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Udham Singh Nagar News: बाबा मौज गिरी शिव मंदिर परिसर में हरे पेड़ काटने से हंगामा
Thu, 25 Dec 2025 01:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 25 Dec 2025 01:04 AM IST
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काशीपुर। एक मंदिर परिसर में हरे-भरे फलदार पेड़ काटने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए और आरोप-प्रत्यारोप लगाकर कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना पर पुलिस व वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। वन विभाग ने कटे दो आम और एक सेमल के पेड़ों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
काशीपुर–मुरादाबाद रोड स्थित ग्राम बसई इस्लामनगर चौराहे पर बाबा मौज गिरी शिव मंदिर परिसर में हरे-भरे फलदार पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय वनाधिकारी देवेंद्र सिंह रजवार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने समिति प्रबंधन से वार्ता के बाद कटे पेड़ों को कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय में जमा करा दिया। उन्होंने बताया इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।
दूसरे पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया कि बाबा मौज गिरी शिव मंदिर सेवा समिति अवैध रूप से गठित की गई है। इसकी आसपास की ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों को कोई सूचना नहीं दी गई जबकि इस मंदिर से कई गांवों के लोगों की आस्था जुड़ी है। आरोप लगाया कि मंदिर समिति ने पूर्व में भी आम के हरे-भरे पेड़ काटे थे, जिनकी कीमत लाखों में बताई जा रही है लेकिन उस धन का हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। बताया जा रहा है प्रभागीय वन अधिकारी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर (नैनीताल) की ओर से जारी आदेश में दो सूखे आम के पेड़ और एक सेमल के पेड़ को काटने की अनुमति दी गई थी। जबकि मौके पर हरे-भरे पेड़ काटे गए।
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मंदिर समिति अध्यक्ष रमेश पाल ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वन विभाग से अनुमति लेने के बाद ही पेड़ों को काटा गया है। क्योंकि मंदिर परिसर में चहारदीवारी का निर्माण होना है। आरोप लगाया कि विरोध कर रहे लोग मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से दुकानें लगाकर बैठे हैं जिन्हें हटाने के लिए न्यायालय ने 30 दिसंबर तक का समय दिया है। इसके चलते पेड़ कटान को मुद्दा बनाया जा रहा है।
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काशीपुर–मुरादाबाद रोड स्थित ग्राम बसई इस्लामनगर चौराहे पर बाबा मौज गिरी शिव मंदिर परिसर में हरे-भरे फलदार पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय वनाधिकारी देवेंद्र सिंह रजवार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने समिति प्रबंधन से वार्ता के बाद कटे पेड़ों को कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय में जमा करा दिया। उन्होंने बताया इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।
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दूसरे पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया कि बाबा मौज गिरी शिव मंदिर सेवा समिति अवैध रूप से गठित की गई है। इसकी आसपास की ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों को कोई सूचना नहीं दी गई जबकि इस मंदिर से कई गांवों के लोगों की आस्था जुड़ी है। आरोप लगाया कि मंदिर समिति ने पूर्व में भी आम के हरे-भरे पेड़ काटे थे, जिनकी कीमत लाखों में बताई जा रही है लेकिन उस धन का हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। बताया जा रहा है प्रभागीय वन अधिकारी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर (नैनीताल) की ओर से जारी आदेश में दो सूखे आम के पेड़ और एक सेमल के पेड़ को काटने की अनुमति दी गई थी। जबकि मौके पर हरे-भरे पेड़ काटे गए।
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मंदिर समिति अध्यक्ष रमेश पाल ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वन विभाग से अनुमति लेने के बाद ही पेड़ों को काटा गया है। क्योंकि मंदिर परिसर में चहारदीवारी का निर्माण होना है। आरोप लगाया कि विरोध कर रहे लोग मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से दुकानें लगाकर बैठे हैं जिन्हें हटाने के लिए न्यायालय ने 30 दिसंबर तक का समय दिया है। इसके चलते पेड़ कटान को मुद्दा बनाया जा रहा है।