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Udham Singh Nagar News: पंत विवि किसानों को दिखा रहा उद्यमिता की राह
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पंतनगर। रीप-आईएफएडी उद्यमिता विकास परियोजना के तहत उत्तराखंड ग्राम्य विकास विभाग की ओ से चयनित किसानों को जीबी पंत कृषि व प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रशिक्षण देकर उद्यमी बनाना है। इसी क्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित 30 किसानों (24 महिलाएं और छह पुरुष) को 8-14 दिसंबर तक दुग्ध प्रोसेसिंग पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
परियोजनाधिकारी डाॅ. अजित सिंह नैन ने बताया कि रीप परियोजना के तहत ग्राम्य विकास विभाग के उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति (यूजीवीएस) की ओर से पंत विवि को एक परियोजना मिली है। इसके तहत वह उत्तराखंड के प्रत्येक जिले और ब्लाॅक से चयनित किसानों को रूरल इंटरप्राइज डेवलेपमेंट का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
इसमें फारल डेवलेपमेंट और नर्सरी प्रबंधन पर लगभग सौ किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस समय दुग्ध प्रोसेसिंग पर प्रशिक्षण चल रहा है। इससे संबंधित आवश्यक विभिन्न मशीनरी और जो भी उत्पाद वह बना सकते हैं उसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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बताया कि परियोजना के तहत एक हजार से अधिक ऐसे किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा जो इंटरप्राइज डेवलप कर खुद को स्टार्टअप के रूप में स्थापित कर सकते हैं। साथ ही विभाग के अधिकारियों को भी मास्टर ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वह आगे किसानों को प्रशिक्षित कर सकें।
फोटो 13- किसानों को प्रशिक्षण देते डाॅ. अजित सिंह नैन और डाॅ. अनिल कुमार।
-इंसेट--
प्रतिभागियों को दूध से छेना, रसमलाई, पनीर और आइसक्रीम आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही एलपीटी विभाग में उन्हें मंडुवे की बर्फी और पेड़े आदि बनाना सिखाया जा रहा है।
-वेटरिनरी में एलपीएम के प्राध्यापक और प्रशिक्षक डाॅ. अनिल कुमार
फोटो 14-डाॅ. अनिल कुमार।
-इंसेट--
-अभी तक दूध आंचल डेरी में भेजती थी जिसका भुगतान देर-सबेर मिलता था। प्रशिक्षण में पता चला कि मंडुवे और दूध से कई प्रकार के उत्पाद बनाकर बाजार में बेचने से आय भी अधिक होगी और पैसे भी नकद मिलेंगे।
-रीना देवी, किसान सितारगंज
फोटो 15- रीना देवी।
-इंसेट--
रीप अधिकारियों का धन्यवाद, जिन्होंने पंत विवि में आने का मौका दिया। गांव में मंडुवा जानवरों को खिला देते हैं। यहां आकर सीखा कि इससे बर्फी, पेड़े, आइसक्रीम और चाॅकलेट भी बनाई जा सकती है। वापस लौटकर यह सभी चीजें बनाकर काम को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगी।
विनीता, चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी
फोटो 16- विनीता़।
-इंसेट--
-रोजाना दो सौ लीटर दूध बिना प्रशिक्षण बेच रहा था। पंतनगर आकर बहुत कुछ सीखा जिससे आगे अपना व्यवसाय बढ़ाने में मदद मिलेगी। भविष्य में दूध की प्रोसेसिंग करके ही बाजार में बेचूंगा।
हरेंद्र सिंह, यमकेश्वर
फोटो 17- हरेंद्र सिंह।
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परियोजनाधिकारी डाॅ. अजित सिंह नैन ने बताया कि रीप परियोजना के तहत ग्राम्य विकास विभाग के उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति (यूजीवीएस) की ओर से पंत विवि को एक परियोजना मिली है। इसके तहत वह उत्तराखंड के प्रत्येक जिले और ब्लाॅक से चयनित किसानों को रूरल इंटरप्राइज डेवलेपमेंट का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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इसमें फारल डेवलेपमेंट और नर्सरी प्रबंधन पर लगभग सौ किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस समय दुग्ध प्रोसेसिंग पर प्रशिक्षण चल रहा है। इससे संबंधित आवश्यक विभिन्न मशीनरी और जो भी उत्पाद वह बना सकते हैं उसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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बताया कि परियोजना के तहत एक हजार से अधिक ऐसे किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा जो इंटरप्राइज डेवलप कर खुद को स्टार्टअप के रूप में स्थापित कर सकते हैं। साथ ही विभाग के अधिकारियों को भी मास्टर ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वह आगे किसानों को प्रशिक्षित कर सकें।
फोटो 13- किसानों को प्रशिक्षण देते डाॅ. अजित सिंह नैन और डाॅ. अनिल कुमार।
-इंसेट
प्रतिभागियों को दूध से छेना, रसमलाई, पनीर और आइसक्रीम आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही एलपीटी विभाग में उन्हें मंडुवे की बर्फी और पेड़े आदि बनाना सिखाया जा रहा है।
-वेटरिनरी में एलपीएम के प्राध्यापक और प्रशिक्षक डाॅ. अनिल कुमार
फोटो 14-डाॅ. अनिल कुमार।
-इंसेट
-अभी तक दूध आंचल डेरी में भेजती थी जिसका भुगतान देर-सबेर मिलता था। प्रशिक्षण में पता चला कि मंडुवे और दूध से कई प्रकार के उत्पाद बनाकर बाजार में बेचने से आय भी अधिक होगी और पैसे भी नकद मिलेंगे।
-रीना देवी, किसान सितारगंज
फोटो 15- रीना देवी।
-इंसेट
रीप अधिकारियों का धन्यवाद, जिन्होंने पंत विवि में आने का मौका दिया। गांव में मंडुवा जानवरों को खिला देते हैं। यहां आकर सीखा कि इससे बर्फी, पेड़े, आइसक्रीम और चाॅकलेट भी बनाई जा सकती है। वापस लौटकर यह सभी चीजें बनाकर काम को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगी।
विनीता, चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी
फोटो 16- विनीता़।
-इंसेट
-रोजाना दो सौ लीटर दूध बिना प्रशिक्षण बेच रहा था। पंतनगर आकर बहुत कुछ सीखा जिससे आगे अपना व्यवसाय बढ़ाने में मदद मिलेगी। भविष्य में दूध की प्रोसेसिंग करके ही बाजार में बेचूंगा।
हरेंद्र सिंह, यमकेश्वर
फोटो 17- हरेंद्र सिंह।