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भूमि अधिग्रहण मुआवजे का एक और फर्जीवाड़ा 

Thu, 23 Mar 2017 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सितारगंज।
ब्यूरो/अमर उजाला, सितारगंज। Updated Thu, 23 Mar 2017 12:40 AM IST
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Land acquisition fraud
FRAUD SHIMLA

सितारगंज। एनएच 125 में भूमि अधिग्रहण का एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। किसान की जमीन एएनएच की जद में न आने के बाद भी एक अन्य किसान के नाम जमीन दर्शाकर मुआवजा स्वीकृत कर दिया गया। किसान को इसकी जानकारी मिलने पर उसने प्रशासन से शिकायत की। जिस पर दो बार हुई मामले की जांच में पटवारी और राजस्व निरीक्षक दोषी भी पाए गए। एसडीएम ने तहसीलदार को दोषी राजस्व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए लेकिन, दस माह बाद भी ये आदेश सिरे नहीं चढ़ा।

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  डोहरा गांव के सौ वर्ष से अधिक उम्र के किसान अर्जुन सिंह ने बताया कि वर्ष 1975-76 में उनका परिवार पाकिस्तान से विस्थापित होकर यहां आया था। तब सरकार द्वारा उन्हें गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत वर्ग एक ‘ख’ की जमीन का पट्टा आवंटित किया गया था। अर्जुन सिंह ने बताया कि दस नवंबर 2015 को विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय से बलवंत सिंह के नाम राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3 ई, 3 एच के अंतर्गत केंद्र सरकार के पक्ष में कब्जा देने और अधिग्रहित जमीन का मुआवजा आवंटित होने का नोटिस जारी हुआ।
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इसके माध्यम से फर्जीवाड़े का पता चला कि सितारगंज से खटीमा तक निर्माणाधीन नेशनल हाइवे 125 में खैराना स्थित उसकी कृषि भूमि के खाता नंबर 95 खसरा नंबर 1/2 रकबा 0.3570 हेक्टेयर भूमि में से करीब 0.1000 हेक्टेयर रकबा को डोहरा के बलवंत सिंह के नाम दर्ज कर इसे एनएच 125 में दर्शाया गया है। इस पर उसने दिसंबर 2015 में एसडीएम से फर्जीवाड़े की शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। 14 दिसंबर 2015 को तत्कालीन एसडीएम ने तहसीलदार को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
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तहसीलदार दस मई 2016 को जांच रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी। इसमें अर्जुन सिंह के आरोप सही पाए गए और हल्का पटवारी द्वारा फर्जी तरीके से जमीन एनएच 125 में अधिग्रहित दर्शाया गया था। इस पर 17 मई 2016 को एसडीएम ने तहसीलदार को राजस्व उपनिरीक्षक, राजस्व निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए लेकिन, मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई और राजस्व विभाग द्वारा फर्जीवाड़े की फाइल को दबा दिया गया। इसके बाद फिर 21 जनवरी को पुन: तहसीलदार ने जांच कराई।

इसमें आरोप सही साबित होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इससे किसान में रोष है। अर्जुन ने कहा कि विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय से उक्त जमीन का करीब दस लाख रुपये मुआवजा मिलना था। उसने इसे लेने से मना कर दिया और कहा कि मामले की तथ्यों के साथ जांच होनी चाहिए। अगर, उनकी जमीन एनएच की जद में आ रही है तो मुआवजा उन्हें दिया जाए। वरना, फर्जीवाड़ा करने वाले राजस्व कर्मियों, किसान के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

सितारगंज। भूमिधरी जमीन के खाता नंबर 95 खसरा नंबर 1/2 रकबा 0.3570 हेक्टेयर भूमि में से करीब 0.1000 हेक्टेयर रकबा अपने नाम कराकर एनएच में अधिग्रहित कराने के मामले में नवंबर 2016 में बलवंत ने तहसीलदार से जमीन का मुआवजा दिलाने की मांग करते प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें अर्जुन सिंह पर मिलीभगत कर खेत नंबर एक को नाले में दर्शाने का आरोप लगाया गया था।

21 जनवरी 2017 को मौजूदा हल्का पटवारी ने जांच की तो उसने अपनी जांच में खाता नंबर 95 खेत नंबर 1/2 रकबा 0.3570 हेक्टेयर भूमि अर्जुन सिंह, मानक चंद्र, सरवनराम, सोनाराम के नाम वर्ग एक ‘ख’ गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट पट्टे में 1382 फसली से दर्ज भूमि अभिलेख पाया।

खसरे के अनुसार खेत नंबर एक में से एनएच द्वारा अधिग्रहित रकबा खेत नंबर 1/1 रकबा 0.126 हेक्टेयर भूमि में से पाया। जो वर्ग 6 (1) नाले की भूमि में दर्ज अभिलेख है। इसका मुआवजा देना अनुचित माना और 1/2 रकबा एनएच मार्ग से करीब सौ मीटर दूर दक्षिण दिशा की ओर मिला। जो एनएच में अधिग्रहित नहीं हुआ है।

सितारगंज। तहसील क्षेत्र में जमीनी घोटालों के मामले दिन ब दिन बढ़ते जा रहे हैं। पीड़ितों के शिकायतें करने के बाद भी जांच के नाम पर घोटालों की फाइलों को सिर्फ अलमारियों में धूल फांकने के लिए रख दिया जाता है। यहां तक कि फर्जीवाड़े में तहसील के अधिकारी, कर्मचारियों की मिलीभगत के पुख्ता, प्रमाणित सबूत मिलने के बाद भी स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला मुख्यालय तक अफसरान मौन हैं।

इससे राजस्व अधिकारी बेखौफ होकर लाखों-करोड़ों कमाने के चक्कर में जमीनों के मामलों में धांधलेबाजी कर रहे हैं। 27 फरवरी को वार्ड नंबर एक चिंतीमजरा मोहल्ला निवासी मंजीत कौर पत्नी महेंद्र सिंह ने कुमाऊं आयुक्त, मुख्य सचिव समेत तमाम उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर तहसील के अधिकारी, कर्मचारियों के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।


मंजीत ने कोतवाली में तहरीर देकर आरोपी तहसीलदार, पटवारी और चार अन्य फर्जी खातेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी लेकिन, न तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और न ही प्रशासनिक अफसरों ने मामले में कोई कार्रवाई की जबकि, सात मार्च को इस मामले में अपर कुमाऊं आयुक्त संजय कुमार ने डीएम को तत्काल कार्रवाई के आदेश भी दिए। जिससे पीड़ित पक्षों में प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है।

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