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Udham Singh Nagar News: अब डिजिटल दर्ज होने लगा है खसरा में फसलों का विवरण
Wed, 03 Jun 2026 12:50 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 03 Jun 2026 12:50 AM IST
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काशीपुर। सरकारी योजनाओं से किसानों को लाभांवित करने के लिए रवि व खरीफ की फसलों का डिजिटल सर्वे कराया जा रहा है। सर्वेयर खेतों की जियो टैग के माध्यम से फोटो खींचकर डेटा मोबाइल एप में फीड कर रहे हैं। काशीपुर के 88 गांवों में रवि की फसल का डिजिटल क्रॉप सर्वे हो चुका है। एप के जरिये डेटा जिला मुख्यालय में एकत्र किया जा रहा है। खरीफ की फसल का सर्वे अब दस अगस्त से शुरू होगा।
राजस्व अभिलेखों में फसली खसरा मैनुअली दर्ज होता था। अमूमन ये शिकायत रहती थी कि अभिलेखों में फसलों का इंद्राज खेतों की मौजूदा स्थिति के मुताबिक नहीं किया जाता है। ज्यादातर लेखपाल हल्कों में जाए बगैर ही खसरों में फसलों की मनमानी जानकारी दर्ज कर देते थे। ऐसे में आपदा की स्थिति में अभिलेखों में दर्शाई गई फसलों का मिलान मौके की स्थिति के अनुसार नहीं हो पाता था जिससे किसान पात्र होने के बावजूद मुआवजे से वंचित रह जाते थे।
सरकार ने अब डिजिटल क्राप सर्वे शुुरू किया है। सर्वेयर किसानों के खेतों की जियो टैग फोटो खींचकर डेटा एप में फीड कर रहे हैं। काशीपुर के 88 गांवों में रवि की फसल का डिजिटल क्रॉप सर्वे हो चुका है।
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दस अगस्त से खरीफ की फसल के सर्वे की तैयारी चल रही है। इसके लिए 10 सर्वेयर पर एक सुपरवाइजर तैनात किया गया है।
इंसेट-
कैसे होता है क्रॉप सर्वे
काशीपुर। एप से जीपीएस लोकेशन के लिए सर्वेयर को खेत और किसान की फोटो खींचकर एप में अपलोड कर विवरण दर्ज करनी होती है। इसमें खेत स्वामी का नाम, क्षेत्रफल, बोई गई फसल, पेड़ों की संख्या, सिंचित/असिंचित भूमि का विवरण होता है। एप 20 मीटर से ज्यादा दूरी पर फसल कैच नहीं करता ताकि फर्जी एंट्री से बचा जा सके।
कोड-
रवि की फसल का डिजिटल सर्वे हो चुका है। डेटा एप के माध्यम से एकत्र किया जा चुका है। दस अगस्त से खरीफ की फसल का डिजिटल सर्वें किया जाएगा।
- पंकज चंदोला, तहसीलदार काशीपुर।
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राजस्व अभिलेखों में फसली खसरा मैनुअली दर्ज होता था। अमूमन ये शिकायत रहती थी कि अभिलेखों में फसलों का इंद्राज खेतों की मौजूदा स्थिति के मुताबिक नहीं किया जाता है। ज्यादातर लेखपाल हल्कों में जाए बगैर ही खसरों में फसलों की मनमानी जानकारी दर्ज कर देते थे। ऐसे में आपदा की स्थिति में अभिलेखों में दर्शाई गई फसलों का मिलान मौके की स्थिति के अनुसार नहीं हो पाता था जिससे किसान पात्र होने के बावजूद मुआवजे से वंचित रह जाते थे।
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सरकार ने अब डिजिटल क्राप सर्वे शुुरू किया है। सर्वेयर किसानों के खेतों की जियो टैग फोटो खींचकर डेटा एप में फीड कर रहे हैं। काशीपुर के 88 गांवों में रवि की फसल का डिजिटल क्रॉप सर्वे हो चुका है।
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दस अगस्त से खरीफ की फसल के सर्वे की तैयारी चल रही है। इसके लिए 10 सर्वेयर पर एक सुपरवाइजर तैनात किया गया है।
इंसेट-
कैसे होता है क्रॉप सर्वे
काशीपुर। एप से जीपीएस लोकेशन के लिए सर्वेयर को खेत और किसान की फोटो खींचकर एप में अपलोड कर विवरण दर्ज करनी होती है। इसमें खेत स्वामी का नाम, क्षेत्रफल, बोई गई फसल, पेड़ों की संख्या, सिंचित/असिंचित भूमि का विवरण होता है। एप 20 मीटर से ज्यादा दूरी पर फसल कैच नहीं करता ताकि फर्जी एंट्री से बचा जा सके।
कोड-
रवि की फसल का डिजिटल सर्वे हो चुका है। डेटा एप के माध्यम से एकत्र किया जा चुका है। दस अगस्त से खरीफ की फसल का डिजिटल सर्वें किया जाएगा।
- पंकज चंदोला, तहसीलदार काशीपुर।