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खुलासा : जिले में धर्म बदलने के बाद भी लिया जा रहा एससी कोटे का लाभ
Sat, 16 May 2026 01:27 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 16 May 2026 01:27 AM IST
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रुद्रपुर। जिले में धर्म परिवर्तन के बाद भी एससी कोटे का लाभ लिया जा रहा है। विभागीय जांच में ऐसे लोगों की पोल खुल रही है जो दोनों हाथ में लड्डू लिए हुए हैं। प्रशासन ने भी अनुसूचित जाति का लाभ लेने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और ऐसे लोगों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है जो धर्म बदल चुके हैं लेकिन एससी प्रमाणपत्र के माध्यम से सरकारी लाभ ले रहे हैं।
जिले में लोगों का दबाव, डर और लालच देकर धर्म परिवर्तन करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस और जिला प्रशासन की लगातार कार्रवाई में कई अहम खुलासे हो रहे हैं जिससे यह साबित होता है कि तराई धर्मांतरण की गिरफ्त में आ चुका है। जहां राशन, पैसे और माइंड वॉश कर लोगों का धड़ल्ले से धर्म परिवर्तन से किया जा रहा है। जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि जिले में धर्म परिवर्तन के बाद कई लोग एससी प्रमाण का प्रयोग कर एससी कोटे का लाभ लेकर प्रशासन को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।
बीते बृहस्पतिवार को एसडीएम ऋचा सिंह ने बड़ा खुलासा किया था जिसमें सामने आया था कि गदरपुर के चकरपुर बरखेड़ा निवासी राजन कुमार पुत्र संजय कुमार ने वर्ष 2019 में अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र लिया था जबकि बाद में उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। मामले की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने प्रमाणपत्र निरस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। गदरपुर के इस खुलासे के बाद अब धर्मांतरण की गहराई तक जाने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आने की संभावना है। प्रशासन के अनुसार, यह अकेला मामला नहीं है। जिले में ऐसे कई लोग हैं जो धर्म बदलने के बाद भी एससी श्रेणी की सुविधाएं ले रहे हैं। आने वाले दिनों में जिले में कई और प्रमाणपत्र निरस्त हो सकते हैं।
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दोहरा लाभ लेने वालों की तैयार हो रही सूची
जिला प्रशासन अब धर्म परिवर्तन के बाद भी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र का लाभ लेने वालों की जिलेभर में पहचान कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, तहसील स्तर पर पुराने प्रमाणपत्रों का सत्यापन शुरू कर दिया गया है। कई मामलों में धर्मांतरण के बाद भी सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति और आरक्षण का लाभ लेने की शिकायतें मिली हैं। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में और भी नाम सामने आ सकते हैं। संदिग्ध मामलों की अलग सूची तैयार की जा रही है।
दोहरे लाभ लेने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। आने वाले समय में जिले में बड़े स्तर पर प्रमाणपत्र निरस्त किए जा सकते हैं जिससे अपात्र लोग सरकारी योजनाओं और आरक्षण का अनुचित लाभ न ले सकें। - पंकज उपाध्याय, एडीएम
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जिले में लोगों का दबाव, डर और लालच देकर धर्म परिवर्तन करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस और जिला प्रशासन की लगातार कार्रवाई में कई अहम खुलासे हो रहे हैं जिससे यह साबित होता है कि तराई धर्मांतरण की गिरफ्त में आ चुका है। जहां राशन, पैसे और माइंड वॉश कर लोगों का धड़ल्ले से धर्म परिवर्तन से किया जा रहा है। जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि जिले में धर्म परिवर्तन के बाद कई लोग एससी प्रमाण का प्रयोग कर एससी कोटे का लाभ लेकर प्रशासन को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।
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बीते बृहस्पतिवार को एसडीएम ऋचा सिंह ने बड़ा खुलासा किया था जिसमें सामने आया था कि गदरपुर के चकरपुर बरखेड़ा निवासी राजन कुमार पुत्र संजय कुमार ने वर्ष 2019 में अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र लिया था जबकि बाद में उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। मामले की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने प्रमाणपत्र निरस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। गदरपुर के इस खुलासे के बाद अब धर्मांतरण की गहराई तक जाने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आने की संभावना है। प्रशासन के अनुसार, यह अकेला मामला नहीं है। जिले में ऐसे कई लोग हैं जो धर्म बदलने के बाद भी एससी श्रेणी की सुविधाएं ले रहे हैं। आने वाले दिनों में जिले में कई और प्रमाणपत्र निरस्त हो सकते हैं।
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दोहरा लाभ लेने वालों की तैयार हो रही सूची
जिला प्रशासन अब धर्म परिवर्तन के बाद भी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र का लाभ लेने वालों की जिलेभर में पहचान कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, तहसील स्तर पर पुराने प्रमाणपत्रों का सत्यापन शुरू कर दिया गया है। कई मामलों में धर्मांतरण के बाद भी सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति और आरक्षण का लाभ लेने की शिकायतें मिली हैं। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में और भी नाम सामने आ सकते हैं। संदिग्ध मामलों की अलग सूची तैयार की जा रही है।
दोहरे लाभ लेने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। आने वाले समय में जिले में बड़े स्तर पर प्रमाणपत्र निरस्त किए जा सकते हैं जिससे अपात्र लोग सरकारी योजनाओं और आरक्षण का अनुचित लाभ न ले सकें। - पंकज उपाध्याय, एडीएम