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आपदा के बाद भी नहीं डिगा ग्रामीणों का हौसला
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी/दीपक बेंजवाल
Updated Mon, 08 Jul 2013 08:24 AM IST
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17 जून 2013 को बारिश ने थराली कस्बे में जमकर तबाही मचाई। कई आवासीय, व्यावसायिक भवनों सहित पैदल मार्ग और कई पुल भी पिंडर बहा ले गई। इसमें थराली बाजार को जोड़ने वाला मोटर पुल भी शामिल था।
देखें, उत्तराखंड की खबरों की विशेष कवरेज
पिंडर के तेज बहाव में पुल से लेकर पार बाजार की ओर तकरीबन 24 गांवों को जोड़ने वाले पुल का एप्रोच मार्ग का 35 मीटर से अधिक हिस्सा बह गया। जिससे यहां करीब 54 गांवों का संपर्क एक-दूसरे से कट गया। तबसे लेकर लोनिवि और प्रशासन कभी यहां पर वैली ब्रिज तो कभी कुछ और कहकर आश्वासन देते रहे। लेकिन हालात जस के तस।
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आखिरकार स्थानीय लोगों ने विभाग को आइना दिखाने की ठानी और तकरीबन 30 फीट लंबी सीढ़ी पुल से खाई की ओर डाल दी और उस पर आवागमन शुरू कर दिया। लेकिन यह आवागमन जान पर बन सकता है।
इससे इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय उमाशंकर सिंह रावत, बलराज बहुगुणा, गजेंद्र रावत, आदि का कहना है कि पुल के ग्वालदम वाली रोड की ओर 30 और देवाल वाली रोड की तरफ 24 गांव हैं।
14 किमी पैदल चलना पड़ रहा है
पुल टूटने से लोग महज 100 मीटर की दूरी को पार करने के लिए 14 किमी पैदल चलना पड़ रहा है। मामले में लोनिवि राली के अधिकारियों के फोन स्विच ऑफ मिले तो एसडीएम विवेक प्रकाश ने कहा कि वे समझ रहे थे कि यह सीढ़ी लोनिवि ने डाली है। कहा मामले की पूरी जानकारी हासिल का विभाग को यहां संपर्क तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे।
ग्वालदम रोड पर बसे थराली के कस्बे
थराली, बुसेड़ी, सिमलसैंण, निरंतरनगर, बस स्टेशन, अपर बाजार, मस्जिद मार्केट, मुस्लिम बस्ती, अनुसूचित जाति बस्ती, नई बस्ती, एसबीआई और डाकघर सहित आस पास के गांव।
देवाल रोड पर बसे थराली के कस्बे
पुल बाजार पार थराली, सीएचसी, केदारबगड़, राड़ीबगड़, जीआईसी, गली मार्केट, थराली गांव, तहसील कार्यालय, बीडीओ कार्यालय सहित आसपास के गांव।
ग्रामीण बोले
19 दिनों से व्यापारी और स्थानीय लोग यहां पर विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग कर रहे थे। लेकिन लोनिवि और प्रशासन कभी वैली ब्रिज और अन्य व्यवस्था करने की बात कह टरकाते रहे। ऐसे में लोग छोटे से काम के लिए भी बैनोली होते हुए 14 किमी की पैदल दूरी पार कर रह थे।
जिससे यहां पर पुल के किनारे से नदी की ओर बल्लियां डालकर सीढ़ीनुमा पुल तैयार किया गया। 30 फीट की इस सीढ़ी उतरने के बाद नदी किनारे से दूसरे छोर आना पड़ रहा है। हालांकि इससे जोखिम बढ़ा है लेकिन विभाग को जल्द यहां पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
- रमेश थपलियाल अधिवक्ता/प्रेम सिंह बुटोला व्यापार संघ अध्यक्ष थराली
सामान भेजने के लिए बनाई मिनी ट्राली
अगस्तमुनि के लोगों ने आने-जाने का साधन पैदल पुल बहने के बाद चाका गांव के लिए सामान भिजवाने को मिनी ट्राली तैयार की है। जिसके जरिये गांव में रसद और अन्य सामग्री भिजवाई जा रही है। 16- 17 जून को सिल्ली और मंदाकिनी नदी पार चाका गांव के कई मकान बाढ़ में बह गए थे। पैदल झूला पुल भी बह गया था।
ऐसे में 125 परिवारों का चाका गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया। उन्हें रामपुर झूला पुल से तिलवाड़ा बाजार के लिए 12 किमी और गंगानगर होते हुए अगस्त्यमुनि के लिए आठ किमी का रास्ता तय करना पड़ता। लगातार भूस्खलन से यह मार्ग भी सुरक्षित नहीं है।
रसद भिजवाने का तरीका
ग्रामीणों की समस्या देखते हुए बाढ़ में अपने मकान और दुकान खो चुके रमेश बेंजवाल और भगत कंडारी ने सोमेश्वर बेंजवाल, पुरुषोत्तम गोस्वामी, उमादत्त भट्ट, राकेश पालीवाल, सतेंद्र कंडारी, राजवीर कंडारी और वीरपाल कंडारी ने सिल्ली बाजार से चाका गांव रसद भिजवाने का तरीका निकाला। उन्होंने नदी के आर-पार एक मोटा रस्सा बांधा।
