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Udham Singh Nagar News: पति के नाम के सहारे चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश
Fri, 11 Jul 2025 01:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 11 Jul 2025 01:00 AM IST
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रुद्रपुर। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने आरक्षण लागू किया है। इसके चलते ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत और वार्ड सदस्यों के आरक्षित पदों पर महिला प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं लेकिन प्रचार में महिला प्रत्याशी पतियों पर निर्भर होकर रह गई हैं। बड़ी संख्या में महिला प्रत्याशियों की वैतरणी पार करने में पति या परिवार के मुखिया के नाम का सहारा लिया जा रहा है। यहां तक कि प्रचार की बैठकों से महिला प्रत्याशी नदारद दिख रही हैं।
दरअसल जिला पंचायत की 18, क्षेत्र पंचायत की 136, ग्राम प्रधान की 186 व वार्ड सदस्यों की 1943 सीटों पर महिला प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं लेकिन बड़ी संख्या में महिला प्रत्याशियों का सियासत से पहली मर्तबा वास्ता पड़ा है लिहाजा सोशल मीडिया और पोस्टर, बैनरों में प्रत्याशियों की फोटो से ज्यादा राजनीति में सक्रिय पति या परिवार के चेहरे को तरजीह दी जा रही है। कुछ पोस्टरों से महिला प्रत्याशी के फोटो तक गायब हैं और उनकी जगह पति व परिवार के सदस्यों के फोटो प्रचार में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
हालांकि राजनीति में सक्रिय महिला प्रत्याशी टोलियों के साथ प्रचार में निकल रही हैं लेकिन उनकी संख्या बेहद कम हैं। यही नहीं कुछ महिला प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए हैं और दूसरे प्रत्याशी को समर्थन देने में भी पति ही फोटो फ्रेम में दिखाई दे रहे हैं। इससे इतर ग्रामीणों की बैठक, सभा में भी महिला प्रत्याशी को किनारे रखा जा रहा है। खासतौर पर रात में समर्थन में होने वाली बैठक में बात रखने के बजाए महिला प्रत्याशी घरों में ही रह जा रही है। प्रचार से लेकर बैठक, सभाओं क जिम्मा परिवार के मुखिया और पार्टी कार्यकर्ताओं ने संभाला हुआ है। फिलहाल प्रचार का रंग चढ़ रहा है। प्रचार के चरम पर पहुंचने में स्थितियां बदलती है या नहीं, यह समय बताएगा।
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दरअसल जिला पंचायत की 18, क्षेत्र पंचायत की 136, ग्राम प्रधान की 186 व वार्ड सदस्यों की 1943 सीटों पर महिला प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं लेकिन बड़ी संख्या में महिला प्रत्याशियों का सियासत से पहली मर्तबा वास्ता पड़ा है लिहाजा सोशल मीडिया और पोस्टर, बैनरों में प्रत्याशियों की फोटो से ज्यादा राजनीति में सक्रिय पति या परिवार के चेहरे को तरजीह दी जा रही है। कुछ पोस्टरों से महिला प्रत्याशी के फोटो तक गायब हैं और उनकी जगह पति व परिवार के सदस्यों के फोटो प्रचार में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
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हालांकि राजनीति में सक्रिय महिला प्रत्याशी टोलियों के साथ प्रचार में निकल रही हैं लेकिन उनकी संख्या बेहद कम हैं। यही नहीं कुछ महिला प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए हैं और दूसरे प्रत्याशी को समर्थन देने में भी पति ही फोटो फ्रेम में दिखाई दे रहे हैं। इससे इतर ग्रामीणों की बैठक, सभा में भी महिला प्रत्याशी को किनारे रखा जा रहा है। खासतौर पर रात में समर्थन में होने वाली बैठक में बात रखने के बजाए महिला प्रत्याशी घरों में ही रह जा रही है। प्रचार से लेकर बैठक, सभाओं क जिम्मा परिवार के मुखिया और पार्टी कार्यकर्ताओं ने संभाला हुआ है। फिलहाल प्रचार का रंग चढ़ रहा है। प्रचार के चरम पर पहुंचने में स्थितियां बदलती है या नहीं, यह समय बताएगा।
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