{"_id":"60ddf8558ebc3edbc5781949","slug":"urrda-team-reached-to-check-the-qauality-of-road-rudrapur-news-hld4297095100","type":"story","status":"publish","title_hn":"फौजी मटकोटा में सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने पहुंची यूआरआरडीए की टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फौजी मटकोटा में सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने पहुंची यूआरआरडीए की टीम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फौजी मटकोटा गांव में भूरारानी-मटकोटा सड़क पूरी बनने से पहले ही गुणवत्ता के मामले में जांच के दायरे में आ गई है। बृहस्पतिवार को यूआरआरडीए (उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी) की टीम जांच के लिए गांव पहुंचीं। इंजीनियर की टीम ने जगह-जगह से सड़क को खोदकर उसकी गुणवत्ता को परखा और पैमाइश की।
अमर उजाला ने 29 जून के अंक में ‘सड़क बनाई या खा गए जनता की गाढ़ी कमाई’ शीर्षक से फौजी मटकोटा गांव में बन रही सड़क से जुड़ी समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत फौजी मटकोटा में 7.5 किमी लंबी सड़क का कार्य दो करोड़ 44 लाख 19 हजार रुपये की लागत से वर्ष 2020 जून में शुरू किया गया था, जो कि अभी भी निर्माणाधीन है। कई जगहों पर यह सड़क बनने के 15 दिन बाद ही उखड़नी शुरू हो गई है। सड़क का कार्य वर्ष 2021 मार्च में खत्म होना है। ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि नई सड़क बनाने में करीब तीन से चार परतें डाली जाती हैं लेकिन सड़क को एक लेयर में ही बनाकर छोड़ दिया गया है। इस कारण यह सड़क उखड़ने लगी है।
अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद बाद संबंधित विभाग और प्रशासन में हरकत में आ गए हैं। बृहस्पतिवार को यूआरआरडीए की सुपरिटेंडेंट इंजीनियर मीना भट्ट टीम के साथ सड़क की गुणवत्ता की जांच करने के लिए फौजी मटकोटा गांव पहुंचीं। सहायक इंजीनियर अभय कुमार ने बताया कि टीम ने कुछ स्थान पर सड़क खोदकर उसके सैंपलों की जांच की। इसकी रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ने 29 जून के अंक में ‘सड़क बनाई या खा गए जनता की गाढ़ी कमाई’ शीर्षक से फौजी मटकोटा गांव में बन रही सड़क से जुड़ी समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत फौजी मटकोटा में 7.5 किमी लंबी सड़क का कार्य दो करोड़ 44 लाख 19 हजार रुपये की लागत से वर्ष 2020 जून में शुरू किया गया था, जो कि अभी भी निर्माणाधीन है। कई जगहों पर यह सड़क बनने के 15 दिन बाद ही उखड़नी शुरू हो गई है। सड़क का कार्य वर्ष 2021 मार्च में खत्म होना है। ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि नई सड़क बनाने में करीब तीन से चार परतें डाली जाती हैं लेकिन सड़क को एक लेयर में ही बनाकर छोड़ दिया गया है। इस कारण यह सड़क उखड़ने लगी है।
विज्ञापन
अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद बाद संबंधित विभाग और प्रशासन में हरकत में आ गए हैं। बृहस्पतिवार को यूआरआरडीए की सुपरिटेंडेंट इंजीनियर मीना भट्ट टीम के साथ सड़क की गुणवत्ता की जांच करने के लिए फौजी मटकोटा गांव पहुंचीं। सहायक इंजीनियर अभय कुमार ने बताया कि टीम ने कुछ स्थान पर सड़क खोदकर उसके सैंपलों की जांच की। इसकी रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी।
विज्ञापन