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Udham Singh Nagar News: वक्फ बोर्ड ने जामा मस्जिद की 12 दुकानें खाली करने का दिया आदेश
Sun, 25 Oct 2026 12:38 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:38 AM IST
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खटीमा। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने मदरसा रहमानिया व जामा मस्जिद की वक्फ संपत्ति से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए नियम विरुद्ध आवंटित 12 दुकानों को खाली करने का आदेश दिया है। दुकानदारों को दुकानें खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
जामा मस्जिद के प्रशासक कामिल खान ने बताया कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीप्ति सिंह ने दुकानदारों को खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। दुकानों को खाली कर जामा मस्जिद के प्रशासक को सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 54 के अंतर्गत की गई है।
मदरसा रहमानिया व जामा मस्जिद की वक्फ संपत्तियों के विवाद के बाद वर्ष 2020 में मामले की जांच एसडीएम ने की थी। इसमें यह बात सामने आई थी कि वक्फ की तत्कालीन प्रबंध समिति ने संपत्तियों और दुकानों का आवंटन बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के और नियमों के विरुद्ध किया था। इस रिपोर्ट के आधार पर दुकानों पर काबिज 12 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीप्ति सिंह ने दुकानदारों की दलीलों और दस्तावेज की समीक्षा के बाद प्रतिवादी की आपत्तियों को 17 अक्तूबर को खारिज कर दिया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति किराया नियंत्रण अधिनियम से मुक्त है और इसका आवंटन वक्फ अधिनियम की धारा 56 व पट्टा नियमों के विपरीत, बिना खुली नीलामी के किया गया था।
इस मामले में धांधली और अनियमितताओं को देखते हुए तत्कालीन प्रबंध समिति के विरुद्ध खटीमा कोतवाली में पहले ही प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। तय 15 समयसीमा के भीतर दुकान खाली नहीं की गई तो वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कुमाऊं मंडल हल्द्वानी स्थित वक्फ अधिकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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जामा मस्जिद के प्रशासक कामिल खान ने बताया कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीप्ति सिंह ने दुकानदारों को खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। दुकानों को खाली कर जामा मस्जिद के प्रशासक को सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 54 के अंतर्गत की गई है।
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मदरसा रहमानिया व जामा मस्जिद की वक्फ संपत्तियों के विवाद के बाद वर्ष 2020 में मामले की जांच एसडीएम ने की थी। इसमें यह बात सामने आई थी कि वक्फ की तत्कालीन प्रबंध समिति ने संपत्तियों और दुकानों का आवंटन बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के और नियमों के विरुद्ध किया था। इस रिपोर्ट के आधार पर दुकानों पर काबिज 12 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीप्ति सिंह ने दुकानदारों की दलीलों और दस्तावेज की समीक्षा के बाद प्रतिवादी की आपत्तियों को 17 अक्तूबर को खारिज कर दिया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति किराया नियंत्रण अधिनियम से मुक्त है और इसका आवंटन वक्फ अधिनियम की धारा 56 व पट्टा नियमों के विपरीत, बिना खुली नीलामी के किया गया था।
इस मामले में धांधली और अनियमितताओं को देखते हुए तत्कालीन प्रबंध समिति के विरुद्ध खटीमा कोतवाली में पहले ही प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। तय 15 समयसीमा के भीतर दुकान खाली नहीं की गई तो वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कुमाऊं मंडल हल्द्वानी स्थित वक्फ अधिकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।