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संगत के साथ बैठक में भी नहीं निपटा विवाद
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नानकमत्ता गुरुद्वारा साहिब के बाबा अलमस्त दीवान हॉल में आयोजित संगत की बैठक में बोलते गुरुद्वार
- फोटो : SITARGANJ
नानकमत्ता। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी में चल रहे विवाद के निपटारे के लिए तराई सिख महासभा द्वारा बुलाई गई संगत की बैठक में गुरुद्वारा प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद का निपटारा नहीं हो पाया। बैठक में विवादित मुद्दों को न उठाने देने से संगत में रोष फैल गया। टकराव की आशंका को लेकर प्रशासन और भारी संख्या मे पुलिस बल तैनात रहा।
रविवार को गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों में चल रहे विवाद को निपटाने के लिए तराई सिख महासभा के अध्यक्ष तथा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के महासचिव प्रीतम सिंह संधू ने सिख संगत की बैठक बुलाई। बाबा अलमस्त दीवान हाल में बैठक के लिए सुबह से ही आसपास के क्षेत्रों की हजारों की संख्या में संगत पहुंच गई। अध्यक्षता कर रहे हरेंद्र सिंह लाडी ने श्री गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य पर कमेटी के लोगों से आपस में मिल बैठकर विवाद का निपटारा करने की अपील की।
गुरुद्वारा प्रधान सेवा सिंह ने तराई सिख महासभा द्वारा उन पर लगाए गए सभी आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि गुरुद्वारे के संविधान के अनुसार प्रबंधन कमेटी चला रहे हैं। महासचिव प्रीतम सिंह संधू ने कहा कि वर्तमान प्रधान और पूर्व प्रधान संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर रहे। इस कारण विवाद बढ़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि कमेटी में गुरुद्वारा साहिब का विकास रुक गया है। प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारी सेवादारों को परेशान तथा प्रताड़ित करने में लगे रहते हैं।
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संचालन कर रहे राजपाल सिंह ने कहा कि सेवादार बरसों से गुरुद्वारे की सेवा कर परिवार का पेट पाल रहे हैं। प्रबंधन कमेटी उनको किसी रूप में न निकाले। बैठक में विवाद की मध्यस्थता कर रहे हरेंद्र सिंह लाडी ने प्रधान तथा महासचिव से वार्ता कर प्रबंध कमेटी के सभी सदस्यों के साथ बैठक कर विवाद निपटाने के लिए पांच सदस्य कमेटी बनाने का बात कही। दूरदराज से आई संगत विवाद के कारणों तथा विवादित मुद्दे न उठाने देने से आक्रोशित हो गई। उन्होंने पदाधिकारियों का तीव्र विरोध भी किया। संगत के गुरुद्वारा साहिब की इनोवा कार धर्म प्रचार कमेटी द्वारा निजी प्रयोग में लाने का आरोप लगाए जाने पर कार तत्काल गुरुद्वारा के सुपुर्द कर दी गई।
वहां गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान सेवा सिंह, प्रीतम सिंह संधू, केहर सिंह, लक्खा सिंह बिथा, जरनैल सिंह, जोगेंदर सिंह, महेंद्र सिंह, प्रगट सिंह, हरचंद सिंह, हरभाग सिंह, हरचंद सिंह, हरपाल सिंह, हरविंदर सिंह विर्क, प्रीतम सिंह चावला, अमरजीत सिंह सेठी, जसवंत सिंह, निशान सिंह, कुलदीप सिंह पन्नू, धन्ना सिंह, बलजिंदर सिंह, गुरदयाल सिंह, करनैल सिंह आदि थे। इधर, गुरुद्वारे के प्रधान सेवा सिंह ने कहा कि 28 जुलाई को होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई है। अगली तिथि जल्द घोषित की जाएगी।
छावनी में तब्दील रहा गुरुद्वारा परिसर
नानकमत्ता। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी का विवादों से नाता कोई नया नहीं है। विवाद के कारण ही 18 साल तक डीएम को रिसीवर के रूप में कमेटी का चार्ज देखना पड़ा था। एक बार फिर विवाद होने पर प्रशासन और पुलिस महकमा बेहद सतर्क था। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर को छावनी के रूप में तब्दील कर दिया गया था।
वर्ष 1998 में चुनी गई कमेटी में चल रहे विवाद के कारण मामला हाईकोर्ट से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। उच्च न्यायालय के आदेश पर गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी से प्रबंधन का अधिकार छीन कर डीएम को रिसीवर नियुक्त कर दिया गया था। 18 वर्षों तक रिसीवर कार्यकाल के बाद 22 दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट के आदेश पर विधिवत चुनाव के बाद कमेटी बनी थी। परंतु पद को लेकर निर्वाचन के समय से ही विवाद खड़ा हो गया था। वर्तमान कमेटी में समझौते के आधार पर प्रथम डेढ़ वर्ष तक जसविंदर सिंह गिल प्रधान पद पर रहे। कार्यकाल समाप्त होने पर उन्होंने सेवा सिंह को प्रधान पद सौंप दिया।
