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नए उद्यमियों के लिए सिडकुल ने खोले द्वार
ब्यूूराे, अमर उजाला, रुद्रपुर।
Updated Wed, 05 Aug 2015 01:47 AM IST
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सिडकुल पंतनगर में 12 से अधिक बड़ी फैक्ट्रियों के बंद होने से छोटे उद्यमियों के लिए उद्योग स्थापित करने के रास्ते खुलते नजर आ रहे हैं।
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फैक्ट्रियों के पलायन से खाली पड़ी जमीन को लघु उद्यमियों को देने के लिए राज्य सरकार और सिडकुल प्रशासन दरियादिली दिखाएगा। इसकी तैयारी शुरू हो गई है।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत की पहल से कुमाऊं के हजारों युवा बेरोजगारों के सामने आजीविका का संकट खत्म होने की संभावना है।
पिछले दो साल से मंदी के दौर से गुजर रहा सिडकुल पंतनगर जो कि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था, वह लड़खड़ाने की स्थिति में आ गया था।
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अब उसे और मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत आगे आए हैं। सरकार ने बंद फैक्ट्रियों की भूमि पर अब नए उद्योगों को स्थापित करने की ठान ली है।
इससे जहां कमजोर सिडकुल की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी, वहीं छोटे उद्यमियों को आगे बढ़ने का रास्ता मिलेगा। साथ ही हजारों की संख्या में आसपास के युवा बेरोजगारों के हाथों को भी काम मिलेगा।
सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक जीपी दुर्गापाल ने बताया कि बंद फैक्ट्रियों की भूमि पर जो छोटे उद्योग आना चाहते हैं, राज्य सरकार ने उनके लिए द्वार खोल दिए हैं। ऐसे उद्यमियों को सिडकुल प्रशासन हरसंभव मदद करेगा। उन्होंने माना कि इससे कुमाऊं के युवा बेरोजगारों को काम मिलेगा और उन्हें बाहरी प्रांतों में रोजगार की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा।
सिडकुल प्रशासन के अनुसार अगर सिडकुल में बंद एचसीएल वापस आती है तो करीब 800 लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं सिडकुल की भी रौनक बढ़ेगी।
क्षेत्रीय प्रबंधक दुर्गापाल के अनुसार एचसीएल करीब 18 एकड़ से अधिक भूमि पर स्थापित है, वर्तमान में एचसीएल प्लांट ठप है, लेकिन उसके वापस आने की संभावनाएं बन रही हैं, इसलिए अभी एचसीएल से भूमि वापस नहीं ली जा रही है। सिडकुल प्रशासन एचसीएल के वापस आने के इंतजार में है।
सिडकुल प्रशासन ने मेगा इंडस्ट्रीयल एंड इनवेस्टमेंट पॉलिसी 2015 प्रस्तावित की है। इस नीति के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा चिन्हित औद्योगिक क्षेत्र आच्छादित होंगे।
इस नीति के तहत एकल उद्योग, मिश्रित उद्योग और हास्पिटल जैसे उद्यमियों को भूमि आवंटन सिडकुल द्वारा भारी छूट पर किया जाएगा।
आरएम सिडकुल जीपी दुर्गापाल ने बताया कि बड़े उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए जो कि 500 करोड़ और उससे अधिक का निवेश कर सकते हैं, उन्हें भूमि आवंटन में छूट दी जाएगी।
लार्ज प्रोजेक्ट को जमीन पर 15 प्रतिशत की छूटी दी जाएगी जबकि मेगा प्रोजेक्ट को 25 प्रतिशत और अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट को 30 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।