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Udham Singh Nagar News: रुद्रपुर के सत्यम ने 1.64 लाख डाकघरों का डाटा लीक होने से बचाया
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सत्यम रस्तोगी।
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दीप बेलवाल
रुद्रपुर। रुद्रपुर निवासी 26 साल के सत्यम रस्तोगी ने देश के 1.64 लाख डाकघरों के करीब 16 करोड़ खातों का डाटा लीक होने से बचा लिया है। उन्होंने डाक विभाग के पोर्टल पर खामी को पकड़ कर इसे दूर करने के लिए सतर्क किया था।
भारतीय डाक (इंडिया पोस्ट) के ऑनलाइन पोर्टल पर पिछले दिनों सत्यम को साइबर सुरक्षा संबंधी खामी मिली थी। उन्होंने भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) को रिपोर्ट भेजी। उन्होंने बताया कि डाक विभाग के पोर्टल पर रिएक्ट और नेक्स्ट डॉट जेएस से जुड़ी सर्वर साइट रिमोट कोड एक्जीक्यूशन से संबंधित खामी थी। इसके कारण सर्वर पर अनाधिकृत गतिविधि और संवेदनशील सिस्टम ड़ाटा के लीक होने की आशंका थी। इसके जरिये ठग मात्र यूआरएल में बदलाव करके किसी भी उपभोक्ता का आधार, पैन कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल कर सकते थे। सत्यम ने बताया कि उन्होंने और अन्य विशेषज्ञों ने संवेदनशील जानकारी सामने आते ही सर्ट इन को रिपोर्ट की थी। इस पर इंडिया पोस्ट ने तत्काल कदम उठाकर अपने पोर्टल की इस खामी को ठीक कर लिया और एपीआई एंड प्वाइंट को सुरक्षित कर लिया जिससे डाटा चोरी का खतरा टल गया।
डाटा लीक से ये हो सकता था खतरा
-पहचान की चोरी- आधार, पैन, मोबाइल नंबर जैसी जानकारी का गलत इस्तेमाल।
-वित्तीय नुकसान- खाता, यूपीआइ, क्रेडिट कार्ड से अवैध लेनदेन।
-धोखाधड़ी- लीक हुए डेटा से फर्जी अकाउंट, सिम स्वैप या लोन लिया जा सकता है।
-प्राइवेसी का उल्लंघन- निजी कॉल, मैसेज, लोकेशन या फोटो का दुरुपयोग।
-सरकारी सेवाओं का गलत इस्तेमाल- नागरिक सेवाओं, सब्सिडी या सरकारी पोर्टल्स में अवैध पहुंच।
एथिकल हैकर हैं सत्यम
मूलरूप से रुद्रपुर निवासी सत्यम देहरादून में रहते हैं। वह अमेरिका की मल्टीनेशनल कंपनी बामको इंक में सीनियर मैनेजर (सूचना सुरक्षा) के पद पर कार्यरत हैं। वह क्लाउड सिक्योरिटी एलायंस (सीएसए) और ओडब्लूएएसपी फाउंडेशन जैसी वैश्विक साइबर सुरक्षा समुदायों का नेतृत्व भी कर रहे हैं। सत्यम फॉर्च्यून 500 कंपनियों और सरकारी एजेंसियों की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए भी जाने जाते हैं।
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ब्रिटेन के बैंक की भी मदद की
सत्यम इससे पहले कई बैंकों और विभागों की कमजोरियों का पता लगाकर साइबर हमलों को रोक चुके हैं। इससे पहले ब्रिटेन के सैंसबरी बैंक की प्रणाली में गंभीर सुरक्षा खामी खोजकर डेटा लीक होने से बचाया था। इसी तरह उन्होंने गूगल, स्पॉटिफाई जैसी वैश्विक कंपनियों के क्लाउड प्लेटफॉर्म और आंतरिक सिस्टम की कमजोरियों को दूर कराने में मदद की है।
क्या है सर्ट-इन
सरकारी एजेंसियों पर साइबर हमलों की आशंका जैसी स्थिति में सर्ट-इन संबंधित विभाग से समन्वय कर इसे रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक तरीके से साइबर सुरक्षा का फर्स्ट रिस्पांडर है और देश को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखता है।
