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Udham Singh Nagar News: पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का प्रयोग सफल, आई बड़ी खुशखबरी
Sun, 17 Sep 2023 12:55 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sun, 17 Sep 2023 12:55 AM IST
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पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विभिन्न दलहनों की सात नई प्रजातियां विकसित कीं हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये प्रजातियां 12 से 22 प्रतिशत तक अधिक देंगी और ये विभिन्न रोगों, कीटों के लिए अवरोधी हैं।
वैज्ञानिकों जिन सात प्रजातियों को विकसित किया है उनमें मटर की चार, मसूर की दो और चने की एक प्रजाति शामिल है। दावा किया जा रहा है कि ये नई प्रजातियां देश में दलहन की जरूरतों को पूरा करेंगी।
दालों के उत्पादन पर बारिश का पड़ा है बुरा असर
लगातार बारिश से दलहनों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। देश में बढ़ते उत्पादन से प्रति व्यक्ति दलहन उपलब्धता बढ़ी है। इनकी कीमतें भी स्थिर रहीं हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक तीन सौ बीस लाख टन दलहन प्रतिवर्ष उत्पादन का लक्ष्य रखा है लेकिन वर्ष 2022-23 के खरीफ सीजन में दलहनों के बुवाई का रकबा घटा है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
प्रजातियों को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों डॉ. आरके पंवार, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. अंजू अरोरा सहित परियोजना के सभी कर्मियों को बधाई। ये प्रजातियां छोटे किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगी। खाद्यान्न सुरक्षा सहित पोषण सुरक्षा में भी अहम योगदान देंगी।
- डॉ. एमएस चौहान, कुलपति, पंतनगर विवि
आगामी सीजन में इन नई प्रजातियों के बीज किसानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएंगे। - डॉ. एएस नैन, शोध निदेशक
विकसित की गईं नई प्रजातियां
पंत मटर-484 :
यह दलहनी मटर की बौनी प्रजाति है। इसका देश के उत्तरी पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में लगातार तीन वर्षों तक उपज परीक्षण किया गया। इनमें पंत मटर-484 की औसत उपज 2,333 किलो/हेक्टेयर और सबसे अच्छी मानक प्रजाति पंत मटर-250 से 21.64 प्रतिशत अधिक रही।
पंत मटर-497, पंत मटर-498, पंत मटर-501 : यह दलहनी मटर की लंबी प्रजातियां हैं। देश के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में इनका तीन वर्षों तक उपज परीक्षण किया गया। इनमें पंत मटर-497, पंत मटर-498, पंत मटर-501 की औसत उपज क्रमशः 1,966 किलो/हेक्टेयर, 2,050 किलो/हेक्टेयर, 2,140 किलो/हेक्टेयर, सबसे अच्छी मानक प्रजाति पंत मटर-42 से क्रमशः 12.15, 16.94, 22.08 प्रतिशत अधिक रही।
पंत मसूर-14 और पंत मसूर-15 : यह मसूर की छोटे दाने वाली प्रजातियां हैं। देश के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में लगातार तीन वर्षों तक इनका उपज परीक्षण किया गया। इसमें पंत मसूर-14, पंत मसूर-15 की औसत उपज क्रमशः 1,555 किलो/हेक्टेयर, 1,559 किलो/हेक्टेयर और सबसे अच्छी मानक प्रजाति पंत मसूर-8 की उपज से क्रमश: 15.27, 15.57 प्रतिशत अधिक रही। यह दोनों प्रजातियां रस्ट और स्टेम्फिलियम ब्लाइट रोगों के लिए प्रतिरोधी, एस्कोकाइटा ब्लाइट, रस्ट रोगों सहित माहू और फली छेदक कीटों के लिए मध्यम प्रतिरोधी है।
