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Udham Singh Nagar News: सर्विस ट्रिब्युनल ने निरस्त किए एसएसपी और आईजी के आदेश

Fri, 06 Jun 2025 12:23 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Fri, 06 Jun 2025 12:23 AM IST
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Service tribunal canceled the orders of SSP and IG
काशीपुर। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारी अधिकारियों के सेवा संबंधी मामलों का निर्णय करने वाले विशेष न्यायालय (ट्रिब्युनल) की नैनीताल पीठ ने तत्कालीन एसएसपी ऊधमसिंह नगर और तत्कालीन आईजी कुमाऊं के पुलिस कांस्टेबल के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही में दिए गए दंड आदेश को निरस्त कर दिया।
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वर्तमान में चंपावत जिले में तैनात पुलिस कांस्टेबल दिनेश कुमार की और से उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण की नैनीताल बैंच में याचिका दायर की गई थी।
कहा कि वर्ष 2021 में जब यह पुलिस कर्मी ऊधमसिंह नगर जिले में तैनात थे तो तत्कालीन विधायक नानकमत्ता डॉ. प्रेम सिंह राणा के कथित पत्र सात जून 2021 की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसमें याची दिनेश कुमार सहित विभिन्न पुलिस कर्मियों की सूची दी गई थी।
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इस पर एसएसपी ऊधमसिंह नगर ने जन प्रतिनिधियों से स्थानांतरण के संबंध में सिफारिश कराकर कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन करने वाले कर्मियों के विरुद्ध जांच के आदेश दिए थे। जांच आख्या 25 अगस्त 2021 में बिना स्वतंत्र साक्ष्यों और याची के पक्ष को विचार में लिए बिना व बिना किसी वैध आधार के याची सहित विधायक के तथाकथित पत्र में दी गई सूची में शामिल सभी कर्मियों को दोषी होने का निष्कर्ष दे दिया।
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एसएसपी ने इस जांच आख्या को आधार बनाते हुए अपने आदेश 15 मार्च 2022 के माध्यम से याची की 2021 की चरित्र पंजिका में परिनिंदा प्रविष्टि अंकित करने के दंड का आदेश दे दिया। पुलिस कांस्टेबल ने इसकी अपील आईजी कुमाऊं परिक्षेत्र नैनीताल को की। उन्होंने भी निष्पक्ष रूप से विचार किए बिना अपील को निरस्त कर दिया। इस पर पुलिस कांस्टेबल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण की नैनीताल पीठ में दावा याचिका दायर की।
कहा कि याची तीन माह पूर्व से ही कार्यरत चला आ रहा था। इसलिए सिफारिश करवाने या किसी अनुशासनिक अवहेलना का प्रश्न ही नहीं है। अधिकरण के सदस्य कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की पीठ ने तत्कालीन एसएसपी और तत्कालीन आईजी के अपील आदेश को निरस्त कर दिया।

इसके साथ ही आदेश दिया गया कि आदेश की प्रमाणित प्रति एसएसपी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की तिथि से 30 दिवस के भीतर याची की चरित्र पंजिका व अन्य अभिलेखों में दर्ज दंड को विलुप्त करें और सभी सेवा लाभ अवमुक्त करते हुए प्रदान किए जाएं।
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