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बैठने को कक्ष नहीं मिला तो धरने पर बैठ गया कनिष्ठ सहायक
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
Updated Thu, 22 Sep 2016 01:10 AM IST
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एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल में एनआरएच का काम देख रहे कनिष्ठ सहायक ने सीएमएस पर भेदभाव करने और बैठने के लिए अच्छा कक्ष उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाते हुए धरना दिया। जन्म प्रमाण पत्र बनाने का काम स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को सौंपने और कनिष्ठ सहायक के समर्थन में आशा कार्यकर्त्रियां भी धरने पर बैठीं। वहीं सीएमएस ने उन पर लगे भेदभाव के आरोपों पर हैरानी जताते हुए बेबुनियाद करार दिया है।
बुधवार को अस्पताल परिसर में हार्ट सेंटर के बाहर कनिष्ठ सहायक कमल वर्मा और आशा कार्यकर्त्रियों ने धरना प्रदर्शन किया। कमल का आरोप है कि उसके पास तीन कमरों का चार्ज है। तीनों कमरों में सामान भरा पड़ा है। इस कमरे में बैठकर वह लाभार्थियों को चेक बांट रहा था, उसे वहां से सीएमएस ने हटा दिया है। उसके पास बैठने के लिए कक्ष नहीं है।
जो कक्ष उसे दिया गया है, वहां पहले से ही सामान भरा पड़ा है। अगर चेक लेने के लिए महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है तो उनके बैठने के लिए कोई फर्नीचर भी नहीं है। आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि स्वास्थ्य पर्यवेक्षक का पुराना कार्यकाल अच्छा नहीं रहा है। सीएमएस ने उन्हें जन्म प्रमाण पत्र बनाने का काम सौंपा गया है। जिस अस्पताल में बच्चे का जन्म होता है, वहीं जन्म प्रमाण पत्र के लिए एफिडेबिट क्यों मांगा जाता है।
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कार्यकत्रियों के लिए शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य निरीक्षक को प्रमाण पत्र बनवाने का काम नहीं देने की मांग की। धरना देने वालों में मीना रावत, स्नेहलता शर्मा, मालती चौबे, मीना चौहान, बीना रस्तोगी, सुधा शर्मा, आशा सचदेवा, सुनीता आदि मौजूद रहे। उधर सीएमएस डॉ. वीके टम्टा ने कहा कि कमल ने लिखकर दिया था कि उस पर काम का बोझ ज्यादा है। इसलिए उससे एनएचबीएम का काम हटाकर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को दिया गया है। जो काम जिस कक्ष में चल रहा है, अब भी वहीं चल रहा है। उन्होंने कक्षों में कोई बदलाव नहीं किया है। एनआरएच के कार्यों के लिए जो कमरा आवंटित है, वहां कमल को बैठना चाहिए। जन्म प्रमाण बनाने का काम पर्यवेक्षक को नहीं दिया गया है।
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बुधवार को अस्पताल परिसर में हार्ट सेंटर के बाहर कनिष्ठ सहायक कमल वर्मा और आशा कार्यकर्त्रियों ने धरना प्रदर्शन किया। कमल का आरोप है कि उसके पास तीन कमरों का चार्ज है। तीनों कमरों में सामान भरा पड़ा है। इस कमरे में बैठकर वह लाभार्थियों को चेक बांट रहा था, उसे वहां से सीएमएस ने हटा दिया है। उसके पास बैठने के लिए कक्ष नहीं है।
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जो कक्ष उसे दिया गया है, वहां पहले से ही सामान भरा पड़ा है। अगर चेक लेने के लिए महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है तो उनके बैठने के लिए कोई फर्नीचर भी नहीं है। आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि स्वास्थ्य पर्यवेक्षक का पुराना कार्यकाल अच्छा नहीं रहा है। सीएमएस ने उन्हें जन्म प्रमाण पत्र बनाने का काम सौंपा गया है। जिस अस्पताल में बच्चे का जन्म होता है, वहीं जन्म प्रमाण पत्र के लिए एफिडेबिट क्यों मांगा जाता है।
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कार्यकत्रियों के लिए शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य निरीक्षक को प्रमाण पत्र बनवाने का काम नहीं देने की मांग की। धरना देने वालों में मीना रावत, स्नेहलता शर्मा, मालती चौबे, मीना चौहान, बीना रस्तोगी, सुधा शर्मा, आशा सचदेवा, सुनीता आदि मौजूद रहे। उधर सीएमएस डॉ. वीके टम्टा ने कहा कि कमल ने लिखकर दिया था कि उस पर काम का बोझ ज्यादा है। इसलिए उससे एनएचबीएम का काम हटाकर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को दिया गया है। जो काम जिस कक्ष में चल रहा है, अब भी वहीं चल रहा है। उन्होंने कक्षों में कोई बदलाव नहीं किया है। एनआरएच के कार्यों के लिए जो कमरा आवंटित है, वहां कमल को बैठना चाहिए। जन्म प्रमाण बनाने का काम पर्यवेक्षक को नहीं दिया गया है।