पंत चना-10 : यह चने की देशी प्रजाति है। देश के उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में लगातार तीन वर्षों तक उपज परीक्षण किए गए। इनमें पंत चना-10 की औसत उपज 1,779 किग्रा/हेक्टेयर और सबसे अच्छी मानक प्रजाति केपीजी-59 से 11.32 प्रतिशत अधिक रही। यह प्रजाति विल्ट, कॉलर रॉट, स्टंट रोगों सहित फली छेदक कीटों के लिए मध्यम प्रतिरोधी है। 130 दिन परिपक्वता अवधि वाली इस प्रजाति में प्रोटीन की मात्रा 17.67 प्रतिशत और 100 दानों का वजन करीब 24.6 ग्राम है।
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वैज्ञानिकों जिन सात प्रजातियों को विकसित किया है उनमें मटर की चार, मसूर की दो और चने की एक प्रजाति शामिल है। दावा किया जा रहा है कि ये नई प्रजातियां देश में दलहन की जरूरतों को पूरा करेंगी।
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दालों के उत्पादन पर बारिश का पड़ा है बुरा असर
लगातार बारिश से दलहनों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। देश में बढ़ते उत्पादन से प्रति व्यक्ति दलहन उपलब्धता बढ़ी है। इनकी कीमतें भी स्थिर रहीं हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक तीन सौ बीस लाख टन दलहन प्रतिवर्ष उत्पादन का लक्ष्य रखा है लेकिन वर्ष 2022-23 के खरीफ सीजन में दलहनों के बुवाई का रकबा घटा है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
प्रजातियों को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों डॉ. आरके पंवार, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. अंजू अरोरा सहित परियोजना के सभी कर्मियों को बधाई। ये प्रजातियां छोटे किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगी। खाद्यान्न सुरक्षा सहित पोषण सुरक्षा में भी अहम योगदान देंगी।
- डॉ. एमएस चौहान, कुलपति, पंतनगर विवि
आगामी सीजन में इन नई प्रजातियों के बीज किसानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएंगे। - डॉ. एएस नैन, शोध निदेशक
विकसित की गईं नई प्रजातियां
पंत मटर-484 :
यह दलहनी मटर की बौनी प्रजाति है। इसका देश के उत्तरी पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में लगातार तीन वर्षों तक उपज परीक्षण किया गया। इनमें पंत मटर-484 की औसत उपज 2,333 किलो/हेक्टेयर और सबसे अच्छी मानक प्रजाति पंत मटर-250 से 21.64 प्रतिशत अधिक रही।
पंत मटर-497, पंत मटर-498, पंत मटर-501 : यह दलहनी मटर की लंबी प्रजातियां हैं। देश के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में इनका तीन वर्षों तक उपज परीक्षण किया गया। इनमें पंत मटर-497, पंत मटर-498, पंत मटर-501 की औसत उपज क्रमशः 1,966 किलो/हेक्टेयर, 2,050 किलो/हेक्टेयर, 2,140 किलो/हेक्टेयर, सबसे अच्छी मानक प्रजाति पंत मटर-42 से क्रमशः 12.15, 16.94, 22.08 प्रतिशत अधिक रही।
पंत मसूर-14 और पंत मसूर-15 : यह मसूर की छोटे दाने वाली प्रजातियां हैं। देश के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में लगातार तीन वर्षों तक इनका उपज परीक्षण किया गया। इसमें पंत मसूर-14, पंत मसूर-15 की औसत उपज क्रमशः 1,555 किलो/हेक्टेयर, 1,559 किलो/हेक्टेयर और सबसे अच्छी मानक प्रजाति पंत मसूर-8 की उपज से क्रमश: 15.27, 15.57 प्रतिशत अधिक रही। यह दोनों प्रजातियां रस्ट और स्टेम्फिलियम ब्लाइट रोगों के लिए प्रतिरोधी, एस्कोकाइटा ब्लाइट, रस्ट रोगों सहित माहू और फली छेदक कीटों के लिए मध्यम प्रतिरोधी है।
पंत चना-10 : यह चने की देशी प्रजाति है। देश के उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में लगातार तीन वर्षों तक उपज परीक्षण किए गए। इनमें पंत चना-10 की औसत उपज 1,779 किग्रा/हेक्टेयर और सबसे अच्छी मानक प्रजाति केपीजी-59 से 11.32 प्रतिशत अधिक रही। यह प्रजाति विल्ट, कॉलर रॉट, स्टंट रोगों सहित फली छेदक कीटों के लिए मध्यम प्रतिरोधी है। 130 दिन परिपक्वता अवधि वाली इस प्रजाति में प्रोटीन की मात्रा 17.67 प्रतिशत और 100 दानों का वजन करीब 24.6 ग्राम है।