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Udham Singh Nagar News: राइस मिलर्स ने सरकारी धान खरीद नीति का किया विरोध
Mon, 02 Oct 2023 12:57 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 02 Oct 2023 12:57 AM IST
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कच्चा आढ़ती का पंजीकरण नहीं कराने की घोषणा, नीति के खिलाफ लेंगे कोर्ट की शरण
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। शासन की ओर से जारी धान खरीद नीति का उत्तराखंड राइस मिलर्स एसोसिएशन ने विरोध किया है। उन्होंने कच्चा आढ़ती का पंजीकरण नहीं करने की घोषणा की है। चेतावनी दी है कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण ले सकते हैं।
रविवार को एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पीडी अग्रवाल ने कहा कि सरकार पर राइस मिलर्स का 300 करोड़ बकाया है। मिलर्स काफी समय से भुगतान की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है। नई खरीद नीति में सरकार ने मिलर्स के सुझावों को दरकिनार कर दिया है।
कहा कि दो साल पहले यह व्यवस्था थी कि धान खरीद के 15 दिन बाद विभाग की ओर से मिलर्स को धान खरीद का भुगतान किया जाता था लेकिन अब धान कुटाई के बाद चावल को गोदाम में पहुंचाने के बाद भुगतान की व्यवस्था की गई है जो गलत है।
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कहा कि जब तक बकाया भुगतान और भुगतान की पुरानी व्यवस्था लागू नहीं होती है तब तक वे कच्चा आढ़ती का पंजीकरण नहीं कराएंगे। उन्होंने मामले में कोर्ट की शरण लेने की बात कही।
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मिलर्स के उत्पीड़न का आरोप
पीडी अग्रवाल ने कहा कि भारतीय खाद्य निगम ने चावल के 66 चट्टे की गुणवत्ता खराब होने पर मिलर्स का भुगतान रोक दिया है। इसमें मिलर्स का कोई दोष नहीं है। उन्होंने भुगतान रोककर मिलर्स का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। कहा कि जब तक बीते साल के सभी धान का भुगतान नहीं होगा तब तक मिलर्स सरकारी कार्य करने में असमर्थ हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। शासन की ओर से जारी धान खरीद नीति का उत्तराखंड राइस मिलर्स एसोसिएशन ने विरोध किया है। उन्होंने कच्चा आढ़ती का पंजीकरण नहीं करने की घोषणा की है। चेतावनी दी है कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण ले सकते हैं।
रविवार को एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पीडी अग्रवाल ने कहा कि सरकार पर राइस मिलर्स का 300 करोड़ बकाया है। मिलर्स काफी समय से भुगतान की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है। नई खरीद नीति में सरकार ने मिलर्स के सुझावों को दरकिनार कर दिया है।
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कहा कि दो साल पहले यह व्यवस्था थी कि धान खरीद के 15 दिन बाद विभाग की ओर से मिलर्स को धान खरीद का भुगतान किया जाता था लेकिन अब धान कुटाई के बाद चावल को गोदाम में पहुंचाने के बाद भुगतान की व्यवस्था की गई है जो गलत है।
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कहा कि जब तक बकाया भुगतान और भुगतान की पुरानी व्यवस्था लागू नहीं होती है तब तक वे कच्चा आढ़ती का पंजीकरण नहीं कराएंगे। उन्होंने मामले में कोर्ट की शरण लेने की बात कही।
मिलर्स के उत्पीड़न का आरोप
पीडी अग्रवाल ने कहा कि भारतीय खाद्य निगम ने चावल के 66 चट्टे की गुणवत्ता खराब होने पर मिलर्स का भुगतान रोक दिया है। इसमें मिलर्स का कोई दोष नहीं है। उन्होंने भुगतान रोककर मिलर्स का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। कहा कि जब तक बीते साल के सभी धान का भुगतान नहीं होगा तब तक मिलर्स सरकारी कार्य करने में असमर्थ हैं।