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जिले में नर्सिंग होम तीन हजार से अधिक, पंजीकरण सिर्फ 22 का
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:10 AM IST
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ऊधमसिंह नगर जिले में मानकों को ताक पर रखकर जिले भर में संचालित होने वाले कई नर्सिंग होम/निजी अस्पताल बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। पूरे जिले में तीन हजार से अधिक नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग में सिर्फ 22 का ही पंजीकरण है। रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो सिर्फ 22 नर्सिंग होम तो रुद्रपुर शहर में ही संचालित हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिला मुख्यालय रुद्रपुर में सिर्फ दो ही नर्सिंग होम ने पंजीकरण करा रखा है, बाकी बिना पंजीकरण के चल रहे हैं।
स्वास्थ्य का हब कहे जाने वाले रुद्रपुर के निजी अस्पतालों में ज्यादातर लोग इलाज अच्छा होने का भरोसा लेकर दूरदराज क्षेत्रों से आते हैं। इसमें गंभीर ऑपरेशन से लेकर छोटे ऑपरेशन शामिल हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी और पथरी का ऑपरेशन भी शामिल है। बिना पंजीकरण के चल रहे यह निजी अस्पताल लोगों की जिंदगी के साथ तो खिलवाड़ कर ही रहे हैं वहीं प्रशासन की आंखों में धूल भी झोंक रहे हैं।
दूसरी ओर नर्सिंग होम द्वारा इलाज के नाम पर वसूली जाने वाली फीस लोगों की कमर तोड़ देती है। नर्सिंग होम में मरीज से प्रतिदिन बेड चार्ज के रूप में 200 से लेकर 500 रुपए तक वसूले जाते हैं। जब सीएमओ एचके जोशी से चौंकाने वाले इन आंकड़ों पर बात की गई तो उन्होंने बिना कोई कार्रवाई का हवाला दिए इस मामले पर मीटिंग में चर्चा करने को कहा। इससे पहले भी सीएमओ ने बिना पंजीकृत पैथोलॉजी लैब पर भी कोई संतुष्ट जवाब नहीं दिया था और न हीं उनके द्वारा ऐसी लैबों पर कोई कार्रवाई की गई।
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पंजीकृत नर्सिंग होम की संख्या
रुद्रपुर - 02
किच्छा - 02
काशीपुर - 05
गदरपुर - 03
खटीमा - 02
बाजपुर - 04
सितारगंज - 04
सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों को अक्सर बेहतर इलाज के लिए हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया जाता है या एंबुलेंस नहीं मिलने के अभाव में निजी नर्सिंग होम में रेफर किया जाता है। लेकिन बिना पंजीकरण संचालित हो रहे नर्सिंग होम मरीजों के परिजनों के साथ अन्याय कर रहे हैं। कई बार गंभीर रुप से घायल होने वाले लोगों को शहर के कई नर्सिंग होम में भर्ती होने के बाद जान गंवानी पड़ी है।
जिला प्राधिकरण अधिनियम की धारा 41 की उपधारा 1,2,3 और धारा 42 की उपधारा 1,2,3 के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित होने वाले नर्सिंग होम सेवाएं देते हुए पाया जाता है तो उसको आर्थिक तौर पर दंडित किया जाता है। इसमें पचास हजार रुपए से लेकर दो लाख रुपए के दंड का प्रावधान है। चौंकाने वाली यह बात है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कभी इन नर्सिंग होम पर कार्रवाई नहीं की गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साफ नजर आती है।
। क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत हर प्राइवेट अस्पताल को सीएमओ कार्यालय में बहुत कम शुल्क पर अस्पताल का पंजीकरण कराना होता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होने वाले प्राइवेट अस्पतालों से फीस और भी कम वसूली जाती है। शहर में संचालित होने वाले दस बेड के अस्पताल का पंजीकरण शुल्क सात हजार रुपए है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र इतने ही बेड का शुल्क मात्र पांच हजार रुपए है। बावजूद इसके नर्सिंग होम के स्वामियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पंजीकरण नहीं कराया जा रहा है।
