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एक करोड़ 60 लाख रुपये में लिया गया था वसूली का ठेका
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
Updated Tue, 04 Oct 2016 11:23 PM IST
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ऊधमसिंह नगर जिले में जिला पंचायत विभाग ने बरेली के जिस ठेकेदार को एक करोड़ 60 लाख रुपये में तीन साल के लिए वसूली का ठेका दिया है उसे पता ही नहीं कि जिले में कहां-कहां वसूली हो रही है। गदरपुर क्षेत्र में विगत दिवस ठेकेदार के लोगों ने जिस ट्रक चालक के साथ मारपीट की थी और उसके ट्रक को लूटकर ले गए, उसमें भी एक नई कहानी सड़क दुर्घटना की गढ़ दी गई है। ठेकेदार का कहना है कि उक्त ट्रक चालक बैरियर पर एक व्यक्ति के ऊपर ट्रक चढ़ाकर उसे घायल करके भाग रहा था। जबकि पुलिस की पूरी पड़ताल में कहीं भी सड़क दुर्घटना का जिक्र ही नहीं है। वहीं वह कौन व्यक्ति है, जिसको कुचलकर ट्रक चालक भाग रहा था यह भी स्पष्ट नहीं बता पाए।
जिले में जगह-जगह बैरियर लगाकर वसूली के काम में लिप्त लोगों को यह भी नहीं पता कि टोल बैरियर पर गाड़ियों से किस तरह से शुल्क वसूला जाना है। उसके क्या मानक हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों का भी मानना है कि विभाग ने किस नियमावली के अनुसार वसूली के टेंडर किए हैं यह तो पूरे प्रदेश की नीति के तहत ही किए गए होंगे, लेकिन वर्तमान में जिला पंचायत के नाम पर वसूली का सबसे ज्यादा खेल ऊधमसिंह नगर जिले में चल रहा है।
यूपी से उत्तराखंड में प्रवेश की बात की जाए तो सहारनपुर से देहरादून में प्रवेश के लिए सेल्स टैक्स के बैरियर लगे हैं, साथ ही पुलिस का बैरियर है, इसमें जिला पंचायत का कोई बैरियर नहीं है। मुजफ्फरनगर से जब रुड़की में उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश किया जाता है तो यहां पर भी सेल्स टैक्स पुलिस आदि का ही बैरियर होता है। इस बारे में जिला पंचायत के ठेकेदार बरेली निवासी शशांक चॉडक का कहना है कि इस काम में उन्होंने हाथ तो डाला है, लेकिन जब से यह वसूली का ठेका लिया है इसमें सिर्फ घाटे का ही सौदा हुआ है और बार-बार यह मामला विवादित भी रहा है।
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उन्होंने कहा कि जिले में दो-चार चुनिंदा जगहों पर जिला पंचायत के टेंडर के मुताबिक शुल्क लिया जाता है बाकी अन्य कहां-कहां शुल्क वसूली हो रही है इसकी उन्हें खुद ही सटीक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह ठेका अब समाप्ति की ओर है। एक अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2017 तक ठेका की वैधता है।
जिले में जगह-जगह बैरियर लगाकर वसूली के काम में लिप्त लोगों को यह भी नहीं पता कि टोल बैरियर पर गाड़ियों से किस तरह से शुल्क वसूला जाना है। उसके क्या मानक हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों का भी मानना है कि विभाग ने किस नियमावली के अनुसार वसूली के टेंडर किए हैं यह तो पूरे प्रदेश की नीति के तहत ही किए गए होंगे, लेकिन वर्तमान में जिला पंचायत के नाम पर वसूली का सबसे ज्यादा खेल ऊधमसिंह नगर जिले में चल रहा है।
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यूपी से उत्तराखंड में प्रवेश की बात की जाए तो सहारनपुर से देहरादून में प्रवेश के लिए सेल्स टैक्स के बैरियर लगे हैं, साथ ही पुलिस का बैरियर है, इसमें जिला पंचायत का कोई बैरियर नहीं है। मुजफ्फरनगर से जब रुड़की में उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश किया जाता है तो यहां पर भी सेल्स टैक्स पुलिस आदि का ही बैरियर होता है। इस बारे में जिला पंचायत के ठेकेदार बरेली निवासी शशांक चॉडक का कहना है कि इस काम में उन्होंने हाथ तो डाला है, लेकिन जब से यह वसूली का ठेका लिया है इसमें सिर्फ घाटे का ही सौदा हुआ है और बार-बार यह मामला विवादित भी रहा है।
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उन्होंने कहा कि जिले में दो-चार चुनिंदा जगहों पर जिला पंचायत के टेंडर के मुताबिक शुल्क लिया जाता है बाकी अन्य कहां-कहां शुल्क वसूली हो रही है इसकी उन्हें खुद ही सटीक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह ठेका अब समाप्ति की ओर है। एक अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2017 तक ठेका की वैधता है।