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वन्य जीवों से फसल नुकसान के मामले में नहीं खुली जुबान

Wed, 28 Feb 2018 12:44 AM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला ब्यूरो, ऊधमसिंह नगर
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला ब्यूरो, ऊधमसिंह नगर Updated Wed, 28 Feb 2018 12:44 AM IST
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 Not open in case of crop damage from wildlife
खेत में अावारा पशु। - फोटो : Amar Ujala

किसान कुंभ के समापन समारोह में उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या वन्य जीवों से हो रहे फसल नुकसान पर किसी की जुबान खुल ही नहीं पाई। न केंद्रीय कृषि मेंत्री राधा मोहन कुछ बोले और न मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने ही कुछ कहा। प्रदेश के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कई मसले उठाए पर इस एक मुद्दे पर भी उनके पास कहने को कुछ नहीं था।

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पंतनगर विश्वविद्यालय में कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सियासत के लिए जगह शायद ही होती लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह अपने दीर्घ राजनीतिक अनुभव को साझा करने का लोभ संवरण नहीं कर पाए। राधा मोहन पौन घंटे तक बोले। उनके भाषण का 80 फीसदी भाग यह बताने में गया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने किस तरह से किसानों की उपेक्षा की और वर्तमान केंद्र सरकार किस तरह से साढ़े तीन साल में ही किसानों की आय को दोगुना करने का काम कर  रही है।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को इस बात का अहसास रहा कि वे कृषि वैज्ञानिकों केबीच और देश के बड़े कृषि विश्वविद्यालय में हैँ। उन्होंने प्रदेश की खेती किसानी की समस्याओं से संबंधित कई सवाल भी उठाए। इसके बावजूद त्रिवेंद्र वन्य जीवों से संबंधित प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या पर मौन रहे। मैदानी भाग में हाथी ही नहीं, नील गाय, जंगली सुअर, बंदर लंगूर खेती को नुकसान पहुंचा रहे है। पहाड़ में हाथी को छोड़कर बाकी जानवरों ने खेती चौपट की हुई है। पहाड़ में पलायन का सबसे बड़ा कारण ही अब यह समस्या बताई जा रही है। इस पर सुबोध भी कुछ नहीं बोले। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को जरूर खेती के प्रति किसानों की बेरुखी के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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हाल यह था कि किसानों की आय को दोगुना करने संबंधित दस्तावेज का लोकार्पण भी नजरअंदाज कर दिया गया। इस दस्तावेज पर किसी नेता ने एक शब्द नहीं बोला। निदेशक अनुसंधान एसएन तिवारी सिर्फ यह बता पाए कि इस दस्तावेज की प्रधानमंत्री ने भी तारीफ की थी और इसी के आधार पर देश के अन्य विश्वविद्यालयों को दस्तावेज तैयार करने को कहा गया है।

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