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Udham Singh Nagar News: स्वयंभू श्री मोटेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी है शिवभक्तों की आस्था
Mon, 10 Jul 2023 12:33 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 10 Jul 2023 12:33 AM IST
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श्रावण मास से पहले सोमवार पर विशेष
अज्ञातवास के दौरान भीम ने इस मंदिर की थी स्थापना, श्रावण मास के दौरान दूरदराज से श्रद्धालु यहां आते हैं जलाभिषेक करने
संवाद न्यूज एजेंसी
काशीपुर। पौराणिक और ऐतिहासिक नगरी काशीपुर में कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें श्री मोटेश्वर महादेव मंदिर मुख्य हैं। श्रावण मास और शिवरात्री में हजारों की संख्या में शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल कांवड़ में लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करने यहां पहुंचते हैं।
चैती मैदान महादेव नगर स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन स्वयंभू श्री भीमशंकर मोटेश्वर महादेव मंदिर से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि मोटेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। यह संभवत: 327 ईसवी पूर्व बना होगा। मंदिर की दीवार चिनिया ईंटों से और सुरखी-चूना, शीरा और उड़द से तैयार की गई हैं। बताया जाता है अज्ञात वास के दौरान पांडव यहां कुछ समय के रुके थे। इस दौरान भीम ने इस मंदिर की स्थापना की थी। इसलिए इसे भीमशंकर मोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का जीर्णोद्धार 1980 में मूल प्रकाश पुत्र रामप्रकाश सर्राफ ने कराया था।
मंदिर के पुजारी राघवेंद्र नागर बताते हैं मोटेश्वर महादेव मंदिर दूसरी मंजिल पर है। बताते हैं कि नगर निवासी कन्हैया लाल के पुत्र कल्याण दास ने एक बार शिवलिंग की गहराई नापने को पीतल से बने फर्श को उखड़वाना शुरु किया था। इस दौरान एक दिन रात में स्वप्न में भगवान शंकर ने कहा कि तू मेरी गहराई नापना चाहता है। तब उन्होंने मंदिर की खुदाई रुकवा दी और जयपुर के मकराना पत्थर से फर्श को डलवाया। वहीं चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी अपने यात्रा वर्णन में भीम (दादा) कहकर वर्णित किया है। साथ ही गोरखपुर से प्रकाशित होने वाले कल्याण पुस्तक में भी इस शिवलिंग का उल्लेख मिलता है।
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मंदिर के पुजारी ने बताया मंदिर में प्रत्येक वर्ष श्रावण और शिवरात्रि में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने और हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लाकर भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान यहां दो दिवसीय मेले का भी आयोजन किया जाता है।
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अज्ञातवास के दौरान भीम ने इस मंदिर की थी स्थापना, श्रावण मास के दौरान दूरदराज से श्रद्धालु यहां आते हैं जलाभिषेक करने
संवाद न्यूज एजेंसी
काशीपुर। पौराणिक और ऐतिहासिक नगरी काशीपुर में कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें श्री मोटेश्वर महादेव मंदिर मुख्य हैं। श्रावण मास और शिवरात्री में हजारों की संख्या में शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल कांवड़ में लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करने यहां पहुंचते हैं।
चैती मैदान महादेव नगर स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन स्वयंभू श्री भीमशंकर मोटेश्वर महादेव मंदिर से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि मोटेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। यह संभवत: 327 ईसवी पूर्व बना होगा। मंदिर की दीवार चिनिया ईंटों से और सुरखी-चूना, शीरा और उड़द से तैयार की गई हैं। बताया जाता है अज्ञात वास के दौरान पांडव यहां कुछ समय के रुके थे। इस दौरान भीम ने इस मंदिर की स्थापना की थी। इसलिए इसे भीमशंकर मोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का जीर्णोद्धार 1980 में मूल प्रकाश पुत्र रामप्रकाश सर्राफ ने कराया था।
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मंदिर के पुजारी राघवेंद्र नागर बताते हैं मोटेश्वर महादेव मंदिर दूसरी मंजिल पर है। बताते हैं कि नगर निवासी कन्हैया लाल के पुत्र कल्याण दास ने एक बार शिवलिंग की गहराई नापने को पीतल से बने फर्श को उखड़वाना शुरु किया था। इस दौरान एक दिन रात में स्वप्न में भगवान शंकर ने कहा कि तू मेरी गहराई नापना चाहता है। तब उन्होंने मंदिर की खुदाई रुकवा दी और जयपुर के मकराना पत्थर से फर्श को डलवाया। वहीं चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी अपने यात्रा वर्णन में भीम (दादा) कहकर वर्णित किया है। साथ ही गोरखपुर से प्रकाशित होने वाले कल्याण पुस्तक में भी इस शिवलिंग का उल्लेख मिलता है।
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मंदिर के पुजारी ने बताया मंदिर में प्रत्येक वर्ष श्रावण और शिवरात्रि में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने और हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लाकर भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान यहां दो दिवसीय मेले का भी आयोजन किया जाता है।