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मेयर ने विधायक को दूध से मक्खी की तरह कर दिया बाहर : चीमा
Thu, 05 Jun 2025 01:28 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:28 AM IST
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काशीपुर। एकजुटता की मिसाल देने वाली भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर के राजनेताओं में सामंजस्य नजर नहीं आ रहा है। पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा ने मेयर दीपक बाली पर स्थानीय विधायक को दूध से मक्खी की तरह बाहर करने, जनता और पार्टी सदस्यों की सलाह के बिना निर्णय लेने के आरोप लगाए हैं।
विधायक कार्यालय में पूर्व विधायक चीमा ने बुधवार को प्रेसवार्ता की। उन्होंने मेयर दीपक बाली के कार्यों का विरोध किया। कहा कि मेरी जानकारी में आया है कि महापौर ने नाम बदलने का निर्णय लेते हुए काशीपुर के चौराहों का निरीक्षण कर विभागों की मीटिंग बुलाई थी। इसके लिए मेयर ने स्वयं निर्देशित किया है। इससे काशीपुर की जनता में रोष है।चौराहों का नाम बदलना काशीपुर की पहचान बदलने के बराबर है।
चीमा ने कहा कि मैं 20 साल तक विधायक रहा। सभी मिलजुल कर विकास की एक-दूसरे को सूचना देकर कार्य करते थे। आज विधायक को मेयर ने अपने सारे कार्यकलापों में बाहर कर दिया। विधायक और मेयर में कोई तालमेल ही नहीं है।
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बैठकों में विधायक को भी बुलाना चाहिए। मेयर हो या विधायक, अगर कोई भी अपने कार्य क्षेत्र से बाहर और नियमानुसार कार्य न कर रहा हो तो अफसरों को बताना चाहिए कि यह कार्य आपके अधिकार क्षेत्र से बाहर है इसमें हस्तक्षेप न करें।
कहा कि विधायक के पास आए हुए व्यक्ति का कार्य एक बार में ही हो जाता है। इसलिए उसे दोबारा नहीं आना पड़ता। निगम में उसका कार्य नहीं होता इसलिए वहां लोगों का मेला लगा रहता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता राम मेहरोत्रा ने कहा कि नाम बदलने से पहले नगर की जनता और पार्टी के सदस्यों, पार्षदों के साथ आम सहमति बनानी चाहिए। विधायक और मेयर के बीच सामंजस्य नजर नहीं आ रहा है। वहां पर भाजपा प्रदेश महामंत्री खिलेंद्र चौधरी और प्रदेश मंत्री एवं निगम पार्षद गुरविंदर सिंह चंडोक मौजूद रहे।
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विधायक कार्यालय में पूर्व विधायक चीमा ने बुधवार को प्रेसवार्ता की। उन्होंने मेयर दीपक बाली के कार्यों का विरोध किया। कहा कि मेरी जानकारी में आया है कि महापौर ने नाम बदलने का निर्णय लेते हुए काशीपुर के चौराहों का निरीक्षण कर विभागों की मीटिंग बुलाई थी। इसके लिए मेयर ने स्वयं निर्देशित किया है। इससे काशीपुर की जनता में रोष है।चौराहों का नाम बदलना काशीपुर की पहचान बदलने के बराबर है।
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चीमा ने कहा कि मैं 20 साल तक विधायक रहा। सभी मिलजुल कर विकास की एक-दूसरे को सूचना देकर कार्य करते थे। आज विधायक को मेयर ने अपने सारे कार्यकलापों में बाहर कर दिया। विधायक और मेयर में कोई तालमेल ही नहीं है।
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बैठकों में विधायक को भी बुलाना चाहिए। मेयर हो या विधायक, अगर कोई भी अपने कार्य क्षेत्र से बाहर और नियमानुसार कार्य न कर रहा हो तो अफसरों को बताना चाहिए कि यह कार्य आपके अधिकार क्षेत्र से बाहर है इसमें हस्तक्षेप न करें।
कहा कि विधायक के पास आए हुए व्यक्ति का कार्य एक बार में ही हो जाता है। इसलिए उसे दोबारा नहीं आना पड़ता। निगम में उसका कार्य नहीं होता इसलिए वहां लोगों का मेला लगा रहता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता राम मेहरोत्रा ने कहा कि नाम बदलने से पहले नगर की जनता और पार्टी के सदस्यों, पार्षदों के साथ आम सहमति बनानी चाहिए। विधायक और मेयर के बीच सामंजस्य नजर नहीं आ रहा है। वहां पर भाजपा प्रदेश महामंत्री खिलेंद्र चौधरी और प्रदेश मंत्री एवं निगम पार्षद गुरविंदर सिंह चंडोक मौजूद रहे।