{"_id":"295e8332-e459-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"uttarakhand-disaster-67","type":"story","status":"publish","title_hn":"काश! मैं अपने बच्चों को यहां न बुलाता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काश! मैं अपने बच्चों को यहां न बुलाता
ऋषिकेश/ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jul 2013 08:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हैलो, पापाजी हम आपके पास घूमने के लिए आ रहे हैं। 12 जून को गोविंदघाट में व्यवसाय करने वाले करनाल निवासी सरदार सुच्चा सिंह को उनके घर के सदस्यों ने टेलीफोन किया और पूरा परिवार 16 जून की शाम को गोविंदघाट पहुंच गया।
विज्ञापन
पढ़े, उत्तराखंड की खबरों की विशेष कवरेज
विज्ञापन
मगर उसी रात भीषण बारिश के दौरान उनका परिवार न जाने कहां गुम हो गया। अब सुच्चा सिंह अपने परिवार की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।
हेमकुंड से ऋषिकेश तक ढूंढ चुके
पखवाड़े भर से लापता पूरे परिवार को तलाशते हुए बुधवार को सुच्चा सिंह संयुक्त यात्रा बस टर्मिनल स्थित आपदा राहत शिविर में पहुंचे। उन्होंने बताया कि 16 जून की रात को हुई भीषण बारिश और तबाही में उनका परिवार भी लापता हो गया। इसके बाद से बेटे, बहू, पोता-पोती का कुछ भी पता नहीं लग रहा है। वह हेमकुंड से ऋषिकेश तक जगह-जगह उन्हें ढूंढ चुके हैं।
विज्ञापन
कुछ हासिल नहीं हुआ
सुच्चा सिंह ने परिजनों की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा ली है, मगर कुछ हासिल नहीं हुआ। अब वह इस उम्मीद में अपने शहर करनाल लौट रहे हैं कि शायद परिजन सकुशल घर पहुंच गए हों। मगर, उन्हें इस बात मलाल है कि काश, वे उन्हें यहां नहीं बुलाते।