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निजी स्कूलों को टक्कर दे रही प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका

Mon, 05 Sep 2016 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर Updated Mon, 05 Sep 2016 12:25 AM IST
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Primary school teacher is giving a tough competition to private schools
बबिता गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

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सरकारी स्कूलोें से बेरुखी की एक बड़ी वजह अंग्रेजी से दूरी है। मगर राजकीय प्राथमिक विद्यालय हिम्मतपुर में तैनात शिक्षिका बबीता गुप्ता अपने तौर-तरीकों से आसपास के निजी स्कूलों को टक्कर दे रही हैं। उन्होंने सरकारी स्कूल में निर्धारित पाठ्यक्रम को पढ़ाने के अलावा बच्चों को अंग्रेजी भाषा से भी कुछ ऐसे रूबरू कराया है कि बच्चे सामान्य बोलचाल की अंग्रेजी बगैर शर्माये बोलने लगे हैं।यह शिक्षिका बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए कई अनूठे प्रयोग भी कर रही हैं।


वह मानती हैं कि सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं। प्रतियोगिता के दौर में उन्हें भी दूसरों के समकक्ष खड़ा करने को वह अंग्रेजी पर विशेष जोर दे रही हैं। प्राइवेट स्कूलों की तरह उनके स्कूल के बच्चे अंग्रेजी में सामान्य सवालों के जवाब देते हैं। अंग्रेजी में याद की गई कविताएं धारा प्रवाह में सुनाते हैं। बच्चे कक्षाओं में अंग्रेजी में बातचीत और सवालों के जवाब तो देते ही हैं। घर में भी अभिभावकों से अंग्रेजी में बात करने की कोशिश करते हैं।
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बच्चे अंग्रेजी को बोझ न समझें, इसके लिए बबीता पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए तरह-तरह के मॉडलों के अलावा कठपुतली का इस्तेमाल भी करने लगी हैं। फरवरी में उन्होंने शिक्षिका डा. ज्योति गांधी से कठपुतली बनाकर बच्चों को पढ़ाने के तरीके सीखे। उन्होंने कुछ कठपुतलियां भी बनाई हैं, जिनका प्रयोग वे अंग्रेजी सिखाने के लिए करती हैं।
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इस स्कूल में अन्य स्कूलों की तरह बच्चों को एबीसीडी तो सिखाई जाती है, मगर ए फॉर एप्पल की बजाय ए फॉर अमूल, बी फॉर बटर, सी फॉर क्रेक्स, आर फॉर राइस पढ़ाया जाता है। स्कूल की बेहतर पढ़ाई का ही असर है कि स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ रही है। आसपास के निजी स्कूलों को छोड़कर बच्चे भी दाखिला लेने आते हैं। वर्तमान में बच्चों की संख्या 210 हो गई है। दो साल पहले तत्कालीन एसडीएम आशीष श्रीवास्तव ने बच्चों के पढ़ाई के स्तर से खुश होकर 50 बेंच व कुर्सियां दी थीं।

 
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