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केदारनाथ मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा हुई खंडित
देहरादून/ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jul 2013 08:26 AM IST
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आपदा के बाद बाबा केदार की विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी और ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पूजा शुरू करवाने पर विवादों में घिरे केदारनाथ मंदिर के रावल के खिलाफ विरोध के स्वर मुखर होते जा रहे हैं। इसकी अगुवाई शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कर रहे हैं। उन्हें संतों और अखाड़ों का व्यापक समर्थन भी मिलने लगा है।
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खंडित हो गई सदियों की परंपरा
केदारनाथ धाम में हुए जलप्रलय के बाद पिछले 17 दिनों से शिव के गयारहवें ज्योर्तिलिंग बाबा केदार की पूजा अलग-अलग स्थानों पर की गई। मंदिर के कपाट खुलने के बाद केदारनाथ धाम में ही भैया दूज तक भगवान की पूजा की जाने की परंपरा थी। लेकिन इस बार केदारनाथ में हुई तबाही के बाद प्रधान पुजारी गुप्तकाशी आ गए।
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इससे केदारनाथ मंदिर की सदियों से चली आ रही परंपरा खंडित हो गई। केदारनाथ की पूजा शुरू करने को लेकर देश के प्रमुख धर्माचार्य मंत्रणा कर ही रहे थे कि तभी रावल भीमा शंकर लिंग ने गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने की अनुमति दे दी।
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इसके दूसरे ही दिन उन्होंने पूजा शीतकालीन पूजास्थल ओंकारेश्वर मंदिर में शिफ्ट करा दिया। यह केदारनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार हुआ कि बाबा केदार की पूजा दो अलग-अलग स्थानों में की गई।
टिहरी नरेश करते हैं घोषणा
केदारनाथ मंदिर में पूजा का सर्वोच्च अधिकारी रावल कहलाता है। रावल द्वारा ही पूजा अर्चना के लिए प्रधान पुजारियों की नियुक्ति की जाती है। टिहरी के राजा केदारनाथ के रावल का तिलक करते हैं। यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। इस पद पर दक्षिण भारतीय आरूढ़ होता है।
ब्रिटिश काल में कु माऊं कमिश्नर ने केदारनाथ में रावल की नियुक्ति और पूजा-पाठ की रीति-नीति निर्धारण संबंधी अधिकार अपने पास ले लिए थे। इन्हीं नियमों का अनुपालन वर्तमान में भी किया जाता है। इसके अनुसार रावल अपने उत्तराधिकारी की नियुक्त करता है।
अब तक 324 रावल
रावल के ब्रह्मलीन होने पर पंचायत बुलाई जाती है। जिसमें मंदिर के पुजारी, मंदिर से जुडे़ हक-हकूक धारी और ग्रामीणों द्वारा रावल की घोषणा की जाती है। इसकी सूचना टिहरी नरेश को विधिवत दी जाती है। इसके बाद ही रावल का तिलक किया जाता है। टिहरी नरेश उसे नवनियुक्त रावल घोषित करते हैं। प्रमाणिक अभिलेखों के मुताबिक अब तक 324 रावल होने के प्रमाण हैं।
गुप्तकाशी और ऊखीमठ में बाबा की पूजा करने से पूर्व ऊखीमठ के हक-हकूकधारियों और बदरीनाथ के पुजारियों से पूछकर ही फैसला लिया गया है। मेरे अकेले का यह निर्णय नहीं है। परंपरानुसार बाबा की पूजा की जा रही है। केदारनाथ में शुद्धिकरण के बाद पूजा शुरू कर ली जाएगी।
- भीमाशंकर लिंग, रावल केदारनाथ धाम
इस संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है और इसमें मेरी सहमति नहीं है। पूजा शुरू करने से परंपरानुसार धर्माधिकारियों से बात होनी चाहिए थी।
- मनुजेंद्र शाह, टिहरी नरेश
मंदिर समिति से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया है। इसकी कोई जानकारी नहीं है। रावल के केदारनाथ में जल्द पूजा शुरू करने के बयान का स्वागत किया जाना चाहिए।
- गणेश गोदियाल, अध्यक्ष बदरीनाथ-केदरानाथ मंदिर समिति