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नेहरू और जिन्ना की महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ गए थे 12 लाख लोग

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 12:10 AM IST
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When India Divided
rajiv Ghai
काशीपुर। भारत-पाकिस्तान विभाजन के दंश की दास्तां बयां करते उत्तरांचल पंजाबी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव घई कहते हैं कि सरहद पार से आने वाले सभी लोग बहुत खुद्दार थे। जीवनयापन के लिए उन्होंने मजदूरी की, रिक्शा चलाया, बोरियां ढोईं लेकिन कभी किसी से भीख नहीं मांगी।
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राजीव घई के अनुसार एक दौर ऐसा आया जब शिविर में मलेरिया, हैजा जैसी बीमारियां फैल गईं। किस्मत के मारे शरणार्थी किसी तरह इन बीमारियों से निपटे और खुद को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संघर्ष शुरू किया।
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राजीव घई कहते हैं कि बंटवारे के पीछे राजनीतिक कारण थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना की महत्वाकांक्षा इतनी बलवती थी कि वह किसी की भी सुनने के लिए तैयार नहीं थे। महात्मा गांधी भी दोनों को नहीं समझा पाए और विभाजन की रेखा खींच दी गई।
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इसके बाद हुई भीषण हिंसा में करीब 12 लाख हिंदू मारे गए। अगर नेहरू और जिन्ना में से कोई एक प्रधानमंत्री बनने की जिद छोड़ देता तो बंटवारा नहीं होता और लाखों निर्दोष लोग कत्लेआम का शिकार नहीं होते।
इंतजार में पथरा गईं आंखें पर कोई वापस नहीं आया
राजीव घई कहते हैं कि विभाजन के दौरान सीमा पार से आए लोग महीनों इसी इंतजार में रहे कि शायद अब उनका कोई बिछड़ा हुआ अपना सरहद पार से वापस हिंदुस्तान आएगा लेकिन यह इंतजार हकीकत का रूप नहीं ले सका। सरहद पार से कभी न कोई बच्चा वापस आया और बड़ा लौटा। धीरे-धीरे लोगों ने उम्मीद छोड़ दी और यह मान लिया कि जो नहीं लौटे वह सभी कत्लेआम के शिकार हुए हैं।
धीरे-धीरे शरणार्थी देश के विभिन्न हिस्सों में फैल गए और नए जीवन की शुरुआत की। उन्हीं शरणार्थियों में से एक थे देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जिन्होंने हल्द्वानी में रहकर शिक्षा ग्रहण की और देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। मनमोहन सिंह अब के पाकिस्तान के जिला झेलम के चकवाल कस्बे से भारत आए थे।

जब यह लोग तराई में आए तो यहां जंगल खड़े थे। इनमें बाघ, तेंदुए, अजगर आदि हिंसक जीव-जंतु रहते थे। इन लोगों ने अपनी मेहनत से तराई के जंगलों को सोना पैदा करने वाले खेतों में तब्दील किया। सिर्फ उन्हीं लोगों की मेहनत और लगन के कारण आज तराई को मिनी पंजाब कहा जाता है। यह लोग मेहनत के बल पर सेना समेत सरकार के सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं।
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