{"_id":"572ce4b44f1c1b71275cd333","slug":"noodles-have-to-face-on-the-amount-of-msg","type":"story","status":"publish","title_hn":"नूडल्स पर अंकित करनी होगी एमएसजी की मात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नूडल्स पर अंकित करनी होगी एमएसजी की मात्रा
अमर उजाला ब्यूरो ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 07 May 2016 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
खाद्य सुरक्षा आयुक्त ओमप्रकाश ने अपनी नई एडवाइजरी में कहा कि राज्य के सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर कहा कि नूडल्स और पाश्ता में प्राकृतिक रूप में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) पाया जाता है। कंपनी को नूडल्स के पैक पर एमएसजी की मात्रा अनिवार्य रूप से अंकित करनी होगी, क्योंकि खाद्य आयुक्त उत्तराखंड ने कई पहलुओं की पड़ताल के बाद यह माना है कि नूडल्स और पाश्ता में एमएसजी प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है। साथ ही यह हिदायत भी दी कि अगर प्रोडक्ट में एमएसजी की मात्रा का अंकन किया गया है तो जांच में उतनी ही मात्रा पाए जाने पर उत्पादक कंपनी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
खाद्य आयुक्त ओम प्रकाश ने इस आशय का पत्र भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली राकेश शर्मा को भी प्रेषित किया है। पांच मई को जारी किए गए मैगी उत्पादों की जांच के संदर्भ में 31 मार्च 2016 को भेजे गए पत्र का संज्ञान लेने को भी कहा गया है। उधर इस मामले में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष सयाना ने भी स्वीकारा कि खाद्य आयुक्त की ओर से उन्हें एडवाइजरी पत्र आनलाइन मिला है।
बता दें कि पिछले वर्ष 2015 में पंतनगर सिडकुल स्थित नेस्ले इंडिया लिमिटेड में मैगी के उत्पादन में कोर्ट के आदेश में बाद रोक लगा दी थी, करीब पांच महीने तक यहां मैगी का उत्पादन ठप रहा और करीब आठ सौ से अधिक लोगों की रोजी-रोटी पर संकट बन गया था। यही नहीं मैगी के उत्पादन से जुड़े तमाम ट्रांसपोर्टरों के व्यापार पर भी भारी प्रभाव पड़ा था। इसके बाद मुंबई हाईकोर्ट से जैसे ही मैगी को क्लीनचिट मिलनी शुरू हुई तो अन्य जगहों से भी मैगी को हरी झंडी मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। यहां तक सिडकुल में मैगी के उत्पादन पर राज्य सरकार की ओर से भी रोक थी जिसे बाद में क्लीन चिट मिल गई। वर्तमान में पंतनगर सिडकुल स्थित नेश्ले के एक प्लांट में मैगी का उत्पादन जोरों पर चल रहा है।
विज्ञापन
खाद्य आयुक्त ओम प्रकाश ने इस आशय का पत्र भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली राकेश शर्मा को भी प्रेषित किया है। पांच मई को जारी किए गए मैगी उत्पादों की जांच के संदर्भ में 31 मार्च 2016 को भेजे गए पत्र का संज्ञान लेने को भी कहा गया है। उधर इस मामले में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष सयाना ने भी स्वीकारा कि खाद्य आयुक्त की ओर से उन्हें एडवाइजरी पत्र आनलाइन मिला है।
विज्ञापन
बता दें कि पिछले वर्ष 2015 में पंतनगर सिडकुल स्थित नेस्ले इंडिया लिमिटेड में मैगी के उत्पादन में कोर्ट के आदेश में बाद रोक लगा दी थी, करीब पांच महीने तक यहां मैगी का उत्पादन ठप रहा और करीब आठ सौ से अधिक लोगों की रोजी-रोटी पर संकट बन गया था। यही नहीं मैगी के उत्पादन से जुड़े तमाम ट्रांसपोर्टरों के व्यापार पर भी भारी प्रभाव पड़ा था। इसके बाद मुंबई हाईकोर्ट से जैसे ही मैगी को क्लीनचिट मिलनी शुरू हुई तो अन्य जगहों से भी मैगी को हरी झंडी मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। यहां तक सिडकुल में मैगी के उत्पादन पर राज्य सरकार की ओर से भी रोक थी जिसे बाद में क्लीन चिट मिल गई। वर्तमान में पंतनगर सिडकुल स्थित नेश्ले के एक प्लांट में मैगी का उत्पादन जोरों पर चल रहा है।
विज्ञापन