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बिना पंजीकरण संचालित होने वाले नर्सिंग होम पर जुर्माने का प्रावधान है। मैं अभी बिना संचालित होने वाले नर्सिंग होम पर कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहा हूं। कुछ दिन बाद मीटिंग में तय किया जाएगा कि बिना पंजीकरण चल रहे नर्सिंग होम पर क्या कार्रवाई हो सकती है। निजी अस्पतालों की एसोसिएशन से मेरी बात चल रही है, उसके बाद ही कोई उचित कार्रवाई की जाएगी।
-एचके जोशी, सीएमओ
स्वास्थ्य का हब कहे जाने वाले रुद्रपुर के निजी अस्पतालों में ज्यादातर लोग इलाज अच्छा होने का भरोसा लेकर दूरदराज क्षेत्रों से आते हैं। इसमें गंभीर ऑपरेशन से लेकर छोटे ऑपरेशन शामिल हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी और पथरी का ऑपरेशन भी शामिल है। बिना पंजीकरण के चल रहे यह निजी अस्पताल लोगों की जिंदगी के साथ तो खिलवाड़ कर ही रहे हैं वहीं प्रशासन की आंखों में धूल भी झोंक रहे हैं।
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दूसरी ओर नर्सिंग होम द्वारा इलाज के नाम पर वसूली जाने वाली फीस लोगों की कमर तोड़ देती है। नर्सिंग होम में मरीज से प्रतिदिन बेड चार्ज के रूप में 200 से लेकर 500 रुपए तक वसूले जाते हैं। जब सीएमओ एचके जोशी से चौंकाने वाले इन आंकड़ों पर बात की गई तो उन्होंने बिना कोई कार्रवाई का हवाला दिए इस मामले पर मीटिंग में चर्चा करने को कहा। इससे पहले भी सीएमओ ने बिना पंजीकृत पैथोलॉजी लैब पर भी कोई संतुष्ट जवाब नहीं दिया था और न हीं उनके द्वारा ऐसी लैबों पर कोई कार्रवाई की गई।
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पंजीकृत नर्सिंग होम की संख्या
रुद्रपुर - 02
किच्छा - 02
काशीपुर - 05
गदरपुर - 03
खटीमा - 02
बाजपुर - 04
सितारगंज - 04
सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों को अक्सर बेहतर इलाज के लिए हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया जाता है या एंबुलेंस नहीं मिलने के अभाव में निजी नर्सिंग होम में रेफर किया जाता है। लेकिन बिना पंजीकरण संचालित हो रहे नर्सिंग होम मरीजों के परिजनों के साथ अन्याय कर रहे हैं। कई बार गंभीर रुप से घायल होने वाले लोगों को शहर के कई नर्सिंग होम में भर्ती होने के बाद जान गंवानी पड़ी है।
जिला प्राधिकरण अधिनियम की धारा 41 की उपधारा 1,2,3 और धारा 42 की उपधारा 1,2,3 के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित होने वाले नर्सिंग होम सेवाएं देते हुए पाया जाता है तो उसको आर्थिक तौर पर दंडित किया जाता है। इसमें पचास हजार रुपए से लेकर दो लाख रुपए के दंड का प्रावधान है। चौंकाने वाली यह बात है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कभी इन नर्सिंग होम पर कार्रवाई नहीं की गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साफ नजर आती है।
। क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत हर प्राइवेट अस्पताल को सीएमओ कार्यालय में बहुत कम शुल्क पर अस्पताल का पंजीकरण कराना होता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होने वाले प्राइवेट अस्पतालों से फीस और भी कम वसूली जाती है। शहर में संचालित होने वाले दस बेड के अस्पताल का पंजीकरण शुल्क सात हजार रुपए है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र इतने ही बेड का शुल्क मात्र पांच हजार रुपए है। बावजूद इसके नर्सिंग होम के स्वामियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पंजीकरण नहीं कराया जा रहा है।
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बिना पंजीकरण संचालित होने वाले नर्सिंग होम पर जुर्माने का प्रावधान है। मैं अभी बिना संचालित होने वाले नर्सिंग होम पर कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहा हूं। कुछ दिन बाद मीटिंग में तय किया जाएगा कि बिना पंजीकरण चल रहे नर्सिंग होम पर क्या कार्रवाई हो सकती है। निजी अस्पतालों की एसोसिएशन से मेरी बात चल रही है, उसके बाद ही कोई उचित कार्रवाई की जाएगी।
-एचके जोशी, सीएमओ