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कोतवाली के इतिहास में लिखी जा रही है सबसे बड़ी एफआइआर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 12:12 AM IST
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The biggest FIR being written
डेमो
काशीपुर। काशीपुर कोतवाली के इतिहास में पहली बार सबसे बड़ी एफआईआर लिखी जा रही है। रिपोर्ट लिखते-लिखते चार दिन गुजर चुके हैं। इसे पूरा लिखने में दो से तीन दिन का समय और लग सकता है। अटल आयुष्मान घोटाला में दो अस्पतालों के खिलाफ दर्ज की जा रही एफआईआर पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई है। हिंदी और अंग्रेजी भाषा की भेजी गई दोनों एफआईआर लिखने में मुहर्रिरो के पसीने छूट रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अटल आयुष्मान योजना के तहत रामनगर रोड स्थित एमपी अस्पताल और तहसील रोड स्थित देवकी नंदन अस्पताल में भारी अनियमितताएं पकड़ी थीं। जांच में दोनों अस्पतालों के संचालकों की ओर से नियम विरुद्ध रोगियों के फर्जी उपचार बिलों का क्लेम वसूलने का मामला पकड़ में आया था। एमपी अस्पताल में रोगियों के डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज कई-कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाए गए। आईसीयू में भी क्षमता से अधिक रोगियों का उपचार दर्शाया गया।
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डायलिसिस केस एमबीबीएस डॉक्टर की ओर से किया जाना बताया गया और वो भी अस्पताल की क्षमता से कई गुना। कई प्रकरणों में बिना इलाज किए ही क्लेम प्राप्त कर लिया गया, जिसकी मरीज को भनक तक नहीं है। उत्तराखंड अटल आयुष्मान के अधिशासी सहायक धनेश चंद्र की ओर से दोनों अस्पताल संचालकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर सौंपी गईं। ये तहरीरें एसएसपी कार्यालय के माध्यम से एक हफ्ते पहले कोतवाली कार्यालय में पहुंच चुकी है। इसमें से एक तहरीर 64 पृष्ठ की हैं, तो दूसरी तहरीर करीब 24 पृष्ठों की। तहरीरों में अधिक विवरण होने के कारण इन अस्पताल संचालकों के खिलाफ ऑनलाइन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती।
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कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने वाले साफ्टवेयर की क्षमता दस हजार शब्दों से अधिक नहीं है। चार दिन पूर्व छुट्टी पर जाते समय कोतवाल चंद्रमोहन सिंह ने कटोराताल एवं बांसफोड़ान चौकी के मुहर्रिरों को मैनुअली एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हिंदी और अंग्रेजी भाषा की भेजी गई दोनों एफआईआर लिखने में मुहर्रिरो के पसीने छूट रहे हैं। बांसफोड़ान चौकी में अब तक 17 वर्क और कटोराताल पुलिस चौकी में एफआईआर के 23 वर्क ही लिखे जा सके हैं। एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कोतवाल को फोन कर नाराजगी जताई। उन्होंने यथाशीघ्र एफआईआर पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस पर कोतवाल ने दोनों पुलिस चौकियों से मुहर्रिरों को बुलाकर फटकार लगाई और उन्हें हर हाल में दो दिनों के भीतर रिपोर्ट पूरी लिख देने के निर्देश दिए।

विवेचना में भी बेलने पड़ेंगे पापड़
काशीपुर। धोखाधड़ी के मामले में दो अस्पताल संचालकों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर की विवेचना करने वाले अधिकारी को पापड़ बेलने पड़ेंगे। मुकदमा दर्ज होने पर इनकी विवेचना को लेकर भी पुलिस पशोपेश की स्थिति में है। विवेचना अधिकारी जब जांच शुरू करेगा तो लगातार लिखते रहने की दशा में भी पहला पर्चा काटने में ही उसे दस से पंद्रह दिन लग सकते हैं। इसके बाद ही मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। किसी भी दशा में इस मुकदमे की विवेचना तीन माह में पूरी होने की संभावना नहीं है।
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