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जैव चिकित्सीय कचरे को लेकर कब संजीदा होंगे अफसर

अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर। Updated Fri, 08 Dec 2017 12:42 AM IST
biomedical waste
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स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की लापरवाही से कई अस्पतालों, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर का जैव चिकित्सीय कचरा खुले में पड़ रहा है। यह लापरवाही आम जनता के जानलेवा साबित हो सकती है। लेकिन अफसर इस ओर कतई संजीदा नहीं हैं। यही कारण है कि न तो जैव चिकित्सीय कचरा फेंकने वालों पर लगाम लग सकी है और न ही किसी पर कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। ऐसे में कचरा फेंकने का सिलसिला थमा नहीं है।
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 जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय के गेट पर स्थित नाले में बृहस्पतिवार को एक बार फिर जैव चिकित्सीय कचरा पॉलीथिन में भरा मिला। इसके साथ ही प्रसव के समय के उपकरण भी वहां फेंके हुए थे। इनमें मक्खियां भिनभिना रही थीं। इसके साथ ही एनएच-74 स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड के किनारे जैव चिकित्सीय कचरा फेंका गया था। खुलेआम फेंके जा रहे जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण को लेकर अधिकारियों में गंभीरता कम नजर आ रही है। जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपकर कन्नी काटने का प्रयास कर रहे हैं। हर कोई कार्रवाई करने का दावा तो कर रहा है लेकिन वह धरातल में अमल में नहीं लाया जा रहा है। डीएम डॉ. नीरज खैरवाल पूर्व में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में दिशा निर्देश देन की बात कह चुके हैं।

ट्रंचिंग ग्राउंड में कौन कौन जैव चिकित्सीय कचरा फेंक रहा है, इसका पता लगाया जा रहा है। एमएनए को लिखित में इस संबंध में जांच कराकर कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई को कहा जाएगा। इस मामले में किसी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं होगी।
सोनी कोली, मेयर, नगर निगम, रुद्रपुर

- ट्रचिंग ग्राउंड और खुले में जैव चिकित्सीय कचरा फेंकना प्रतिबंधित है। इसे फेंकते हुए पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये जुर्माने तक का प्रावधान है। रुद्रपुर नगर निगम को कूूड़ा निस्तारण को लेकर पूर्व में नोटिस दिया गया है। अखबार के माध्यम से ट्रंचिंग ग्राउंड में जैव चिकित्सीय कचरा फेंकने के मामले संज्ञान में आए हैं। नगर निगम को जैव चिकित्सीय कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई करने के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है। अगर निगम कार्रवाई नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 
एसपी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

- क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत सभी अस्पतालों को जैव चिकित्सीय कूड़ा निस्तारण के स्पष्ट निर्देश हैं। वर्ना अस्पतालों का पंजीकरण तक रद्द हो सकता है। खुले में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. एसके साह, सीएमओ, ऊधम सिंह नगर

उड़ायी जा रही हैं नियमों की धज्जियां
 भारत सरकार ने बायोमेडिकल वेस्ट नियम 1998 पारित किया है। यह नियम अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, डिस्पेंसरी, पशु संस्थान, पैथोलॉजिकल लैब और ब्लड बैंक पर लागू होता है। ऐसे संस्थानों के लिए जैव चिकित्सीय कचरे को ट्रीट करने के लिए अपने संस्थानों में आधुनिक उपकरण लगाना अनिवार्य है। लेकिन इसका पालन नहीं होता है। आलम यह है कि चुनिंदा अस्पतालों को छोड़कर बाकी अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट कहां जा रहा है, यह सवाल बना है। जगह-जगह मिल रहे मेडिकल वेस्ट से साफ है कि कई अस्पताल चोरी छिपे कचरा खुले में फेंक रहे हैं।

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