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ढिबरी की रोशनी में पढ़ पहाड़ की बेटी बनी अफसर

Thu, 05 Feb 2015 12:23 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, रुद्रपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, रुद्रपुर Updated Thu, 05 Feb 2015 12:23 AM IST
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Read in the light of the lamp was the daughter of the mountain officer

सपने को पूरा करने की जो ललक पिथौरागढ़ की हेमा बिष्ट की है, वह

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दकियानूसी विचारधारा वाले लोगों के लिए एक आइने के समान है। ढिबरी की रोशनी के बीच पढ़ाई कर आज हेमा वाणिज्यकर विभाग में डिप्टी कमिश्नर (डीसी) पद तक पहुंच पाई हैं। हंसमुख और सरल स्वभाव की हेमा बिष्ट का जीवन संघर्षों के बीच गुजरा है।

पहाड़ों में सही मार्गदर्शन मिलना थोड़ा मुश्किल भरा है और बेटियों की जल्दी शादी करने की परंपरा भी पुरानी है। लेकिन पिथौरागढ़ के देवलथल में उनके पिता शिक्षक हयात सिंह बिष्ट और माता पार्वती बिष्ट ने हेमा को हमेशा प्रेरित किया। गांवोें में व्याप्त बिजली, पानी, सड़क की समस्याओं से वे भी घिरी रहीं। हर रोज सुबह स्कूल जाने के लिए करीब छह किमी की दौड़ लगानी पड़ती थी तो स्कूल जाने से पहले और जाने के बाद दूर स्थित स्रोत से पानी भी ढोना मजबूरी था। सबसे बड़ी दिक्कत गांव में कभी भी दो घंटे से अधिक बिजली नहीं आती थी। इस कारण उन्हें हमेशा ढिबरी की रोशनी से पढ़ाई करनी पड़ती थी।

बचपन से ही पढ़ने में तेज हेमा ने कभी भी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। गांव में अधिकतर हाईस्कूल या इंटर के बाद बेटियों की शादी कर दी जाती थी। मगर उन्होंने पढ़ाई के दौरान आए रिश्तों को ठुकराते हुए अपनी मंजिल पाने के लिए संघर्ष जारी रखा। माता-पिता ने भी बेटी के हर कदम पर साथ दिया। एमएससी (बॉटनी) तक की पढ़ाई प्रथम स्थान में पूरी की। पीसीएस परीक्षा पास करने के बाद 2005 मेें बतौर असिस्टेंट कमिश्नर पद संभाला। इसके बाद 2011 में पदोन्नति के बाद वे डिप्टी कमिश्नर का पद बखूबी संभाल रही हैं। अंतर्जातीय विवाह के पक्ष में लोग नहीं रहते। मगर हेमा बिष्ट के परिवार ने अपनी बेटी की शादी (अंतर्जातीय परिवार) पंकज भट्ट (वर्तमान में एसपी विजिलेंस हल्द्वानी में तैनात) से खुशी-खुशी और दहेज रहित की। हेमा बिष्ट का कहना है कि बेटियों को समाज में अधिक संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।

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