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Udham Singh Nagar News: महिलाएं गढ़ रहीं कीर्तिमान, मूंज घास व बांस से बना रहीं सामान
Sat, 31 Jan 2026 01:49 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 31 Jan 2026 01:49 AM IST
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रुद्रपुर। भले ही आज का दौर आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ा हो और बाजार में सजावटी वस्तुओं की भरमार हो लेकिन रुद्रपुर और पंतनगर की महिलाओं की एक टोली ने साबित कर दिया है कि पारंपरिक कारीगरी आज भी अपनी अलग पहचान रखती है। मूंज घास और बांंस से उत्पाद बनाकर वह नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं।
रुद्रपुर व पंतनगर की 22 महिलाओं का यह समूह मूंज घास व बांस की लकड़ी से हाथ से बने ऐसे-ऐसे सजावटी उत्पाद तैयार कर रहा है। पुराने समय में खरपतवार और लकड़ी से की जाने वाली हस्तकला को यह महिलाएं नए रूप में सामने लाईं ओर जिले भर में चर्चा का विषय भी बनीं। इन महिलाओं ने बांस की लकड़ी की पतली पट्टियों से फूलों के शोपीस, फूलदान, सोफे, टोकरियां व पेन-स्टैंड जैसे आकर्षक उत्पाद तैयार किए हैं। संवाद
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प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की राह
इस सफलता के पीछे बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान (आरएसईटीआई) की ओर से चलाया गया 14 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर रहा। इसमें ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल करते हुए नया काम शुरू करने के लिए बैंक ऋण प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। संस्थान की इस पहल से महिलाएं न सिर्फ हुनरमंद बनीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी अपने कदम बढ़ा सकीं। यह पहल उनके लिए प्रेरणा बनकर उभरी है। सही प्रशिक्षण और उनकी लगन से आत्मनिर्भरता की राह आसान बन गई। संवाद।
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रुद्रपुर व पंतनगर की 22 महिलाओं का यह समूह मूंज घास व बांस की लकड़ी से हाथ से बने ऐसे-ऐसे सजावटी उत्पाद तैयार कर रहा है। पुराने समय में खरपतवार और लकड़ी से की जाने वाली हस्तकला को यह महिलाएं नए रूप में सामने लाईं ओर जिले भर में चर्चा का विषय भी बनीं। इन महिलाओं ने बांस की लकड़ी की पतली पट्टियों से फूलों के शोपीस, फूलदान, सोफे, टोकरियां व पेन-स्टैंड जैसे आकर्षक उत्पाद तैयार किए हैं। संवाद
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प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की राह
इस सफलता के पीछे बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान (आरएसईटीआई) की ओर से चलाया गया 14 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर रहा। इसमें ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल करते हुए नया काम शुरू करने के लिए बैंक ऋण प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। संस्थान की इस पहल से महिलाएं न सिर्फ हुनरमंद बनीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी अपने कदम बढ़ा सकीं। यह पहल उनके लिए प्रेरणा बनकर उभरी है। सही प्रशिक्षण और उनकी लगन से आत्मनिर्भरता की राह आसान बन गई। संवाद।
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