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रुद्रपुर। रुद्रपुर निवासी 26 साल के सत्यम रस्तोगी ने देश के 1.64 लाख डाकघरों के करीब 16 करोड़ खातों का डाटा लीक होने से बचा लिया है। उन्होंने डाक विभाग के पोर्टल पर खामी को पकड़ कर इसे दूर करने के लिए सतर्क किया था।
भारतीय डाक (इंडिया पोस्ट) के ऑनलाइन पोर्टल पर पिछले दिनों सत्यम को साइबर सुरक्षा संबंधी खामी मिली थी। उन्होंने भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) को रिपोर्ट भेजी। उन्होंने बताया कि डाक विभाग के पोर्टल पर रिएक्ट और नेक्स्ट डॉट जेएस से जुड़ी सर्वर साइट रिमोट कोड एक्जीक्यूशन से संबंधित खामी थी। इसके कारण सर्वर पर अनाधिकृत गतिविधि और संवेदनशील सिस्टम ड़ाटा के लीक होने की आशंका थी। इसके जरिये ठग मात्र यूआरएल में बदलाव करके किसी भी उपभोक्ता का आधार, पैन कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल कर सकते थे। सत्यम ने बताया कि उन्होंने और अन्य विशेषज्ञों ने संवेदनशील जानकारी सामने आते ही सर्ट इन को रिपोर्ट की थी। इस पर इंडिया पोस्ट ने तत्काल कदम उठाकर अपने पोर्टल की इस खामी को ठीक कर लिया और एपीआई एंड प्वाइंट को सुरक्षित कर लिया जिससे डाटा चोरी का खतरा टल गया।
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डाटा लीक से ये हो सकता था खतरा
-पहचान की चोरी- आधार, पैन, मोबाइल नंबर जैसी जानकारी का गलत इस्तेमाल।
-वित्तीय नुकसान- खाता, यूपीआइ, क्रेडिट कार्ड से अवैध लेनदेन।
-धोखाधड़ी- लीक हुए डेटा से फर्जी अकाउंट, सिम स्वैप या लोन लिया जा सकता है।
-प्राइवेसी का उल्लंघन- निजी कॉल, मैसेज, लोकेशन या फोटो का दुरुपयोग।
-सरकारी सेवाओं का गलत इस्तेमाल- नागरिक सेवाओं, सब्सिडी या सरकारी पोर्टल्स में अवैध पहुंच।
एथिकल हैकर हैं सत्यम
मूलरूप से रुद्रपुर निवासी सत्यम देहरादून में रहते हैं। वह अमेरिका की मल्टीनेशनल कंपनी बामको इंक में सीनियर मैनेजर (सूचना सुरक्षा) के पद पर कार्यरत हैं। वह क्लाउड सिक्योरिटी एलायंस (सीएसए) और ओडब्लूएएसपी फाउंडेशन जैसी वैश्विक साइबर सुरक्षा समुदायों का नेतृत्व भी कर रहे हैं। सत्यम फॉर्च्यून 500 कंपनियों और सरकारी एजेंसियों की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए भी जाने जाते हैं।
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ब्रिटेन के बैंक की भी मदद की
सत्यम इससे पहले कई बैंकों और विभागों की कमजोरियों का पता लगाकर साइबर हमलों को रोक चुके हैं। इससे पहले ब्रिटेन के सैंसबरी बैंक की प्रणाली में गंभीर सुरक्षा खामी खोजकर डेटा लीक होने से बचाया था। इसी तरह उन्होंने गूगल, स्पॉटिफाई जैसी वैश्विक कंपनियों के क्लाउड प्लेटफॉर्म और आंतरिक सिस्टम की कमजोरियों को दूर कराने में मदद की है।
क्या है सर्ट-इन
सरकारी एजेंसियों पर साइबर हमलों की आशंका जैसी स्थिति में सर्ट-इन संबंधित विभाग से समन्वय कर इसे रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक तरीके से साइबर सुरक्षा का फर्स्ट रिस्पांडर है और देश को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखता है।