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लक्ष्य प्राप्ति के लिए महिलाएं विश्वास के साथ लें संकल्प
Sat, 09 Mar 2019 12:45 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Sat, 09 Mar 2019 12:45 AM IST
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शपथ ग्रहण करती महिलाएं और छात्राएं।
- फोटो : amar ujala
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शुक्रवार को अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के तहत चंद्रावती कन्या महाविद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने लक्ष्य प्राप्ति के लिए महिलाओं को विश्वास के साथ संकल्प लेने की प्रेरणा दी।
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अपराजिता के तहत हुई संगोष्ठी का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. कीर्ति पंत एवं उप प्राचार्या डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय ने किया। मुख्य अतिथि मेयर ऊषा चौधरी ने कहा कि महिलाएं अपना फोकस बेहतर भविष्य के लिए करें। हर नारी में कुछ विशिष्ट और अलग करने की काबिलियत होती है, बस हमें अपने आत्मविश्वास को पहचाने की जरूरत है।
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महिला हेल्पलाइन प्रभारी सुप्रिया नेगी ने घरेलू विवादों में सुलह के लिए होने वाली काउंसलिंग में परिवारों को जोड़ने की पहल पर जोर दिया। महिला अधिवक्ता कामिनी श्रीवास्तव ने महिला अधिकारों, दहेज, घरेलू हिंसा अधिनियम व भरण पोषण वाद के बारे में जानकारी दी। संचालन योग प्रशिक्षिका नमिता पंत और प्रवक्ता डॉ. अंजलि ने किया। मेयर ऊषा चौधरी ने उपस्थित महिलाओं और छात्राओं को शपथ ग्रहण कराई। वहां प्रवक्ता संगीता शर्मा, योग प्रशिक्षिका मंजू रावत, ललिता कार्की आदि मौजूद थीं।
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इंसेट-
विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित हुई महिलाएं
काशीपुर। अपराजिता कार्यक्रम के तहत सामाजिक एवं शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण सत्यधाम अर्द्धनारीश्वर सेवा संस्थान की ओर से मेयर ऊषा चौधरी और संस्थान की मुख्य ट्रस्टी सुरभि देवी ने किया। कार्यक्रम में ‘ख्वाहिश एनजीओ’ की अध्यक्षा आयुषी नागर, सुंदर कांड समिति की अध्यक्षा नीमा पांडे, प्राचार्या डॉ. कीर्ति पंत, उप प्राचार्या डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय, महिला हेल्पलाइन प्रभारी सुप्रिया नेगी, महिला कांस्टेबिल ममता आर्या, योग शिक्षिका नमिता पंत, रक्षिता नागर, ललिता कार्की व कामिनी श्रीवास्तव एडवोकेट को सम्मानित किया गया।
कोट
भारतीय सभ्यता में पुरातन काल से नारियों को सम्मान मिलता रहा है। देवताओं के नाम के आगे देवियों का नाम लगा होता है। ऐसे में नारी अबला कैसे हो सकती है। नारी चंडी नहीं अपितु प्रेम, त्याग, दया, करुणा व समर्पण की प्रतिमूर्ति है।
- डॉ. कीर्ति पंत, प्राचार्या, चंद्रावती कन्या महाविद्यालय।
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शास्त्रों में भी महिलाओं को सम्मान की पात्र कहा गया है। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता, यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया। महिलाओं को समभाव व समान अधिकार दिए जाने चाहिए।
- डॉ. दीपिका गुड़िया, उप प्राचार्या, चंद्रावती कन्या महाविद्यालय।
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महिला खुद में शक्ति की प्रतीक है। शक्ति कानूनी अधिकारों से मिलती है। सुंदरकांड समिति महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है।
- भावना खनूलिया, सदस्या, सुंदरकांड समिति।
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नारी अपने सद्गुणों से समाज को सही रूप में व्यवस्थित करती है। हर संबंध में अधिकार के साथ दायित्वों का भी समावेश रखतीं है। हमें दायित्वों के निर्वहन को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिससे नारी की गरिमा बनी रहे।
- सुरभि देवी, मुख्य ट्रस्टी, अर्द्धनारीश्वर सत्यधाम सेवा संस्थान।