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Udham Singh Nagar News: कार सेवा में जाने को घर से निकले और हो गए थे गिरफ्तार
Sat, 20 Jan 2024 02:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 20 Jan 2024 02:05 AM IST
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स्व अशोक सिंघल के साथ वेद ठुकराल।
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रुद्रपुर। पूर्व मंडी समिति अध्यक्ष बलदेव सिंह छाबड़ा वर्ष 1990 में अपने आठ साथियों के साथ कार सेवा के लिए अयोध्या जाने के लिए घर से निकले तो थे मगर रुद्रपुर में गिरफ्तार कर लिए गए। वे राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा होने को ऐतिहासिक और गौरवमय बता रहे हैं। भूरारानी निवासी कारोबारी बलदेव बताते हैं कि उन्हें बलवंत अरोरा, राजेंद्र काला सहित अन्य साथियों के साथ अल्मोड़ा जेल भेज दिया गया था। लेकिन जेल में गिरफ्तार होने वाले कारसेवकों की संख्या बहुत अधिक थी। भीड़ ज्यादा होने की वजह से तीन दिनों तक परेशानियां हुईं। इसके बाद उनको बागेश्वर में एक स्कूल में बनाई अस्थायी जेल भेजा गया। यहां खुलापन था और जेल जैसा कोई प्रतिबंध नहीं था। यहां वे अपने साथियों के साथ 13 दिन रहे थे। उस समय वे भाजपा के ब्लाक महामंत्री होते थे। कहा कि कार सेवा में रामभक्तों ने बलिदान दिया और प्रताड़ना सही थी। अब ये बलिदान और त्याग सार्थक हो रहा है।
सरकारी कर्मचारी रहते आंदोलन की गतिविधियों में लिया हिस्सा
रुद्रपुर। भाजपा नेता वेद ठुकराल ने 90 के दशक में हुए राम जन्म भूमि आंदोलन की यादें साझा करते हुए बताया कि आंदोलन के प्रणेता स्व. अशोक सिंघल का तराई में काफी प्रवास रहता था और रुद्रपुर आंदोलन का मुख्य केंद्र था। उन्होंने राजेंद्र बजरंगी के साथ कई बार हरिद्वार से धर्म संसद के लिए संतों को एकत्र कर लाने-ले जाने का कार्य किया। छह दिसंबर को जब ढांचा ढहा तो रुद्रपुर से छह कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे। 90 के दशक में वह उद्योग मंत्रालय में कनिष्ठ अधिकारी थे। उनके पास सरकारी पहचान पत्र होने के कारण अयोध्या आने जाने में कोई रुकावट नहीं होती थी। जगह-जगह संतों के कार्यक्रम और जन जागरण का कार्य बखूबी किया था।
सरकारी कर्मचारी रहते आंदोलन की गतिविधियों में लिया हिस्सा
रुद्रपुर। भाजपा नेता वेद ठुकराल ने 90 के दशक में हुए राम जन्म भूमि आंदोलन की यादें साझा करते हुए बताया कि आंदोलन के प्रणेता स्व. अशोक सिंघल का तराई में काफी प्रवास रहता था और रुद्रपुर आंदोलन का मुख्य केंद्र था। उन्होंने राजेंद्र बजरंगी के साथ कई बार हरिद्वार से धर्म संसद के लिए संतों को एकत्र कर लाने-ले जाने का कार्य किया। छह दिसंबर को जब ढांचा ढहा तो रुद्रपुर से छह कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे। 90 के दशक में वह उद्योग मंत्रालय में कनिष्ठ अधिकारी थे। उनके पास सरकारी पहचान पत्र होने के कारण अयोध्या आने जाने में कोई रुकावट नहीं होती थी। जगह-जगह संतों के कार्यक्रम और जन जागरण का कार्य बखूबी किया था।
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