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दो साल से चीनीमिल में लटके हैं ताले
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सितारगंज चीनीमिल में बंद पड़ा प्रशासनिक भवन।
- फोटो : SITARGANJ
सितारगंज। दि किसान सहकारी चीनी मिल तीन दशकों में 402 करोड़ के घाटे को पार कर चुकी थी। बंदी के एक साल पहले ही मिल को 48 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इस पर सरकार ने मिल को चलाने के बजाय कैबिनेट की बैठक में मिल को पीपीपी मोड पर चलाने का फैसला लेते हुए बंद कर दिया था।
इससे 706 मिल कर्मी बेरोजगार हो गए थे। तभी से मिल को चालू करने की मांग चली आ रही है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में मिल को पीपीपी मोड और लीज पर चलाने के फैसले से क्षेत्र के किसानों में हर्ष है। उनमें गन्ना खेती को बढ़ाने की फिर आस जाग उठी है।
सरकड़ा गांव स्थित दि किसान सहकारी चीनी मिल की स्थापना 1980 में की गई थी। 1984 से पेराई सत्र शुरू हुआ था। मिल से लाभ तो कम हुआ और मिल धीरे-धीरे घाटे में जाती रही। साल 2017 तक 32 सालों में मिल पर घाटा बढ़कर 402 करोड़ रुपये हो गया।
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अकेले 2016-17 के पेराई सत्र में ही चीनी मिल ने सरकार को 48 करोड़ का घाटा दिया था। चीनी मिल की आर्थिक स्थिति डांवाडोल होती देख भाजपा सरकार ने 30 नवंबर 2017 को कैबिनेट की बैठक में मिल को पीपीपी मोड पर चलाने का निर्णय लेते हुए उसे बंद कर दिया ।
इस पर बेरोजगार हुए 706 मिल कर्मियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। विधायक सौरभ बहुगुणा ने चीनी मिल को पुन: चालू कराने के लिए हर बार सदन में मामले को उठाया।
बुधवार को देहरादून में कैबिनेट की बैठक में सितारगंज चीनी मिल को लीज और पीपीपी मोड पर चलाने के फैसले से क्षेत्र के किसानों में हर्ष है। सहकारी गन्ना विकास समिति के पूर्व चेयरमैन उपकार सिंह ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। कहा कि मिल चालू होने से जहां क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा तो वहीं किसानों को भी उनके गन्ने का उचित मूल्य मिल सकेगा।
बढ़ने के बजाय घटती गई रिकवरी
सितारगंज। दि किसान सहकारी चीनी मिल के 32 वर्षों के इतिहास में सिर्फ वर्ष 1985-86 में ही सर्वाधिक चीनी की रिकवरी 9.84 फीसदी तक पहुंची था।
यह रिकार्ड मिल के इतिहास में सर्वाधिक रहा था। राज्य गठन के बाद से चीनी की रिकवरी भी घटती गई और 2013-14 के पेराई सत्र में सबसे कम 7.82 फीसदी रिकवरी पहुंची थी। ब्यूरो
बहुगुणा ने सीएम का आभार जताया
सितारगंज। विधायक सौरभ बहुगुणा ने कहा कि मिल के बंद होने के बाद से वह मिल चालू करने की मांग को सदन में रख रहे हैं। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और तत्कालीन वित्त मंत्री स्व. प्रकाश पंत ने सदन में मिल संचालित करने का आश्वासन भी दिया था। इस बार भी सीएम ने उन्हें मिल चालू करने का भरोसा दिलाया था। मैं सीएम का आभार जताता हूं। अगले सत्र से चीनी मिल चालू हो जाएगी।
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इससे 706 मिल कर्मी बेरोजगार हो गए थे। तभी से मिल को चालू करने की मांग चली आ रही है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में मिल को पीपीपी मोड और लीज पर चलाने के फैसले से क्षेत्र के किसानों में हर्ष है। उनमें गन्ना खेती को बढ़ाने की फिर आस जाग उठी है।
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सरकड़ा गांव स्थित दि किसान सहकारी चीनी मिल की स्थापना 1980 में की गई थी। 1984 से पेराई सत्र शुरू हुआ था। मिल से लाभ तो कम हुआ और मिल धीरे-धीरे घाटे में जाती रही। साल 2017 तक 32 सालों में मिल पर घाटा बढ़कर 402 करोड़ रुपये हो गया।
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अकेले 2016-17 के पेराई सत्र में ही चीनी मिल ने सरकार को 48 करोड़ का घाटा दिया था। चीनी मिल की आर्थिक स्थिति डांवाडोल होती देख भाजपा सरकार ने 30 नवंबर 2017 को कैबिनेट की बैठक में मिल को पीपीपी मोड पर चलाने का निर्णय लेते हुए उसे बंद कर दिया ।
इस पर बेरोजगार हुए 706 मिल कर्मियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। विधायक सौरभ बहुगुणा ने चीनी मिल को पुन: चालू कराने के लिए हर बार सदन में मामले को उठाया।
बुधवार को देहरादून में कैबिनेट की बैठक में सितारगंज चीनी मिल को लीज और पीपीपी मोड पर चलाने के फैसले से क्षेत्र के किसानों में हर्ष है। सहकारी गन्ना विकास समिति के पूर्व चेयरमैन उपकार सिंह ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। कहा कि मिल चालू होने से जहां क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा तो वहीं किसानों को भी उनके गन्ने का उचित मूल्य मिल सकेगा।
बढ़ने के बजाय घटती गई रिकवरी
सितारगंज। दि किसान सहकारी चीनी मिल के 32 वर्षों के इतिहास में सिर्फ वर्ष 1985-86 में ही सर्वाधिक चीनी की रिकवरी 9.84 फीसदी तक पहुंची था।
यह रिकार्ड मिल के इतिहास में सर्वाधिक रहा था। राज्य गठन के बाद से चीनी की रिकवरी भी घटती गई और 2013-14 के पेराई सत्र में सबसे कम 7.82 फीसदी रिकवरी पहुंची थी। ब्यूरो
बहुगुणा ने सीएम का आभार जताया
सितारगंज। विधायक सौरभ बहुगुणा ने कहा कि मिल के बंद होने के बाद से वह मिल चालू करने की मांग को सदन में रख रहे हैं। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और तत्कालीन वित्त मंत्री स्व. प्रकाश पंत ने सदन में मिल संचालित करने का आश्वासन भी दिया था। इस बार भी सीएम ने उन्हें मिल चालू करने का भरोसा दिलाया था। मैं सीएम का आभार जताता हूं। अगले सत्र से चीनी मिल चालू हो जाएगी।