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Udham Singh Nagar News: स्वरोजगार की राह दिखाकर युवाओं की रोल मॉडल बनीं ममता
Tue, 20 May 2025 01:18 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 20 May 2025 01:18 AM IST
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पंतनगर में ममता मेहता को सम्मानित करते कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान।
पंतनगर। बागेश्वर जिले की ममता मेहता ने पति की असमय मौत के बाद कुछ करने की ठानी और पंतनगर के समेटी से प्रशिक्षण लेकर वर्ष 2019 में पांच बैग से मशरूम उत्पादन शुरू किया। शुरूआत में किए संघर्ष के बाद वह वर्तमान में पांच लाख रुपये सालाना कमा रही हैं। इतना ही नहीं वह क्षेत्र के युवाओं को मशरूम उत्पादन के प्रशिक्षण से स्वरोजगार की राह दिखाकर उनके लिए रोल मॉडल भी बन गईं हैं।
बागेश्वर के विकासखंड कपकोट की 36 वर्षीय ममता का संघर्ष पति के असमय निधन के बाद शुरू हुआ। उन्होंने वर्ष 2017 में कृषि क्षेत्र में भाग्य आजमाने की ठानी और कृषि विभाग से संपर्क किया। विभाग ने उनके खेतों पर प्रदर्शन और अन्य प्रसार कार्यक्रम शुरू किए। कुछ समय बाद उन्होंने पंतनगर के समेटी में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया था। ममता ने बताया कि विभागीय मदद से वर्ष 2019 में एक छोटे से कमरे में स्पॉन के पांच बैग से मशरूम उत्पादन की शुरूआत की जो आज बढ़कर एक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने अपने उद्यमिता कौशल को बढ़ाया और जनपद स्तरीय ‘मशरूम मास्टर ट्रेनर’ के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। वे पुलिसकर्मियों को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर सशक्त बना रही हैं। वे आत्मा परियोजना की ओर से किसान श्री, किसान भूषण के अलावा नैनीताल जिले में दानपुर रत्न और पंतनगर में राष्ट्रीय कृषि उद्यमिता विकास मेले में अग्रणी महिला उद्यमी सम्मान पा चुकी हैं। उन्होंने इसका श्रेय यंग प्रोफेशनल द्वितीय ज्योति कनवाल के सहयोग को दिया है।
होम स्टे बनाकर स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना है लक्ष्य
पंतनगर। मशरूम उत्पादन से युवाओं के लिए रोल मॉडल बनीं ममता की महत्वाकांक्षाएं सिर्फ यहीं नहीं रुकतीं, बल्कि अब वह ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में भी कदम रख रही हैं। जहां वह पर्यटकों के लिए ‘होम स्टे’ का निर्माण कर स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने सहित उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना चाहती हैं। वह उन्नत कृषि निवेश, मशरूम क्षेत्रफल में विस्तार सहित बच्चों की सर्वोत्तम शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
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बागेश्वर के विकासखंड कपकोट की 36 वर्षीय ममता का संघर्ष पति के असमय निधन के बाद शुरू हुआ। उन्होंने वर्ष 2017 में कृषि क्षेत्र में भाग्य आजमाने की ठानी और कृषि विभाग से संपर्क किया। विभाग ने उनके खेतों पर प्रदर्शन और अन्य प्रसार कार्यक्रम शुरू किए। कुछ समय बाद उन्होंने पंतनगर के समेटी में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया था। ममता ने बताया कि विभागीय मदद से वर्ष 2019 में एक छोटे से कमरे में स्पॉन के पांच बैग से मशरूम उत्पादन की शुरूआत की जो आज बढ़कर एक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने अपने उद्यमिता कौशल को बढ़ाया और जनपद स्तरीय ‘मशरूम मास्टर ट्रेनर’ के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। वे पुलिसकर्मियों को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर सशक्त बना रही हैं। वे आत्मा परियोजना की ओर से किसान श्री, किसान भूषण के अलावा नैनीताल जिले में दानपुर रत्न और पंतनगर में राष्ट्रीय कृषि उद्यमिता विकास मेले में अग्रणी महिला उद्यमी सम्मान पा चुकी हैं। उन्होंने इसका श्रेय यंग प्रोफेशनल द्वितीय ज्योति कनवाल के सहयोग को दिया है।
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होम स्टे बनाकर स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना है लक्ष्य
पंतनगर। मशरूम उत्पादन से युवाओं के लिए रोल मॉडल बनीं ममता की महत्वाकांक्षाएं सिर्फ यहीं नहीं रुकतीं, बल्कि अब वह ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में भी कदम रख रही हैं। जहां वह पर्यटकों के लिए ‘होम स्टे’ का निर्माण कर स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने सहित उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना चाहती हैं। वह उन्नत कृषि निवेश, मशरूम क्षेत्रफल में विस्तार सहित बच्चों की सर्वोत्तम शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
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