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एसएसपी की तानाशाही के खिलाफ एकजुट हुए पत्रकार
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
Updated Sat, 17 Sep 2016 12:07 AM IST
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अमर उजाला में ‘फिजा बिगाड़ने की कोशिश नाकाम’ शीर्षक से प्रकाशित खबर पर एसएसपी द्वारा पत्रकारों के साथ अभद्रता करने और धमकी देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गुस्साए पत्रकारों ने शुक्रवार को एसएसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने के बाद डीएम के माध्यम से डीजीपी को ज्ञापन प्रेषित किया।
बीते 14 सितंबर को रुद्रपुर में अमर उजाला कार्यालय के निकट स्थित गुरुद्वारा के प्रवेश गेट पर कुछ असामाजिक तत्व एक जानवर का कटा सिर फेंक गए थे। इसकी सूचना स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जानवर के कटे सिर को कब्जे में लेकर उसे नष्ट करा दिया। इसके बाद अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर फिजा को खराब करने वाले लोगों को चेताया था। लेकिन एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले ने बिना खबर का मूल्यांकन किए अमर उजाला के पत्रकार पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए उसे नौकरी से निकालने, अखबार को बंद करवाने और मुकदमा लिखने की धमकी दे डाली।
इससे गुस्साए पत्रकारों ने शुक्रवार को एसएसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने के बाद डीएम के माध्यम से डीजीपी को ज्ञापन भेजा। पत्रकारों का कहना है कि खबर में अफवाह फैलाने जैसी कोई बात नहीं होने के बाद भी एसएसपी ने अपने पद का रौब दिखाते हुए जहां पत्रकार को नौकरी से निकालने और मुकदमा लिखने की धमकी दी वहीं प्रतिष्ठित समाचार पत्र को बंद करवाने की चेतावनी तक दे डाली।
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पत्रकारों ने आरोप लगाया कि 17 जून 2016 को पंतनगर सिडकुल की सोना तराशने वाली एक फैक्ट्री से 17 किलो सोने के गबन के मामले में भी ताकवाले ने अमर उजाला के साथ ही अन्य अखबारों और चैनलों के प्रतिनिधियों को धमकाया था। डीजीपी को भेजे ज्ञापन में पत्रकारों ने एसएसपी की तानाशाही पर रोक लगाकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
इस दौरान पत्रकार कंचन वर्मा, अजय जोशी, फणींद्रनाथ गुप्ता, पूरन रावत, भरत शाह, सुरेंद्र तनेजा, मनीश पांडे, विनोद भंडारी, नरोत्तम दूबे, अंबार खान, संदीप जुनेजा, अमित गुंबर, विजय विरमानी, नादिर खां, गगनदीप सिंह, जगदीश चंद्र, हरवीर सिंह, ललित पांडे, मुकेश गुप्ता, गोपाल भारती, शोएब खां, अनुराग पाल, डीके शर्मा, विजय अरोरा, सूरज सिंह, देवेंद्र शर्मा, रजत श्रीवास्तव, महेंद्र पाल, दीपक कुकरेजा, ललित शर्मा, मनीश आर्या आदि पत्रकार मौजूद थे।
विधायक राजकुमार ठुकराल ने मामले की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को पत्रकारों का उत्पीड़न करने और धमकी देने का कोई अधिकार नहीं है। एसएसपी को अगर खबर को लेकर किसी तरह की दिक्कत थी तो उन्हें प्रबंधन के आगे अपनी बात रखनी थी। ताकवाले द्वारा इस तरह से पत्रकार को दबाव में लेकर धमकी देना बेहद शर्मनाक है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ का कहना है कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले एसएसपी को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। आज जिले में सारे काले काम पुलिस अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहे हैं। कप्तान को जिले में ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारी पसंद नहीं है। इसलिए वह ईमानदार अधिकारियों के तबादले कर रहे हैं।
