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50 पार कर चुके नकारा कर्मियों को घर बैठाने की तैयारी
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काशीपुर। करीब छह सौ करोड़ रुपये के घाटे से जूझ रहा उत्तराखंड परिवहन निगम अब 50 साल की आयु पूरी कर चुके लापरवाह कर्मचारियों को घर बैठाने की तैयारी में है। अक्षम कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (सीआरएस) देने के फैसले के बाद अब रोडवेज प्रबंधन प्रदर्शन के आधार पर ऐसे कर्मचारियों को सीआरएस देने पर विचार कर रहा है।
परिवहन निगम देनदारी से लगातार घाटे की स्थिति में है। मैदानी क्षेत्र के डिपो को छोड़कर पर्वतीय क्षेत्र के अधिकतर डिपो घाटे में है जबकि उन पर वेतन, भत्तों का लोड कहीं अधिक है। पिछले वित्तीय वर्ष में ही निगम को करीब 75 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यह घाटा बढ़ता ही जा रहा है। वेतन के मद में निगम को हर माह 20 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ता है। वर्ष 2012 के बाद से निगम के 84 चालक, परिचालक खुद को अक्षम दर्शाकर बसों के संचालन से हट गए हैं। इनकी सेवा समाप्त हो चुकी है।
कर्मियों का बोझ कम करने के लिए निगम ने छह माह पूर्व वीआरएस का विकल्प दिया था लेकिन कर्मियों ने इसमें अपेक्षित दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे में घाटे से उबरना निगम के लिए बड़ी चुनौती है। निगम प्रशासन ने सभी डिपो के एआरएम से विभिन्न पटलों पर काम करने वाले कर्मियों के पिछले दस वर्षों के प्रदर्शन रिपोर्ट मांगी है।
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इस अवधि के दौरान चालकों और परिचालकों के लोड फैक्टर, उनकी सेवा पुस्तिका, डीजल औसत आदि के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। निगम प्रशासन 50 वर्ष की आयु पार कर चुके ऐसे लापरवाह कार्मिकों की सूची तैयार कर रहा है जो निगम की आय बढ़ाने में मददगार नहीं हैं। उन्हें कामकाज के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर विचार किया जाएगा।
निरंतर कम आय वाले कर्मी होंगे बर्खास्त
काशीपुर। अपेक्षित आय न देने वाले चालक, परिचालकों पर कार्रवाई के लिए भी निगम प्रशासन गंभीर है। उत्तराखंड रोडवेज तीन क्षेत्रीय कार्यालयों और 19 डिपो के साथ राज्य से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान तक अपनी सेवाएं दे रहा है। कुल 352 मार्गों पर रोडवेज की सेवाएं संचालित हैं। निगम के पास 1200 से अधिक बसें हैं, इनमें से 250 से अधिक बसें दिल्ली रूट पर चलती हैं। निगम ने रोजाना दो करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा है लेकिन लोड फैक्टर कम (आय) होने से निगम की आय बढ़ाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निगम प्रशासन इस बिंदु पर भी विचार कर रहा है कि लगातार पांच बार कम आय देने वाले कर्मचारी को उसकी सेवा से बर्खास्त कर दिया जाए।
रोडवेज में कई पद खाली हैं। इनमें से कुछ खाली पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्ती कर काम लिया जा रहा है। निगम वीआरएस और सीआरएस स्कीम लागू कर चुका है। अब 50 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मियों को परफॉरमेंस के आधार पर सेवानिवृत्त करने के मामले में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
- आरपी भारती, जीएम (कार्मिक), उत्तराखंड परिवहन निगम
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परिवहन निगम देनदारी से लगातार घाटे की स्थिति में है। मैदानी क्षेत्र के डिपो को छोड़कर पर्वतीय क्षेत्र के अधिकतर डिपो घाटे में है जबकि उन पर वेतन, भत्तों का लोड कहीं अधिक है। पिछले वित्तीय वर्ष में ही निगम को करीब 75 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यह घाटा बढ़ता ही जा रहा है। वेतन के मद में निगम को हर माह 20 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ता है। वर्ष 2012 के बाद से निगम के 84 चालक, परिचालक खुद को अक्षम दर्शाकर बसों के संचालन से हट गए हैं। इनकी सेवा समाप्त हो चुकी है।
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कर्मियों का बोझ कम करने के लिए निगम ने छह माह पूर्व वीआरएस का विकल्प दिया था लेकिन कर्मियों ने इसमें अपेक्षित दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे में घाटे से उबरना निगम के लिए बड़ी चुनौती है। निगम प्रशासन ने सभी डिपो के एआरएम से विभिन्न पटलों पर काम करने वाले कर्मियों के पिछले दस वर्षों के प्रदर्शन रिपोर्ट मांगी है।
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इस अवधि के दौरान चालकों और परिचालकों के लोड फैक्टर, उनकी सेवा पुस्तिका, डीजल औसत आदि के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। निगम प्रशासन 50 वर्ष की आयु पार कर चुके ऐसे लापरवाह कार्मिकों की सूची तैयार कर रहा है जो निगम की आय बढ़ाने में मददगार नहीं हैं। उन्हें कामकाज के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर विचार किया जाएगा।
निरंतर कम आय वाले कर्मी होंगे बर्खास्त
काशीपुर। अपेक्षित आय न देने वाले चालक, परिचालकों पर कार्रवाई के लिए भी निगम प्रशासन गंभीर है। उत्तराखंड रोडवेज तीन क्षेत्रीय कार्यालयों और 19 डिपो के साथ राज्य से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान तक अपनी सेवाएं दे रहा है। कुल 352 मार्गों पर रोडवेज की सेवाएं संचालित हैं। निगम के पास 1200 से अधिक बसें हैं, इनमें से 250 से अधिक बसें दिल्ली रूट पर चलती हैं। निगम ने रोजाना दो करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा है लेकिन लोड फैक्टर कम (आय) होने से निगम की आय बढ़ाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निगम प्रशासन इस बिंदु पर भी विचार कर रहा है कि लगातार पांच बार कम आय देने वाले कर्मचारी को उसकी सेवा से बर्खास्त कर दिया जाए।
रोडवेज में कई पद खाली हैं। इनमें से कुछ खाली पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्ती कर काम लिया जा रहा है। निगम वीआरएस और सीआरएस स्कीम लागू कर चुका है। अब 50 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मियों को परफॉरमेंस के आधार पर सेवानिवृत्त करने के मामले में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
- आरपी भारती, जीएम (कार्मिक), उत्तराखंड परिवहन निगम