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Udham Singh Nagar News: जंग की तपिश से झुलसा सिडकुल का कारोबार, ईंधन महंगा और उत्पादन की लागत बढ़ी
Thu, 26 Mar 2026 12:41 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:41 AM IST
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रुद्रपुर। ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच जारी तनाव का असर अब सिडकुल सहित आसपास उद्योगों पर भी दिखने लगा है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव आने से ईंधन महंगा हो गया है जिससे उद्योगों की उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर बिजली दरों, परिवहन खर्च और कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है। तनाव की इस स्थिति के कारण औद्योगिक इकाइयों की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव बढ़ रहा है।
उद्यमियों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव और गंभीर रूप में सामने आ सकता है। खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि उनके पास सीमित संसाधन होते हैं और वे लागत बढ़ोतरी को लंबे समय तक वहन नहीं कर सकते। बढ़ती लागत के चलते कई इकाइयों ने उत्पादन घटाने या कीमतें बढ़ाने पर भी विचार शुरू कर दिया है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और मांग दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
उद्यमियों ने सरकार से राहत पैकेज, बिजली दरों में स्थिरता और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने जैसे कदम उठाने की मांग की है। यदि समय रहते ठोस नीतिगत समर्थन नहीं मिला तो इसका असर न केवल औद्योगिक उत्पादन बल्कि रोजगार पर भी पड़ेगा जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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इन कंपनियों पर पड़ा है असर
विजय प्रभा हेल्थ केयर, टीवीएस लुकास, एरीज ड्रग्स, कैडमेक, जय गुरु इंटरप्राइजेज, नॉदर्न एंड क्रॉप एग्रो, भारत टेक्सटाइल आदि।
युद्ध का असर सप्लाई चेन पर भी साफ दिख रहा है। कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। कई बार समय पर सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है जिससे उत्पादन की योजना बाधित हो रही है। इससे उद्योगों के लिए स्थिरता बनाए रखना चुनौती बन गया है। बीते कुछ समय में डीजल और बिजली के खर्च में लगातार इजाफा हुआ है। - बीपी सिंह, एचआर, लुकास टीवीएस
युद्ध के कारण सिडकुल सहित तमाम उद्योग काफी प्रभावित हो रहे हैं। उद्योगों को अबाध रूप से संचालित रखने के लिए सरकार से कई नीतिगत मांगें की गई है। सरकार भी उद्योगों के संचालन को बनाए रखना चाहती है लेकिन युद्ध के कारण ज्यादातर उद्योगों का उत्पादन काफी घट गया है और प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। - श्रीकर सिन्हा, अध्यक्ष सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर एसोसिएशन
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उद्यमियों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव और गंभीर रूप में सामने आ सकता है। खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि उनके पास सीमित संसाधन होते हैं और वे लागत बढ़ोतरी को लंबे समय तक वहन नहीं कर सकते। बढ़ती लागत के चलते कई इकाइयों ने उत्पादन घटाने या कीमतें बढ़ाने पर भी विचार शुरू कर दिया है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और मांग दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
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उद्यमियों ने सरकार से राहत पैकेज, बिजली दरों में स्थिरता और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने जैसे कदम उठाने की मांग की है। यदि समय रहते ठोस नीतिगत समर्थन नहीं मिला तो इसका असर न केवल औद्योगिक उत्पादन बल्कि रोजगार पर भी पड़ेगा जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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इन कंपनियों पर पड़ा है असर
विजय प्रभा हेल्थ केयर, टीवीएस लुकास, एरीज ड्रग्स, कैडमेक, जय गुरु इंटरप्राइजेज, नॉदर्न एंड क्रॉप एग्रो, भारत टेक्सटाइल आदि।
युद्ध का असर सप्लाई चेन पर भी साफ दिख रहा है। कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। कई बार समय पर सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है जिससे उत्पादन की योजना बाधित हो रही है। इससे उद्योगों के लिए स्थिरता बनाए रखना चुनौती बन गया है। बीते कुछ समय में डीजल और बिजली के खर्च में लगातार इजाफा हुआ है। - बीपी सिंह, एचआर, लुकास टीवीएस
युद्ध के कारण सिडकुल सहित तमाम उद्योग काफी प्रभावित हो रहे हैं। उद्योगों को अबाध रूप से संचालित रखने के लिए सरकार से कई नीतिगत मांगें की गई है। सरकार भी उद्योगों के संचालन को बनाए रखना चाहती है लेकिन युद्ध के कारण ज्यादातर उद्योगों का उत्पादन काफी घट गया है और प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। - श्रीकर सिन्हा, अध्यक्ष सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर एसोसिएशन