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Udham Singh Nagar News: मानव आपूर्ति के लिए आमंत्रित की गई निविदा दस्तावेज में संशोधन से विवाद
Thu, 12 Jun 2025 01:18 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 12 Jun 2025 01:18 AM IST
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काशीपुर। नगर पंचायत गढ़ीनेगी की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत मानव आपूर्ति के लिए आमंत्रित की गई निविदा दस्तावेज में संशोधन से विवाद खड़ा हो गया है। ठेकेदार कंपनियों ने पंचायत प्रशासक को ज्ञापन सौंपकर पहले आमंत्रित निविदा की शर्तों के अनुसार ही नई निविदा प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
ठेकेदार रवि कुमार और अन्य ने बीते दिन प्रशासक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में नगर पंचायत गढ़ीनेगी ने मानव आपूर्ति के लिए निविदा आमंत्रित की थी जिसकी नियत तिथि 20 मई रखी थी। निर्धारित समय पर किसी भी फर्म के निविदा में भाग न लेने के कारण इसे दोबारा मई माह में आमंत्रित किया गया। इसमें ठेकेदार कंपनियों ने 31 मई को प्रतिभाग किया। आरोप लगाया कि पहले निविदा दस्तावेज में शर्त संख्या 13 और 23 का उल्लेख नहीं था लेकिन बाद में इन्हें जोड़ते हुए नई शर्तों के तहत एनएसआईसी पंजीकरण और पिछले तीन वर्षों का ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया।
उनका कहना है कि यह बदलाव एक विशेष व्यक्ति या संस्था को लाभ पहुंचाने की मंशा से किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि तीन वर्ष का ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्य शर्त रखी जाती है, तो बहुत सी योग्य संस्थाएं इस निविदा से बाहर हो जाएंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा की गुंजाइश कम हो जाएगी और नगर पंचायत को आर्थिक क्षति हो सकती है। उन्होंने पहले आमंत्रित निविदा की शर्तों के अनुसार ही नई निविदा प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। ताकि सभी इच्छुक फर्मों को समान अवसर मिल सकें और पारदर्शिता बनी रहे। ब्यूरो
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ठेकेदार रवि कुमार और अन्य ने बीते दिन प्रशासक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में नगर पंचायत गढ़ीनेगी ने मानव आपूर्ति के लिए निविदा आमंत्रित की थी जिसकी नियत तिथि 20 मई रखी थी। निर्धारित समय पर किसी भी फर्म के निविदा में भाग न लेने के कारण इसे दोबारा मई माह में आमंत्रित किया गया। इसमें ठेकेदार कंपनियों ने 31 मई को प्रतिभाग किया। आरोप लगाया कि पहले निविदा दस्तावेज में शर्त संख्या 13 और 23 का उल्लेख नहीं था लेकिन बाद में इन्हें जोड़ते हुए नई शर्तों के तहत एनएसआईसी पंजीकरण और पिछले तीन वर्षों का ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया।
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उनका कहना है कि यह बदलाव एक विशेष व्यक्ति या संस्था को लाभ पहुंचाने की मंशा से किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि तीन वर्ष का ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्य शर्त रखी जाती है, तो बहुत सी योग्य संस्थाएं इस निविदा से बाहर हो जाएंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा की गुंजाइश कम हो जाएगी और नगर पंचायत को आर्थिक क्षति हो सकती है। उन्होंने पहले आमंत्रित निविदा की शर्तों के अनुसार ही नई निविदा प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। ताकि सभी इच्छुक फर्मों को समान अवसर मिल सकें और पारदर्शिता बनी रहे। ब्यूरो
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