इस पर एक रस्सी पर क्रेट बांधी गई। इस क्रेट से लगभग साढे़ तीन किलोग्राम सामान चाका गांव पहुंच रहा है। लोगों ने इसी क्रेट से अखबार भी भिजवाया। ताकि लोग जान सके कि क्या हो रहा है। इस ट्राली के लगने के बाद से लोगों को थोड़ा राहत मिली है।
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पिंडर के तेज बहाव में पुल से लेकर पार बाजार की ओर तकरीबन 24 गांवों को जोड़ने वाले पुल का एप्रोच मार्ग का 35 मीटर से अधिक हिस्सा बह गया। जिससे यहां करीब 54 गांवों का संपर्क एक-दूसरे से कट गया। तबसे लेकर लोनिवि और प्रशासन कभी यहां पर वैली ब्रिज तो कभी कुछ और कहकर आश्वासन देते रहे। लेकिन हालात जस के तस।
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आखिरकार स्थानीय लोगों ने विभाग को आइना दिखाने की ठानी और तकरीबन 30 फीट लंबी सीढ़ी पुल से खाई की ओर डाल दी और उस पर आवागमन शुरू कर दिया। लेकिन यह आवागमन जान पर बन सकता है।
इससे इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय उमाशंकर सिंह रावत, बलराज बहुगुणा, गजेंद्र रावत, आदि का कहना है कि पुल के ग्वालदम वाली रोड की ओर 30 और देवाल वाली रोड की तरफ 24 गांव हैं।
14 किमी पैदल चलना पड़ रहा है
पुल टूटने से लोग महज 100 मीटर की दूरी को पार करने के लिए 14 किमी पैदल चलना पड़ रहा है। मामले में लोनिवि राली के अधिकारियों के फोन स्विच ऑफ मिले तो एसडीएम विवेक प्रकाश ने कहा कि वे समझ रहे थे कि यह सीढ़ी लोनिवि ने डाली है। कहा मामले की पूरी जानकारी हासिल का विभाग को यहां संपर्क तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे।
ग्वालदम रोड पर बसे थराली के कस्बे
थराली, बुसेड़ी, सिमलसैंण, निरंतरनगर, बस स्टेशन, अपर बाजार, मस्जिद मार्केट, मुस्लिम बस्ती, अनुसूचित जाति बस्ती, नई बस्ती, एसबीआई और डाकघर सहित आस पास के गांव।
देवाल रोड पर बसे थराली के कस्बे
पुल बाजार पार थराली, सीएचसी, केदारबगड़, राड़ीबगड़, जीआईसी, गली मार्केट, थराली गांव, तहसील कार्यालय, बीडीओ कार्यालय सहित आसपास के गांव।
ग्रामीण बोले
19 दिनों से व्यापारी और स्थानीय लोग यहां पर विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग कर रहे थे। लेकिन लोनिवि और प्रशासन कभी वैली ब्रिज और अन्य व्यवस्था करने की बात कह टरकाते रहे। ऐसे में लोग छोटे से काम के लिए भी बैनोली होते हुए 14 किमी की पैदल दूरी पार कर रह थे।
जिससे यहां पर पुल के किनारे से नदी की ओर बल्लियां डालकर सीढ़ीनुमा पुल तैयार किया गया। 30 फीट की इस सीढ़ी उतरने के बाद नदी किनारे से दूसरे छोर आना पड़ रहा है। हालांकि इससे जोखिम बढ़ा है लेकिन विभाग को जल्द यहां पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
- रमेश थपलियाल अधिवक्ता/प्रेम सिंह बुटोला व्यापार संघ अध्यक्ष थराली
सामान भेजने के लिए बनाई मिनी ट्राली
अगस्तमुनि के लोगों ने आने-जाने का साधन पैदल पुल बहने के बाद चाका गांव के लिए सामान भिजवाने को मिनी ट्राली तैयार की है। जिसके जरिये गांव में रसद और अन्य सामग्री भिजवाई जा रही है। 16- 17 जून को सिल्ली और मंदाकिनी नदी पार चाका गांव के कई मकान बाढ़ में बह गए थे। पैदल झूला पुल भी बह गया था।
ऐसे में 125 परिवारों का चाका गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया। उन्हें रामपुर झूला पुल से तिलवाड़ा बाजार के लिए 12 किमी और गंगानगर होते हुए अगस्त्यमुनि के लिए आठ किमी का रास्ता तय करना पड़ता। लगातार भूस्खलन से यह मार्ग भी सुरक्षित नहीं है।
रसद भिजवाने का तरीका
ग्रामीणों की समस्या देखते हुए बाढ़ में अपने मकान और दुकान खो चुके रमेश बेंजवाल और भगत कंडारी ने सोमेश्वर बेंजवाल, पुरुषोत्तम गोस्वामी, उमादत्त भट्ट, राकेश पालीवाल, सतेंद्र कंडारी, राजवीर कंडारी और वीरपाल कंडारी ने सिल्ली बाजार से चाका गांव रसद भिजवाने का तरीका निकाला। उन्होंने नदी के आर-पार एक मोटा रस्सा बांधा।
इस पर एक रस्सी पर क्रेट बांधी गई। इस क्रेट से लगभग साढे़ तीन किलोग्राम सामान चाका गांव पहुंच रहा है। लोगों ने इसी क्रेट से अखबार भी भिजवाया। ताकि लोग जान सके कि क्या हो रहा है। इस ट्राली के लगने के बाद से लोगों को थोड़ा राहत मिली है।