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आवाज को रोजी-रोटी का जरिया बनाया
अरुण कुमार/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Wed, 01 Feb 2017 12:07 AM IST
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साबिर हुसैन
- फोटो : अमर उजाला
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रेडियो में प्रसिद्ध अनाउंसर अमीन सयानी को सुनने के बाद साबिर हुसैन को ऐसी धुन सवार हुई कि वे भी अनाउंसर बन बैठे। उनकी रेडियो में जाने की तमन्ना तो पूरी नहीं हो सकी, लेकिन उन्होंने अपनी आवाज को ही रोजी-रोटी का जरिया बना लिया। चार दशक से प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में काशीपुर ही नहीं बल्कि यूपी की विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में भी उनकी आवाज गूंजती रही है।
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मोहल्ला गंज निवासी 63 साल के साबिर हुसैन ने बचपन में गरीबी को करीब से देखा। उनके पिता हाजी अशफाक हुसैन चूने का कारोबार करते थे। बताते हैं कि 1988 में उनका चयन आकाशवाणी के नजीबाबाद केंद्र में हुआ था, लेकिन एक अधिकारी को रिश्वत न देने की वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई। इसी साल उन्होंने अपनी आवाज में पहली बार चुनाव प्रचार की रिकॉर्डिंग की, जिसके लिए उन्होंने 20 रुपए मेहनताना लिया था। उसके बाद से लगातार उनकी आवाज में रिकॉर्डिंग की डिमांड बढ़ने लगी।
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पहले किसी दूसरे की दुकान और फिर उन्होंने घर में ही रिकॉर्डिंग का काम करना शुरू किया। अब वे एक कैसेट की रिकॉर्डिंग के 400 रुपए लेते हैं। चुनावी सीजन में वह 50 से 60 हजार रुपए कमा लेते है। उन्होंने अपनी आवाज के दम पर ही परिवार का भरण-पोषण किया। इस बार के चुनाव में वे कुल 50 प्रत्याशियों के लिए प्रचार की कैसेट तैयार कर चुके हैं। धार्मिक कार्यक्रम या किसी के लापता हो जाने की सूचना संबंधी रिकॉर्डिंग वे मुफ्त करते हैं। वह सोशल साइट्स का भी बखूबी इस्तेमाल करते हैं। वे व्हाट्सएप से दूरदराज के शहरों के लोगों का ऑर्डर ले लेते हैं।
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