{"_id":"583c89664f1c1b051cde599d","slug":"udham-singh-nagar-district-child-labor-became-free-paper","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागजों में बालश्रम मुक्त हो गया जिला ऊधमसिंह नगर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागजों में बालश्रम मुक्त हो गया जिला ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर।
Updated Tue, 29 Nov 2016 01:15 AM IST
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रुद्रपुर। जिले में तमाम छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगी हैं। इनमें से अधिकतर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कारखानों में बाल श्रमिक काम करते दिखते हैं, लेकिन श्रम विभाग में उपलब्ध अभिलेखों में जिला बालश्रम मुक्त हो गया है। श्रम विभाग ने दो वर्षों में जिलेभर में कुल 73 बाल श्रमिक चिन्हित किए गए, लेकिन मेडिकल जांच में मात्र नौ बच्चों को ही बाल श्रमिक की श्रेणी में रखकर उनके सेवायोजकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वर्ष 2016 के लिए अब विभाग से दो सप्ताह के भीतर सर्वेक्षण रिपोर्ट मांगी गई है।
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बाल श्रम कानून के तहत व्यवसायों, होटल, ढाबों, वर्कशॉप, दुकान, वाणिज्य अधिष्ठान, निर्माण कार्य, ईंट भट्ठे के कारखानों आदि में काम करने वाले 9 वर्ष से 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को बाल श्रमिक माना जाता है। 14 वर्ष से 17 वर्ष तक की आयु के किशोरों से खतरनाक व्यावसायिक काम लेना भी किशोर अपराध माना गया है, सरकार ने बाल श्रम पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी श्रम विभाग को सौंपी है।
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इसके लिए श्रम विभाग समय-समय पर बाल श्रमिकों का चिह्नीकरण कर उनके सेवायोजकों के खिलाफ बाल श्रम कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर उनसे प्रति बाल श्रमिक 20 हजार का अर्थदंड वसूलता है, ऊधमसिंह नगर जिले के श्रमायुक्त विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो विभाग द्वारा वर्ष 2014 में विभिन्न प्रतिष्ठानों, कारखानों में काम कर रहे नौ बाल श्रमिकों को चिह्नित किया गया लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में मात्र एक को ही बाल श्रमिक माना गया, इसी प्रकार विभाग द्वारा वर्ष 2015 में 64 बाल श्रमिक चिह्नित कर उनका मेडिकल कराया गया।
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इनमें से आठ को ही बाल श्रमिकों की श्रेणी में रखकर उनके सेवायोजकों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके तहत आरोपियों से प्रति बाल श्रमिक 20 हजार रुपए अर्थदंड के हिसाब से 1.80 लाख रुपए की वसूली की गई। वर्ष 2016 के लिए अब श्रम विभाग को सीडीओ कार्यालय से दो सप्ताह के भीतर बाल श्रमिकों का सर्वेक्षण करने का निर्देश मिला है। सर्वेक्षण में शिक्षा विभाग की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तय की गई है।
रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले में दो वर्षों में चिह्नित किए गए 73 बाल श्रमिकों में से मात्र नौ को ही बाल श्रमिक प्रमाणित कर उनके सेवायोजकों के खिलाफ कार्रवाई किया जाना श्रम विभाग और सेवायोजकों को संदेह के घेरे में खड़ा करता है, विभागीय सूत्रों के अनुसार किसी बाल श्रमिक का चिह्नीकरण करने के बाद मेडिकल से उसके बालिग या नाबालिग होने की पुष्टि होती है और मेडिकल की इस प्रक्रिया में एक सप्ताह महीने भर का समय लग जाता है, इस दौरान कई सेवायोजक श्रम विभाग द्वारा चिह्नित किए गए बाल श्रमिक की जगह पर किसी परिचित बालिग को मेडिकल के लिए भेज कर कानूनी कार्रवाई से बच जाते हैं।