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कोई चला रहा टेंपो तो किसी के बच्चे कर रहे मजदूरी
ब्यूरो, अमर उजाला, काशीपुर
Updated Sat, 14 Mar 2015 12:33 AM IST
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काशीपुर शुगर मिल के बंद होने से 650 मजदूर परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। कोई टेंपो चला रहा है तो किसी के बच्चे स्कूल छोड़कर मजदूरी कर रहे हैं। मिल बंद होने के बाद न तो सरकार और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध ली। उनका बकाया वेतन और देयकों तक का भुगतान नहीं हुआ है।
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काशीपुर शुगर मिल नवंबर 2012 में बंद हो गई थी। तब से मजदूरों और कर्मचारियों का एक साल का वेतन व अन्य देयकों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे करीब 650 कर्मचारी परिवार गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने की उम्र में मजदूरी कर रहे हैं तो कोई टेंपो चला रहा है। कोई खेतों में दिहाड़ी कर रहा है। मजदूरों की बनबसा कालोनी कभी गुलजार रहती थी लेकिन अब सन्नाटा रहता है। वहीं बिना मरम्मत के क्वाटर जीर्णशीर्ण हो चुके हैं। कालोनी के बीच ही बड़ी-बड़ी घास खड़ी है। जब खाने को ही रोटी नहीं तब साफ-सफाई की किसे पड़ी है। मजदूर क्वाटरों की छतें उखड़ गई और दीवारें दरक गई हैं। बारिश का पानी बाहर कम अंदर अधिक ज्यादा गिरता है। लोगों ने छतों पर प्लास्टिक की पन्नी डाली हुई है। मजदूरों को सरकार व जनप्रतिनिधियों से भारी शिकायत है। उनका कहना है कि सरकार चाहती तो उनका बकाया वेतन व देयकों का भुगतान अपने पास से कर देती। मिल बेचने से जो धनराशी मिलती उसमें से अपना रुपए रख लेती। जो नेता चुनाव के समय बकाया भुगतान कराने का भरोसा दे रहे थे। चुनाव जीतने के बाद वह नजर नहीं आए।
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मजदूरों ने बताया कि एकमात्र नगर निगम के पार्षद सर्वेश बाली मदद करते हैं। पार्षद ने ही पानी के कई हैंडपंप लगवा कर दिए हैं।