प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारी तथा सदस्य आपसी गुटबाजी मे उलझे हैं। रविवार को बैठक में सभी गुटों के आने से विवाद की आशंका को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। नगर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात था। दो प्लाटून पीएसी, झनकईया, खटीमा, सितारगंज, किच्छा, पुलभट्टा और रुद्रपुर कोतवाली के अलावा पुलिस लाइन से भी जवानों को तैनात किया गया था। एसडीएम मनीष बिष्ट और सीओ कमला बिष्ट पूरे समय थाना परिसर में मौजूद रहे।
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रविवार को गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों में चल रहे विवाद को निपटाने के लिए तराई सिख महासभा के अध्यक्ष तथा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के महासचिव प्रीतम सिंह संधू ने सिख संगत की बैठक बुलाई। बाबा अलमस्त दीवान हाल में बैठक के लिए सुबह से ही आसपास के क्षेत्रों की हजारों की संख्या में संगत पहुंच गई। अध्यक्षता कर रहे हरेंद्र सिंह लाडी ने श्री गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य पर कमेटी के लोगों से आपस में मिल बैठकर विवाद का निपटारा करने की अपील की।
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गुरुद्वारा प्रधान सेवा सिंह ने तराई सिख महासभा द्वारा उन पर लगाए गए सभी आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि गुरुद्वारे के संविधान के अनुसार प्रबंधन कमेटी चला रहे हैं। महासचिव प्रीतम सिंह संधू ने कहा कि वर्तमान प्रधान और पूर्व प्रधान संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर रहे। इस कारण विवाद बढ़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि कमेटी में गुरुद्वारा साहिब का विकास रुक गया है। प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारी सेवादारों को परेशान तथा प्रताड़ित करने में लगे रहते हैं।
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संचालन कर रहे राजपाल सिंह ने कहा कि सेवादार बरसों से गुरुद्वारे की सेवा कर परिवार का पेट पाल रहे हैं। प्रबंधन कमेटी उनको किसी रूप में न निकाले। बैठक में विवाद की मध्यस्थता कर रहे हरेंद्र सिंह लाडी ने प्रधान तथा महासचिव से वार्ता कर प्रबंध कमेटी के सभी सदस्यों के साथ बैठक कर विवाद निपटाने के लिए पांच सदस्य कमेटी बनाने का बात कही। दूरदराज से आई संगत विवाद के कारणों तथा विवादित मुद्दे न उठाने देने से आक्रोशित हो गई। उन्होंने पदाधिकारियों का तीव्र विरोध भी किया। संगत के गुरुद्वारा साहिब की इनोवा कार धर्म प्रचार कमेटी द्वारा निजी प्रयोग में लाने का आरोप लगाए जाने पर कार तत्काल गुरुद्वारा के सुपुर्द कर दी गई।
वहां गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान सेवा सिंह, प्रीतम सिंह संधू, केहर सिंह, लक्खा सिंह बिथा, जरनैल सिंह, जोगेंदर सिंह, महेंद्र सिंह, प्रगट सिंह, हरचंद सिंह, हरभाग सिंह, हरचंद सिंह, हरपाल सिंह, हरविंदर सिंह विर्क, प्रीतम सिंह चावला, अमरजीत सिंह सेठी, जसवंत सिंह, निशान सिंह, कुलदीप सिंह पन्नू, धन्ना सिंह, बलजिंदर सिंह, गुरदयाल सिंह, करनैल सिंह आदि थे। इधर, गुरुद्वारे के प्रधान सेवा सिंह ने कहा कि 28 जुलाई को होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई है। अगली तिथि जल्द घोषित की जाएगी।
छावनी में तब्दील रहा गुरुद्वारा परिसर
नानकमत्ता। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी का विवादों से नाता कोई नया नहीं है। विवाद के कारण ही 18 साल तक डीएम को रिसीवर के रूप में कमेटी का चार्ज देखना पड़ा था। एक बार फिर विवाद होने पर प्रशासन और पुलिस महकमा बेहद सतर्क था। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर को छावनी के रूप में तब्दील कर दिया गया था।
वर्ष 1998 में चुनी गई कमेटी में चल रहे विवाद के कारण मामला हाईकोर्ट से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। उच्च न्यायालय के आदेश पर गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी से प्रबंधन का अधिकार छीन कर डीएम को रिसीवर नियुक्त कर दिया गया था। 18 वर्षों तक रिसीवर कार्यकाल के बाद 22 दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट के आदेश पर विधिवत चुनाव के बाद कमेटी बनी थी। परंतु पद को लेकर निर्वाचन के समय से ही विवाद खड़ा हो गया था। वर्तमान कमेटी में समझौते के आधार पर प्रथम डेढ़ वर्ष तक जसविंदर सिंह गिल प्रधान पद पर रहे। कार्यकाल समाप्त होने पर उन्होंने सेवा सिंह को प्रधान पद सौंप दिया।
प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारी तथा सदस्य आपसी गुटबाजी मे उलझे हैं। रविवार को बैठक में सभी गुटों के आने से विवाद की आशंका को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। नगर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात था। दो प्लाटून पीएसी, झनकईया, खटीमा, सितारगंज, किच्छा, पुलभट्टा और रुद्रपुर कोतवाली के अलावा पुलिस लाइन से भी जवानों को तैनात किया गया था। एसडीएम मनीष बिष्ट और सीओ कमला बिष्ट पूरे समय थाना परिसर में मौजूद रहे।