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Udham Singh Nagar News: हाइड्रोपोनिक खेती कर महिलाएं पॉलीहाउस में उगाएंगी यूरोपियन सब्जियां
Fri, 15 Dec 2023 01:17 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 15 Dec 2023 01:17 AM IST
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रुद्रपुर के यूआईआरडी में हाइड्रोपोनिक खेती के लिए तैयार किया जा रहा पॉलीहाउस। संवाद
रुद्रपुर। हाइड्रोपोनिक खेती (बिना मिट्टी के सिर्फ पानी की खेती) कर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पॉलीहाउस में रंग-बिरंगी शिमला मिर्च के साथ ही ब्रोकली, लैट्यूस, चार्ड जैसी यूरोपियन सब्जियां उगाएंगी। पॉलीहाउस में पैदा सब्जियों को बेचकर महिलाएं रुपये कमाएंगी।
उत्तराखंड ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज संस्थान (यूआईआरडी) में उद्यान विभाग जिला योजना के बजट से साढ़े नौ लाख रुपये की लागत से हाइड्रोपोनिक खेती के लिए पॉलीहाउस (ग्रीन हाउस) तैयार कर रहा है। उद्यान विभाग के मुताबिक यूआईआरडी में पॉलीहाउस निर्माण का कार्य जोरों से किया जा रहा है। पॉलीहाउस में महिलाएं हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल कर पानी में सब्जियां उगाएंगी। इससे पहले जिलेभर की करीब 80 महिलाओं समेत किसानों को पंतनगर स्थित हल्दी के उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद में वैज्ञानिकों की ओर से हाइड्रोपोनिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद रुद्रपुर के यूआ0ईआरडी में ग्रीन हाउस तैयार होने के बाद महिलाओं की ओर से इसमें छोटे पौधों वाली सब्जियां व फल उगाए जाएंगे। मुख्य उद्यान अधिकारी भावना जोशी ने बताया कि ग्रीन हाउस में महिलाएं यूरोपियन सब्जियों के साथ ही रंग बिरंगी शिमला मिर्ची की भी खेती करेंगी। बताया कि इसके अलावा हाईड्रोपोनिक खेती में टमाटर, गाजर, शलजम, मूली, मटर, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, तरबूज, खरबूजा, अनानास, भिंडी जैसी सब्जियां भी उगाई जाती हैं। संवाद
कैसे होती है बिना मिट्टी के सिर्फ पानी में खेती
रुद्रपुर। हाइड्रोपोनिक एक आधुनिक खेती है, इसको पॉलीहाउस के अंदर पाइपों के माध्यम से की जाती है। पौधों को पोषक तत्व भी पानी के जरिए दिए जाते हैं। इनमें ऊपर की तरफ छेद किए जाते हैं और उन्हीं छेदों में पौधे उगाए जाते हैं, पौधों की जड़े इन्हीं पाइपों में डूबी रहती हैं। इसमें पानी का इस्तेमाल करके जलवायु को नियंत्रित कर खेती की जाती है। पानी में पौधों की जरूरत के मुताबिक सभी पोषक तत्व घोले जाते हैं। इसमें पानी के साथ नारियल के छिलके का थोड़ा बुरादा (कोकोपीट) का इस्तेमाल किया जाता है। पॉलीहाउस के अंदर का तापमान 15 से 30 डिग्री तक रखा जाता है। हाईड्रोपोनिक खेती की खास बात यह है कि मिट्टी रहित होने के चलते पौधों को कोई बीमारी नहीं लगती। इसी लिए इसमें उगने वाली सब्जी काफी ताजा व सुंदर दिखती है। संवाद
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उत्तराखंड ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज संस्थान (यूआईआरडी) में उद्यान विभाग जिला योजना के बजट से साढ़े नौ लाख रुपये की लागत से हाइड्रोपोनिक खेती के लिए पॉलीहाउस (ग्रीन हाउस) तैयार कर रहा है। उद्यान विभाग के मुताबिक यूआईआरडी में पॉलीहाउस निर्माण का कार्य जोरों से किया जा रहा है। पॉलीहाउस में महिलाएं हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल कर पानी में सब्जियां उगाएंगी। इससे पहले जिलेभर की करीब 80 महिलाओं समेत किसानों को पंतनगर स्थित हल्दी के उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद में वैज्ञानिकों की ओर से हाइड्रोपोनिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद रुद्रपुर के यूआ0ईआरडी में ग्रीन हाउस तैयार होने के बाद महिलाओं की ओर से इसमें छोटे पौधों वाली सब्जियां व फल उगाए जाएंगे। मुख्य उद्यान अधिकारी भावना जोशी ने बताया कि ग्रीन हाउस में महिलाएं यूरोपियन सब्जियों के साथ ही रंग बिरंगी शिमला मिर्ची की भी खेती करेंगी। बताया कि इसके अलावा हाईड्रोपोनिक खेती में टमाटर, गाजर, शलजम, मूली, मटर, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, तरबूज, खरबूजा, अनानास, भिंडी जैसी सब्जियां भी उगाई जाती हैं। संवाद
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कैसे होती है बिना मिट्टी के सिर्फ पानी में खेती
रुद्रपुर। हाइड्रोपोनिक एक आधुनिक खेती है, इसको पॉलीहाउस के अंदर पाइपों के माध्यम से की जाती है। पौधों को पोषक तत्व भी पानी के जरिए दिए जाते हैं। इनमें ऊपर की तरफ छेद किए जाते हैं और उन्हीं छेदों में पौधे उगाए जाते हैं, पौधों की जड़े इन्हीं पाइपों में डूबी रहती हैं। इसमें पानी का इस्तेमाल करके जलवायु को नियंत्रित कर खेती की जाती है। पानी में पौधों की जरूरत के मुताबिक सभी पोषक तत्व घोले जाते हैं। इसमें पानी के साथ नारियल के छिलके का थोड़ा बुरादा (कोकोपीट) का इस्तेमाल किया जाता है। पॉलीहाउस के अंदर का तापमान 15 से 30 डिग्री तक रखा जाता है। हाईड्रोपोनिक खेती की खास बात यह है कि मिट्टी रहित होने के चलते पौधों को कोई बीमारी नहीं लगती। इसी लिए इसमें उगने वाली सब्जी काफी ताजा व सुंदर दिखती है। संवाद
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