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कईं दशक बाद तराई में जीवित मिला रेड कोरल कुकरी सांप
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दिनेशपुर में मिला रेड कोरल कुकरी सांप।
- फोटो : RUDRAPUR
रुद्रपुर। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के गांव दिनेशपुर में एक व्यक्ति के घर से एक दुर्लभ प्रजाति का लाल मूंगा कुकरी सांप रेस्क्यू किया गया है। वन विभाग के मुताबिक करीब नौ दशक बाद इस इलाके में इस प्रजाति का सांप जीवित पाया गया है। अभी तक रेड कोरल (लाल मूंगा) कुकरी सांप इस इलाके में मृत ही पाए गए हैं। दुर्लभ प्रजाति के सांप को वन कर्मियों ने दिनेशपुर से रेस्क्यू करने के बाद जंगल में छोड़ दिया।
रविवार दोपहर तराई केंद्रीय वन प्रभाग की डीएफओ डॉ. अभिलाषा सिंह को सूचना मिली कि ग्राम दिनेशपुर में त्रिलोक मिस्त्री के घर में दुर्लभ प्रजाति का सांप निकला है। सांप का देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी है। सूचना पर डीएफओ ने रेंजर पंकज शर्मा के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम भेजी। टीम ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर कब्जे में लिया। रेंजर ने बताया कि सांप की लंबाई 95 सेमी है।
सांप को जंगल के सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया है। एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया कि वर्ष 1936 में इस प्रजाति का सांप पहली बार भारत में रिकॉर्ड किया गया था, जो लखीमपुर खीरी में दिखा था। तिवारी ने दावा किया केंद्रीय वन प्रभाग में करीब नौ दशक बाद इस प्रजाति का सांप जीवित मिला है।
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सांप को रेस्क्यू करने वाली टीम में वन दरोगा कांता राम, ग्रामीण राम विश्वास मौजूद रहे। लंबे समय बाद इस दुर्लभ प्रजाति के सांप का मिलना शोध का भी विषय है। मालूम हो कि दो माह पहले सात अगस्त को बिंदुखत्ता (तराई पूर्वी वन प्रभाग) में एक घर से इस सांप को जिंदा रेस्क्यू किया गया था।
रेड कोरल कुकरी सांप तराई के जंगल और आसपास के क्षेत्र में दिखाई देना अच्छा संकेत है। दुर्लभ प्रजाति के ये सांप यूपी से सटे क्षेत्रों में पाए जाते हैं। नौ दशक बाद सांप दस्तावेजों में रिकॉर्ड किया गया है। - डॉ. अभिलाषा सिंह, डीएफओ।
वैज्ञानिक वर्गीकरण
किंगडम : एनिमिया
फिलम : कॉर्डेटा
क्लास : रेप्टिलिया
फैमिली : क्लूब्राइड
उपसमूह : सर्प
जीनस : ओलिगोडॉन
प्रजातियां : खेरिएन्सिस
जूलॉजिकल नाम : ओलिगोडोन खेरिएन्सिस
1- पहली बार 1936 में खीरी रेंज में रिकॉर्ड किया गया था
2- इस रहस्यमय सांप को लेकर अभी दुनिया के लोग अंजान हैं
3- विशेषज्ञों के मुताबिक रेड कोरल कुकरी सांप जहरीले नहीं होते हैं।
4- ये सांप सिर्फ कीड़े-मकोड़े खाते हैं।
5- लाल नारंगी रंग और दांतों की वजह से रेड कोरल कुकरी नाम पड़ा
6- दिखने में ये एकदम लाल यानी इसमें मूंगे के पत्थर की तरह चमक होती है
7- इन सांपों के दांत नेपाली खुकरी के तरह होते हैं, जो अंडे तोड़ने के काम आते हैं।
8- इस सांप को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में शेड्यूल-4 का दर्जा प्राप्त है।
9- शेड्यूल-4 का मतलब एक संरक्षित प्रजाति और दुर्लभ। ै
10- 2014 में खटीमा की सुरई रेंज में मृत पाया गया था। इसके एक साल बाद पांच जिंदा सांप यहीं मिले थे।
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रविवार दोपहर तराई केंद्रीय वन प्रभाग की डीएफओ डॉ. अभिलाषा सिंह को सूचना मिली कि ग्राम दिनेशपुर में त्रिलोक मिस्त्री के घर में दुर्लभ प्रजाति का सांप निकला है। सांप का देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी है। सूचना पर डीएफओ ने रेंजर पंकज शर्मा के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम भेजी। टीम ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर कब्जे में लिया। रेंजर ने बताया कि सांप की लंबाई 95 सेमी है।
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सांप को जंगल के सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया है। एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया कि वर्ष 1936 में इस प्रजाति का सांप पहली बार भारत में रिकॉर्ड किया गया था, जो लखीमपुर खीरी में दिखा था। तिवारी ने दावा किया केंद्रीय वन प्रभाग में करीब नौ दशक बाद इस प्रजाति का सांप जीवित मिला है।
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सांप को रेस्क्यू करने वाली टीम में वन दरोगा कांता राम, ग्रामीण राम विश्वास मौजूद रहे। लंबे समय बाद इस दुर्लभ प्रजाति के सांप का मिलना शोध का भी विषय है। मालूम हो कि दो माह पहले सात अगस्त को बिंदुखत्ता (तराई पूर्वी वन प्रभाग) में एक घर से इस सांप को जिंदा रेस्क्यू किया गया था।
रेड कोरल कुकरी सांप तराई के जंगल और आसपास के क्षेत्र में दिखाई देना अच्छा संकेत है। दुर्लभ प्रजाति के ये सांप यूपी से सटे क्षेत्रों में पाए जाते हैं। नौ दशक बाद सांप दस्तावेजों में रिकॉर्ड किया गया है। - डॉ. अभिलाषा सिंह, डीएफओ।
वैज्ञानिक वर्गीकरण
किंगडम : एनिमिया
फिलम : कॉर्डेटा
क्लास : रेप्टिलिया
फैमिली : क्लूब्राइड
उपसमूह : सर्प
जीनस : ओलिगोडॉन
प्रजातियां : खेरिएन्सिस
जूलॉजिकल नाम : ओलिगोडोन खेरिएन्सिस
1- पहली बार 1936 में खीरी रेंज में रिकॉर्ड किया गया था
2- इस रहस्यमय सांप को लेकर अभी दुनिया के लोग अंजान हैं
3- विशेषज्ञों के मुताबिक रेड कोरल कुकरी सांप जहरीले नहीं होते हैं।
4- ये सांप सिर्फ कीड़े-मकोड़े खाते हैं।
5- लाल नारंगी रंग और दांतों की वजह से रेड कोरल कुकरी नाम पड़ा
6- दिखने में ये एकदम लाल यानी इसमें मूंगे के पत्थर की तरह चमक होती है
7- इन सांपों के दांत नेपाली खुकरी के तरह होते हैं, जो अंडे तोड़ने के काम आते हैं।
8- इस सांप को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में शेड्यूल-4 का दर्जा प्राप्त है।
9- शेड्यूल-4 का मतलब एक संरक्षित प्रजाति और दुर्लभ। ै
10- 2014 में खटीमा की सुरई रेंज में मृत पाया गया था। इसके एक साल बाद पांच जिंदा सांप यहीं मिले थे।