ईमानदार सीओ राजेश भट्ट का तबादला करना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बेहड़ का यह भी कहना है कि कप्तान द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की फाइल उन्होंने डीजीपी के साथ ही मुख्यमंत्री को भी सौंपी है। जल्द ही वह मीडिया के सामने भी इसका खुलासा करेंगे।
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बीते 14 सितंबर को रुद्रपुर में अमर उजाला कार्यालय के निकट स्थित गुरुद्वारा के प्रवेश गेट पर कुछ असामाजिक तत्व एक जानवर का कटा सिर फेंक गए थे। इसकी सूचना स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जानवर के कटे सिर को कब्जे में लेकर उसे नष्ट करा दिया। इसके बाद अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर फिजा को खराब करने वाले लोगों को चेताया था। लेकिन एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले ने बिना खबर का मूल्यांकन किए अमर उजाला के पत्रकार पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए उसे नौकरी से निकालने, अखबार को बंद करवाने और मुकदमा लिखने की धमकी दे डाली।
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इससे गुस्साए पत्रकारों ने शुक्रवार को एसएसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने के बाद डीएम के माध्यम से डीजीपी को ज्ञापन भेजा। पत्रकारों का कहना है कि खबर में अफवाह फैलाने जैसी कोई बात नहीं होने के बाद भी एसएसपी ने अपने पद का रौब दिखाते हुए जहां पत्रकार को नौकरी से निकालने और मुकदमा लिखने की धमकी दी वहीं प्रतिष्ठित समाचार पत्र को बंद करवाने की चेतावनी तक दे डाली।
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पत्रकारों ने आरोप लगाया कि 17 जून 2016 को पंतनगर सिडकुल की सोना तराशने वाली एक फैक्ट्री से 17 किलो सोने के गबन के मामले में भी ताकवाले ने अमर उजाला के साथ ही अन्य अखबारों और चैनलों के प्रतिनिधियों को धमकाया था। डीजीपी को भेजे ज्ञापन में पत्रकारों ने एसएसपी की तानाशाही पर रोक लगाकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
इस दौरान पत्रकार कंचन वर्मा, अजय जोशी, फणींद्रनाथ गुप्ता, पूरन रावत, भरत शाह, सुरेंद्र तनेजा, मनीश पांडे, विनोद भंडारी, नरोत्तम दूबे, अंबार खान, संदीप जुनेजा, अमित गुंबर, विजय विरमानी, नादिर खां, गगनदीप सिंह, जगदीश चंद्र, हरवीर सिंह, ललित पांडे, मुकेश गुप्ता, गोपाल भारती, शोएब खां, अनुराग पाल, डीके शर्मा, विजय अरोरा, सूरज सिंह, देवेंद्र शर्मा, रजत श्रीवास्तव, महेंद्र पाल, दीपक कुकरेजा, ललित शर्मा, मनीश आर्या आदि पत्रकार मौजूद थे।
विधायक राजकुमार ठुकराल ने मामले की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को पत्रकारों का उत्पीड़न करने और धमकी देने का कोई अधिकार नहीं है। एसएसपी को अगर खबर को लेकर किसी तरह की दिक्कत थी तो उन्हें प्रबंधन के आगे अपनी बात रखनी थी। ताकवाले द्वारा इस तरह से पत्रकार को दबाव में लेकर धमकी देना बेहद शर्मनाक है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ का कहना है कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले एसएसपी को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। आज जिले में सारे काले काम पुलिस अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहे हैं। कप्तान को जिले में ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारी पसंद नहीं है। इसलिए वह ईमानदार अधिकारियों के तबादले कर रहे हैं।
ईमानदार सीओ राजेश भट्ट का तबादला करना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बेहड़ का यह भी कहना है कि कप्तान द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की फाइल उन्होंने डीजीपी के साथ ही मुख्यमंत्री को भी सौंपी है। जल्द ही वह मीडिया के सामने भी इसका खुलासा करेंगे।