवन को खतरा उत्पन्न हो गया है। अगर समय रहते जिले की ध्वस्त सड़कें नहीं खुली तो इन मासूम जिंदगियों के लिए काफी परेशानी खड़ी हो सकती है।
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421 महिलाओं का होना है प्रसव
जिले में कार्यरत आशा कार्यकत्रियों ने गांव-गांव से जो आंकड़ें जुटाए अगर उन पर विश्वास करें तो आपदा की मार झेल रहे उत्तरकाशी जनपद में जुलाई माह में 421 महिलाओं का प्रसव होना है। इनमें से पांच दर्जन से अधिक केस तो ऐसे गांवों के हैं जहां न तो सुरक्षित प्रसव के इंतजाम हैं और न ही प्रसूता को अस्पताल तक पहुंचाने के रास्ते। बीते माह ढासड़ा में एक महिला की छानी में प्रसव के दौरान मौत हो चुकी है।

जान का संकट
यूं तो पूरा उत्तराखंड ही आपदा प्रभावित है, लेकिन इस आपदा ने अलग-थलग पड़े गांवों में गर्भवती महिलाओं की पीड़ा बढ़ाने के साथ ही जान का संकट भी खड़ा कर दिया है। आशा कार्यकत्रियों द्वारा गांव-गांव से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक जिले में जुलाई माह में 421 महिलाओं का प्रसव होना है।

इसमें भटवाड़ी प्रखंड के 66 तथा मोरी के 71 केस हैं। गंगोरी से आगे गंगोत्री हाईवे के साथ ही गांवों के संपर्क मार्ग ध्वस्त पड़े हैं और इनकी शीघ्र बहाली की उम्मीद भी नहीं दिख रही है। मोरी के कई सुदूरवर्ती गांव भी अलग-थलग पड़े हैं।

प्रसव के दौरान हो चुकी है मौत
परिजनों को चिंता खाए जा रही है कि सुरक्षित प्रसव के लिए उन्हें कहां और कैसे ले जाएं? बीते माह असी गंगा घाटी के ढासड़ा गांव में एक महिला की छानी में प्रसव के दौरान मौत हो चुकी है। जबकि स्याबा गांव से एक गर्भवर्ती महिला को कुर्सी पर बांधकर जिला अस्पताल तक लाना पड़ा था।


अब और महिलाओं के साथ ऐसा कुछ न हो इसके लिए त्वरित इंतजाम की आवश्यकता जताई जा रही है।

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इस आपदा ने गर्भवती महिलाओं की पीड़ा को और बढ़ा दिया है। प्रशासन को किसी भी तरह रास्ते बहाल कर प्रसुताओं के सुरक्षित प्रसव के इंतजाम करने चाहिए। जिला अस्पताल के अलावा अन्य संसाधन युक्त दूरस्थ अस्पतालों में भी डाक्टर भेजकर प्रसव की व्यवस्था कराई जा सकती है।
- गोपाल थपलियाल, परियोजना प्रबंधक एसबीएमए

रास्ते बंद होने से निश्चित ही गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने की समस्या खड़ी हो गई है। सभी एएनएम एवं अन्य स्टाफ को प्रसव से हफ्ते दस दिन पहले किसी भी तरह गर्भवती महिलाओं को निकटवर्ती अस्पतालों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
- डा.मयंक उपाध्याय, सीएमओ उत्तरकाशी

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