उड़द की दो नई प्रजातियां विकसित: 22 फीसदी अधिक उपज का दावा, उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में देंगी ज्यादा पैदावार
पंत विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उड़द की दो नई प्रजातियां (पंत उड़द-13 और पंत उड़द-14) विकसित कीं हैं। ये किस्में दलहनी फसलों की खेती करने वाले किसानों की आर्थिकी सुधारने में सहायक होंगी।
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जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के वैज्ञानिकों ने उड़द की दो नई प्रजातियां (पंत उड़द-13 और पंत उड़द-14) विकसित कीं हैं। ये किस्में दलहनी फसलों की खेती करने वाले किसानों की आर्थिकी सुधारने में सहायक होंगी। विवि के वैज्ञानिक डॉ. एसके वर्मा, डॉ. आरके पंवार और डॉ. अंजू अरोरा ने इन्हें विकसित किया है।
इन प्रजातियों को सात से नौ मई तक चली अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना-खरीफ दहलन प्रजाति पहचान समिति की बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र के अलावा असोम सहित अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में उगाए जाने के लिए जारी किया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये प्रजातियां 22 प्रतिशत तक अधिक उपज दे सकती हैं। ये विभिन्न रोग व कीट प्रतिरोधी भी हैं।
ये है खसियत
- पंत उड़द-13 (पीयू 1920) ने उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार तीन वर्षों तक उपज परीक्षणों में मानक प्रजातियों उत्तरा, पंत उड़द-31 एवं पंत उड़द-10 से क्रमशः 16.44, 11.34 एवं 22.15 प्रतिशत तक अधिक उपज दी है।
- पंत उड़द-14 (पीयू 1921) ने क्रमशः 10.96, 6.09 एवं 16.39 प्रतिशत अधिक उपज दी है। दोनों प्रजातियों की औसत उपज 12-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। इनकी परिपक्वता अवधि 80 से 85 दिन है।
- पंत उड़द-13 के सौ दानों का वजन 4.6 ग्राम, जबकि पंत उड़द-14 के सौ दानों का भार 4.8 ग्राम है।
- ये प्रजातियां पीला मोजेक विषाणु, चूर्णिल फफूंद, सफेद मक्खी, फली बेधक कीट, थ्रिप्स व मारूका कीट के लिए प्रतिरोधी हैं।
- पत्ती सिकोड़ने वाले विषाणु, सर्कोस्पोरा लीफ स्पॉट, जड़ सड़न व वेब ब्लाइट के लिए मध्यम प्रतिरोधी हैं।
पंत विवि की 70 दलहन प्रजातियों का अहम योगदान
पंत विवि अब तक दलहनों की 70 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली रोग व कीट रोधी प्रजातियां विकसित कर चुका है। दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए बदलते वातावरण के अनुकूल अधिक उपज देने वाली रोग-कीट रोधी प्रजातियां विकसित करनी होंगी। वर्ष 2014-15 तक देश में विभिन्न दलहनों का उत्पादन 150-160 लाख टन प्रतिवर्ष था। कृषि वैज्ञानिकों ने दलहनों की उन्नतशील प्रजातियां विकसित करने के साथ ही उनकी उत्पादन तकनीक भी विकसित की है। सरकार ने भी दलहनी फसलों की एमएसपी बढ़ाई है। इससे पिछले वर्ष देश में दलहन का उत्पादन 245 लाख टन से अधिक हो गया।
नीति आयोग के अनुसार वर्ष 2047 तक दलहन में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रतिवर्ष 490 लाख टन दलहनों का उत्पादन करना होगा। विवि में आवश्यक शोध किए जा रहे हैं। देश के 70 कृषि विश्वविद्यालयों में विकसित पांच प्रजातियां पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों को समर्पित की हैं। इनमें से तीन पंत चना-10, पंत मसूर-14 और पंत मटर-484 पंतनगर विवि में ही विकसित हुई हैं। - डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति पंत विवि
नई प्रजातियों का बीज अगले सीजन में किसानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाएगा। - डाॅ. एएस नैन, शोध निदेशक, पंत विवि