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सिपाही का बेटे ने न्यायाधीश बनकर बढ़ाया काशीपुर का मान
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काशीपुर के शैलेश वशिष्ठ।
- फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। क्षेत्र के युवा शैलेश वशिष्ठ ने कड़ी मेहनत के दम पर पहली बार में न्यायिक सेवा छत्तीसगढ़ की परीक्षा उत्तीर्ण कर न्यायाधीश बनकर क्षेत्र का नाम मान बढ़ाया है।
मोहल्ला कूर्मांचल कॉलोनी निवासी शैलेश कुमार वशिष्ठ ने वर्ष 2019 में न्यायिक सेवा छत्तीसगढ़ की परीक्षा दी थी। शनिवार देर शाम परिणाम घोषित होने पर शैलेश ने पहली बार में ही चौथी रैंक प्राप्त की। शैलेश ने प्रारंभिक शिक्षा ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल से हासिल की। वर्ष 2018 में एलएलबी यूनिटी लॉ कॉलेज रुद्रपुर से किया।
शैलेश ने कहा कि वर्षों तक गरीब न्याय के लिए न्यायालय के चक्कर काटते रहते हैं लेकिन फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। इसलिए न्याय विभाग में गरीबों को न्याय दिलाना उनका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि पिता शिव कुमार शर्मा काशीपुर पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2001 में बीमारी के चलते उनका स्वर्गवास हो गया।
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मां पर परिवार और दोनों भाइयों की जिम्मेदारी आ गई। इस दौरान उन्हें आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बेटों की परवरिश और पढ़ाई में कोई कमी नहीं आए इसके लिए 11 साल तक मां को निजी कंपनियों में नौकरी करनी पड़ी। वर्ष 2011 में मां मंजू शर्मा को विरासतन में नौकरी मिलने पर परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। उन्हें पहली तैनाती रुद्रपुर पीएसी में सिपाही के पद दी गई।
स्थानांतरण के बाद दो वर्ष से माता के साथ पीएसी हरिद्वार में रह रहे थे। बड़ा भाई देवेश शर्मा नोएडा में ग्राफिक डिजाइनर है। शैलेश ने अपनी सफलता का श्रेय माता को दिया है। वहीं, माता मंजू शर्मा, भाई देवेश शर्मा, प्रतीक गुप्ता तथा क्षेत्र निवासी न्यायाधीश अवंतिका चौधरी ने बधाई दी।
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मोहल्ला कूर्मांचल कॉलोनी निवासी शैलेश कुमार वशिष्ठ ने वर्ष 2019 में न्यायिक सेवा छत्तीसगढ़ की परीक्षा दी थी। शनिवार देर शाम परिणाम घोषित होने पर शैलेश ने पहली बार में ही चौथी रैंक प्राप्त की। शैलेश ने प्रारंभिक शिक्षा ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल से हासिल की। वर्ष 2018 में एलएलबी यूनिटी लॉ कॉलेज रुद्रपुर से किया।
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शैलेश ने कहा कि वर्षों तक गरीब न्याय के लिए न्यायालय के चक्कर काटते रहते हैं लेकिन फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। इसलिए न्याय विभाग में गरीबों को न्याय दिलाना उनका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि पिता शिव कुमार शर्मा काशीपुर पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2001 में बीमारी के चलते उनका स्वर्गवास हो गया।
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मां पर परिवार और दोनों भाइयों की जिम्मेदारी आ गई। इस दौरान उन्हें आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बेटों की परवरिश और पढ़ाई में कोई कमी नहीं आए इसके लिए 11 साल तक मां को निजी कंपनियों में नौकरी करनी पड़ी। वर्ष 2011 में मां मंजू शर्मा को विरासतन में नौकरी मिलने पर परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। उन्हें पहली तैनाती रुद्रपुर पीएसी में सिपाही के पद दी गई।
स्थानांतरण के बाद दो वर्ष से माता के साथ पीएसी हरिद्वार में रह रहे थे। बड़ा भाई देवेश शर्मा नोएडा में ग्राफिक डिजाइनर है। शैलेश ने अपनी सफलता का श्रेय माता को दिया है। वहीं, माता मंजू शर्मा, भाई देवेश शर्मा, प्रतीक गुप्ता तथा क्षेत्र निवासी न्यायाधीश अवंतिका चौधरी ने बधाई दी।