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छात्रों की मनोदशा: अब परीक्षा देने से डर रहे बच्चे, शिक्षक तनावमुक्त करने के लिए काउंसिलिंग का ले रहे सहारा

Thu, 24 Mar 2022 11:39 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, काशीपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, काशीपुर Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Thu, 24 Mar 2022 11:39 AM IST
सार

शिक्षाविदों की मानें तो ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चों की रूचि कम हो गई है। बहुत से बच्चे इस कोरोना संक्रमण के दौरान कक्षाएं ज्वाइन ही नहीं करते थे। यदि करते भी थे तो कुछ समय बाद वह लेफ्ट हो जाते थे।

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Student afraid to take exams, teachers are resorting to counseling to de-stress
अमर उजाला शिक्षा अभियान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लगातार दो वर्ष तक वैश्विक महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षा और परीक्षा से शिक्षा का स्तर काफी हद तक गिर गया। अब जब इस वर्ष ऑफलाइन परीक्षा कराने की शिक्षा विभाग ने घोषणा की है, तबसे छात्रों की मनोदशा पर खासा प्रभाव पड़ा है। समय कम होने की वजह से बच्चे परीक्षा को लेकर डरे हुए हैं। ऐसे में शिक्षक काउंसिलिंग के माध्यम से उनके मन से परीक्षा का डर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

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कोरोना के चलते ऑनलाइन कक्षाओं से बहुत से छात्र अवसाद में आ गए हैं क्योंकि उनकी भौतिक रूप से पढ़ाई नहीं हुई है और अब उन्हें ऑफलाइन परीक्षा देनी है। शिक्षाविदों की मानें तो ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चों की रूचि कम हो गई है। बहुत से बच्चे इस कोरोना संक्रमण के दौरान कक्षाएं ज्वाइन ही नहीं करते थे। यदि करते भी थे तो कुछ समय बाद वह लेफ्ट हो जाते थे।
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ऐसे में न तो उनका कोर्स पूरा हुआ और न ही वे अपने विषय को पूरी तरह से तैयार कर सके। अब जब ऑफलाइन पढ़ाई में लौटे हैं तो कक्षा में शिक्षक के साथ बैठने का समय कम मिला और वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई हैं या होने वाली हैं। ऐसे में इंटरमीडिएट के छात्र फिजिक्स, कैमेस्ट्री व मैथ्स तो हाइस्कूल में मैथ्स, सामाजिक विज्ञान व साइंस जैसे मुख्य विषय पर फोकस कर रहे हैं।
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ये भी पढ़ें...शिक्षा: ऑफलाइन कक्षा से उत्साहित बच्चे, लेकिन पढ़ाई के नाम पर चेहरे की रंगत फीकी, स्कूलों में अब योग, खेल और काउसिंलिग पर जोर


क्या कहना है शिक्षकों का
- कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की रूचि कम हो गई है, इसलिए हम लोग कमजोर छात्रों के साथ बैठक कर उनकी काउंसिलिंग कर रहे हैं कि वे परीक्षा से डरे नहीं और परीक्षा की तैयारी में जुटे रहें। जो कोर्स बताया गया है उनकी बेहतर ढंग से तैयारी करें।
अमित बाठला, राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज, बांसखेड़ा।

- पिछले दो साल में बेहतर पढ़ाई नहीं हो सकी है जिससे बच्चे अब चिंतित हो रहे हैं। बोर्ड परीक्षार्थियों की अलग से बैठक की। बच्चों को काउंसिलिंग के दौरान बताया कि वह पहले आसान विषयों को याद करें, पढ़ाई का समय निर्धारित करें लेकिन कई घंटे तक लगातार नहीं बैठे, महत्वपूर्ण प्रश्न पर अंडरलाइन करके उसे याद करें।
-राजेंद्र कुमार, अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, महुआखेड़ा गंज।

- कोरोना के चलते पढ़ाई पर काफी असर पढ़ा है। अब काउंसिलिंग के द्वारा बच्चों व उनके अभिभावकों को बुलाकर समझाया जा रहा है कि जो ऑनलाइन पढ़ाई हुई है उससे तैयारी करें, अच्छे नंबर आएंगे। साथ ही बच्चों को समझाया जा रहा है कि तैयारी करें और किसी भी तरह से चिंता नहीं करें।
-अजय शंकर कौशिक, प्रधानाचार्य, जीबी पंत इंटर कॉलेज

ये हैं समस्याएं

- साल भर कक्षाएं न चलने से बच्चों की परीक्षा की तैयारी नहीं है।
- अब परीक्षा का समय नजदीक आने पर बच्चे घबरा रहे हैं।
- कई बच्चे गहन चिंता में हैं।
- कुछ बच्चे अवसाद में चले गए हैं।
- कुछ बच्चे परीक्षा देने के मूड में नहीं हैं।
-बच्चों की बौद्धिक क्षमता घटी है।
- लेखन क्षमता घटी है।

ये प्रयास कर रहे शिक्षक
- बच्चों के मन से परीक्षा का डर निकाल रहे।
- लेखन की प्रैक्टिस करवा रहे।
-पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा कर रहे।
-अवसादग्रस्त बच्चों के मन में उम्मीद जगा रहे।
-बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे।

मनोचिकित्सक का सुझाव
कोरोना संक्रमण के बाद ऑफलाइन पढ़ाई और परीक्षा होने से बहुत से बच्चे अवसाद में आ रहे हैं। इस वक्त अस्पताल में उनके पास महीने में 25 से 30 बच्चे अपने अभिभावक के साथ आ रहे हैं। उनमें परीक्षा को लेकर घबराहट और चिड़चिड़ापन की शिकायत आ रही है। कई शिकायत आ रही है कि बच्चे स्कूल जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। ऐसे बच्चों को समझाया जा रहा है कुछ समय स्कूल जाएं।

वहीं कुछ मामलों में दवा तक देनी पड़ रही है। कईं बच्चे ऐसे भी आ रहे हैं जो पढ़ाई में तो होशियार हैं, लेकिन अपने नंबरों को लेकर ज्यादा चिंता हो रही है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं को लेकर अधिक परेशान हो रहे हैं। हम ऐसे बच्चों को अनुलोम-विलोम या प्राणायाम बता रहे हैं।

बच्चे कुछ समय अपनी बातों को परिजनों या मित्रों से शेयर करें। इससे काफी हद तक समस्या का समाधान होगा। साथ ही पढ़ाई का शेड्यूल बना लें। कम से कम 7 से 8 घंटे तक सोएं तभी आपकी याददाश्त बढ़ेगी। वहीं अभिभावकों को बताया जा रहा है कि पढ़ाई का ज्यादा दबाव नहीं बनाएं। दूसरे बच्चे से तुलना न करें।
-डॉ. ईश कुमार डल्ला, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल, रुद्रपुर।
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