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UK: उत्तर प्रदेश से दक्षिण भारत तक 25 रुपये में बेच रहे थे 148 का सिरप, जांच में खुलासा; यहां तक पहुंची सप्लाई

Thu, 23 Jul 2026 12:20 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, रुद्रपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रुद्रपुर Published by: Heera Updated Thu, 23 Jul 2026 12:20 PM IST
सार

बाजपुर में पकड़ी गई करोड़ों रुपये की नकली दवाइयों के मामले में एसटीएफ की जांच में देशभर में फैला एक बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। इस सिंडिकेट की जड़ें राजस्थान से जुड़ी हैं और उत्तराखंड के रास्ते यह दवाइयां दक्षिण भारत तक सप्लाई की जा रही थीं। 

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STF cracks case of fake medicines worth crores of rupees seized in Bajpur
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

 

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बाजपुर में पकड़ी गई करोड़ों रुपये की नकली दवाइयों के मामले में एसटीएफ की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे देशभर में फैले एक बड़े नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट की जड़ें राजस्थान से जुड़ी हैं। उत्तराखंड के जरिये इसकी सप्लाई उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के साथ दक्षिण भारत तक पहुंच रही थी। आरोपी कम कीमत पर नकली दवाइयां बेचकर करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार चला रहा था।

एसटीएफ के अनुसार जिन सिरप की बाजार में कीमत 148 से 160 रुपये के बीच थी उन्हें आरोपी थोक विक्रेताओं को महज 25 रुपये में उपलब्ध करा रहा था। कम कीमत के कारण मेडिकल कारोबारियों को भारी मुनाफा मिलता था जिससे नकली दवाइयों की खेप तेजी से बाजार में खप जाती थी।

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जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क से लखनऊ और गोंडा समेत कई शहरों में दवाइयां भेजी गईं। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों तक भी सप्लाई के संकेत मिले हैं। अब एसटीएफ पूरे सप्लाई नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

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इसी बीच, उत्तर प्रदेश में भी नकली दवाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। गोंडा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने तीन दिन के अभियान में करीब 1.13 करोड़ रुपये की नकली और नशीली दवाइयां जब्त की हैं। जांच में राजस्थान और उत्तराखंड से बड़े पैमाने पर दवाइयां मंगाकर गोंडा, लखनऊ और देवीपाटन मंडल के बाजारों में सप्लाई किए जाने के संकेत मिले हैं। लखनऊ में भी एफएसडीए ने करीब 24 लाख रुपये की नकली दवाइयां बरामद की हैं। इनमें गैस, ब्लड प्रेशर, दर्द, सूजन, एंजायटी और एंटीबायोटिक जैसी दवाइयां शामिल हैं।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बाजपुर से पकड़े गए नेटवर्क का उत्तर प्रदेश में सामने आए गिरोहों से सीधा संबंध है या नहीं। यदि कड़ियां जुड़ती हैं तो यह कई राज्यों में फैले नकली दवा सिंडिकेट का बड़ा खुलासा हो सकता है।

 

25 रुपये की सिरप से करोड़ों का खेल
एसटीएफ के अनुसार, नकली दवा कारोबार की सबसे बड़ी ताकत इसकी बेहद कम लागत है। सस्ती कच्ची सामग्री, नकली रैपर और ब्रांडेड पैकेजिंग के जरिये दवाओं को असली बताकर बाजार में उतारा जाता है। उत्पादन लागत बेहद कम होने के बावजूद इन्हें बाजार मूल्य के करीब बेचकर कई गुना मुनाफा कमाया जाता है।

रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां बनीं निशाना
बरामद दवाइयों की सूची से साफ है कि गिरोह ने सबसे अधिक मांग वाली दवाओं को निशाना बनाया। गैस, एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, कैल्शियम, आयरन और विटामिन जैसी दवाओं की खपत अधिक होने से इनके नकली होने का संदेह भी कम होता है। यही वजह है कि ऐसी दवाइयों की अवैध सप्लाई तेजी से बाजार में खप जाती है।

 

मामले में कई अहम कड़ियां सामने आई हैं। एसटीएफ यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है जो देशभर के लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। - नीलेश आनंद भरणे, आईजी, एसटीएफ

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