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काश! मैं अपने बच्चों को यहां न बुलाता

Thu, 04 Jul 2013 08:53 AM IST
ऋषिकेश/ब्यूरो
ऋषिकेश/ब्यूरो Updated Thu, 04 Jul 2013 08:53 AM IST
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uttarakhand disaster

हैलो, पापाजी हम आपके पास घूमने के लिए आ रहे हैं। 12 जून को गोविंदघाट में व्यवसाय करने वाले करनाल निवासी सरदार सुच्चा सिंह को उनके घर के सदस्यों ने टेलीफोन किया और पूरा परिवार 16 जून की शाम को गोविंदघाट पहुंच गया।

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मगर उसी रात भीषण बारिश के दौरान उनका परिवार न जाने कहां गुम हो गया। अब सुच्चा सिंह अपने परिवार की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

हेमकुंड से ऋषिकेश तक ढूंढ चुके
पखवाड़े भर से लापता पूरे परिवार को तलाशते हुए बुधवार को सुच्चा सिंह संयुक्त यात्रा बस टर्मिनल स्थित आपदा राहत शिविर में पहुंचे। उन्होंने बताया कि 16 जून की रात को हुई भीषण बारिश और तबाही में उनका परिवार भी लापता हो गया। इसके बाद से बेटे, बहू, पोता-पोती का कुछ भी पता नहीं लग रहा है। वह हेमकुंड से ऋषिकेश तक जगह-जगह उन्हें ढूंढ चुके हैं।
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कुछ हासिल नहीं हुआ
सुच्चा सिंह ने परिजनों की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा ली है, मगर कुछ हासिल नहीं हुआ। अब वह इस उम्मीद में अपने शहर करनाल लौट रहे हैं कि शायद परिजन सकुशल घर पहुंच गए हों। मगर, उन्हें इस बात मलाल है कि काश, वे उन्हें यहां नहीं बुलाते।

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