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बजट की कमी से कोरोना काल के बाद भी जाम हो सकते हैं रोडवेज के पहिए
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काशीपुर। कोरोना काल में परिवहन निगम की आय भी काफी प्रभावित हुई है। निगम के पास बजट न होने के कारण बसों के रखरखाव के लिए उपकरण नहीं मिल पा रहे हैं। यदि समय पर बजट उपलब्ध नहीं हुआ तो रखरखाव के अभाव में कोरोना काल के बाद भी रोडवेज के पहिए जाम हो सकते हैं। कोविड काल में अप्रैल से अब तक अकेले काशीपुर रोडवेज डिपो को ही करीब ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
परिवहन निगम के काशीपुर डिपो में कुल 49 बसें हैं। इनमें से 37 बसें परिवहन निगम की और 12 बसें अनुबंधित हैं। दिल्ली, हरिद्वार, देहरादून, लखनऊ, बरेली, टनकपुर, मुजफ्फरनगर, जयपुर, चंडीगढ़ और आगरा के लिए इन बसों का संचालन होता है। कोविड संक्रमण के चलते अप्रैल आखिर सप्ताह से पूरे प्रदेश में लॉकडाउन लागू होने पर रोडवेज की बसों का संचालन भी बंद हो गया। लॉकडाउन में कुछ छूट मिलने के बाद कोविड नियमों के तहत बसों का संचालन हुआ लेकिन यात्री नहीं मिले। आय न होने से डिपो को बजट भी नहीं मिल पा रहा है जिससे डिपो में खड़ी बसों की मरम्मत आदि के लिए उपकरण भी उपलब्ध नहीं मिल पा रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि समय पर डिपो को उपकरण नहीं मिले तो बसों का संचालन आगे भी प्रभावित हो सकता है जिससे निगम की आय प्रभावित होने पर निगम को और अधिक घाटा होगा। इधर काशीपुर डिपो में ऐसी 21 बसें करीब एक साल से नीलामी के इंतजार में खड़ी थीं। अब परिवहन निगम ने इन बसों को नीलाम किया है। समयावधि पूरी होने से सितंबर में भी कुछ बसों की नीलामी की जानी है लेकिन इसके लिए नई बसें कब स्वीकृत होंगी इस पर अभी डिपो को मुख्यालय से कोई सूचना नहीं मिली है।
कोरोना काल में बसों का संचालन बंद होने से काशीपुर डिपो को करीब ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अभी सीजन टाइम पीक पर होने के बाद भी कई रूटों पर बसों का संचालन बंद होने से आय प्रभावित हो रही है।
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ओमकार सिंह, कनिष्ठ केंद्र प्रभारी, काशीपुर डिपो।
कोरोना काल में डिपो की आय प्रभावित होने से बजट का भी अभाव है जिससे बसों के लिए आवश्यक उपकरण नहीं मिल पा रहे हैं। नई बसों के लिए उपकरणों की जरूरत है। नीलामी के लिए रखी बसों में से भी कुछ का रखरखाव किया जाना है। - पुष्कर सिंह रावत, फोरमैन, काशीपुर डिपो।
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परिवहन निगम के काशीपुर डिपो में कुल 49 बसें हैं। इनमें से 37 बसें परिवहन निगम की और 12 बसें अनुबंधित हैं। दिल्ली, हरिद्वार, देहरादून, लखनऊ, बरेली, टनकपुर, मुजफ्फरनगर, जयपुर, चंडीगढ़ और आगरा के लिए इन बसों का संचालन होता है। कोविड संक्रमण के चलते अप्रैल आखिर सप्ताह से पूरे प्रदेश में लॉकडाउन लागू होने पर रोडवेज की बसों का संचालन भी बंद हो गया। लॉकडाउन में कुछ छूट मिलने के बाद कोविड नियमों के तहत बसों का संचालन हुआ लेकिन यात्री नहीं मिले। आय न होने से डिपो को बजट भी नहीं मिल पा रहा है जिससे डिपो में खड़ी बसों की मरम्मत आदि के लिए उपकरण भी उपलब्ध नहीं मिल पा रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि समय पर डिपो को उपकरण नहीं मिले तो बसों का संचालन आगे भी प्रभावित हो सकता है जिससे निगम की आय प्रभावित होने पर निगम को और अधिक घाटा होगा। इधर काशीपुर डिपो में ऐसी 21 बसें करीब एक साल से नीलामी के इंतजार में खड़ी थीं। अब परिवहन निगम ने इन बसों को नीलाम किया है। समयावधि पूरी होने से सितंबर में भी कुछ बसों की नीलामी की जानी है लेकिन इसके लिए नई बसें कब स्वीकृत होंगी इस पर अभी डिपो को मुख्यालय से कोई सूचना नहीं मिली है।
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कोरोना काल में बसों का संचालन बंद होने से काशीपुर डिपो को करीब ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अभी सीजन टाइम पीक पर होने के बाद भी कई रूटों पर बसों का संचालन बंद होने से आय प्रभावित हो रही है।
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ओमकार सिंह, कनिष्ठ केंद्र प्रभारी, काशीपुर डिपो।
कोरोना काल में डिपो की आय प्रभावित होने से बजट का भी अभाव है जिससे बसों के लिए आवश्यक उपकरण नहीं मिल पा रहे हैं। नई बसों के लिए उपकरणों की जरूरत है। नीलामी के लिए रखी बसों में से भी कुछ का रखरखाव किया जाना है। - पुष्कर सिंह रावत, फोरमैन, काशीपुर डिपो।